दुमका : पैनल अधिवक्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम - Live Aaryaavart

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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

दुमका : पैनल अधिवक्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

हर व्यक्ति को अनुशासित होना चाहिए : पीडीजे
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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्याय सदन में पैनल अधिवक्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम  दिन शनिवार को आरंभ हुआ।  नालसा, दिल्ली व झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा  प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित  करवाया गया। 51 पैनल अधिवक्ताओं को यह  प्रशिक्षण दिया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन प्राधिकार के चेयरमैन सह पीडीजे ओमप्रकाश सिंह सहित अन्य न्यायाधीशों ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्जवलित कर किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीडीजे श्री सिंह ने अधिवक्ताओं को अनुशासन में रहकर कानून की बारिकियां जानने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुशासित हर व्यक्ति को होना चाहिए। चाहे बच्चे हो, बड़ा हो, बुढ़े हो, जीवन के हर क्षेत्र में अनुशासन जरूरी है। अनुशासित व्यक्ति ही जीवन में तरक्की करती है। उन्होंने कहा कि समय से काम करने पर दुनिया उसी रूप में जानेगी। काम के आधार पर लोगों की पहचान बनती है। उन्होंने समय की महत्ता देते हुए कहा कि समय से न्यायिक पदाधिकारी को बैठना चाहिए। अधिवक्तओं को भी न्यायालय में समय से आने की सलाह दी। जिससे ससमय न्यायिक कार्यो का निपटारा किया जा सके। पैनल अधिवक्ताओं के सूची में फेर-बदल पर कहा कि परिवर्तन ही संसार का नियम है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि कुछ नये चेहरे आने चाहिए और परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने पुरानी बातें को पुनवृति नहीं होने और दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आपस में चर्चा होने से न्यायधिशों और अधिवक्ताओं को भी सिखने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि अच्छे कामों के लिए सवोच्च न्यायालय के न्यायाधीश से पीएलवी मंगला देहरी को सम्मान पाना जिले के लिए गर्व की बताया। अधिवक्ताओं से भी उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित होने एवं चयनित होने में हर सहयोग का आश्वासन दिया। प्राधिकार सचिव निशांत कुमार के सकारात्मक कार्यो की सराहना की।  वहीं पैनल अधिवक्ताओं का बकाया की जल्द भुगतान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि फैमली जज नलीन कुमार चयनित पैनल अधिवक्ताओं को उनके उद्देश्यों से अवगत करवाते हुए न्यायिक प्रक्रिया के तहत गरीब और पिछड़े लोगों को न्याय दिलाना बताया। उन्होंने कहा कि वकालत का फायदा है कि इसके कोई कायदे नहीं होते है। लेकिन स्वयं अनुशासन के मान दंडों को तय करना से उसका महत्व बढ़ जाता है। इस लिए अधिवक्ताओं को खुद अनुशासन का महत्व तय कर अनुशासित होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किस तरह का मुकदमा अधिवक्ता लड़े यह वादी तय करता है। अधिवक्ता केस के बहस से अधिक सिखते है। ऐसे में वैसे केस जो उनके पास नहीं आता है, उन पहलूओं को जानने से वंचित हो जाते है। उन्होंने प्रशिक्षण के जरीए सिखने की सलाह देते हुए कहा कि सिखने की कोई उम्र नहीं होती है। डीजे वन तौफिकुल हसन ने मुख्य कार्य की अग्रसर रहने वादियों को दिभ्रमित नहीं कर अधिक से अधिक समझौता करवाने का सलाह दिया। उन्होंने कहा कि गरीब पर ईश्वर की कृपा होती है। उसी मे खुशी महसूस करता है। छोटे-छोटे चीजों को लेकर लड़ाई नहीं करने और सुलह-समझौता से वादों का निपटारा दिलाने में सहयोग की अपील की। डीजे टू पवन कुमार ने कहा कि जिम्मेदारियों की महत्ता समझ ईमानदारीपूर्वक जिम्मेदारियों को निर्वहन को प्रेरित किया। सीजेएम देवाशीष महापात्रा ने कहा कि कानून का अंत नहीं है। कानूनी पहलूओं को बार-बार अभ्यास करने और मिल बैठक चर्चा करने से नया आयाम निकलता है। उन्होंने न्याय के माध्यम से सभी का कल्याण को प्रेरित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में न्यायिक विभिन्न पहलूओं पर चर्चा होगी। न्यायाधिशों में एसीजेएम संजय दूबे, एसडीजेएम प्रताप चंद्र, प्रथम श्रेणी, न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार, बंकिमचंद्र चटर्जी, प्रशिक्षु जज विजय यादव एवं जितेंद्र राम उपस्थित थे। उद्घाटन कार्यक्रम में मंच संचालन प्राधिकार सचिव निशांत कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने किया।

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