पूर्णिया : जन्मदिवस पर याद किए गए डॉ हनीमैन - Live Aaryaavart

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बुधवार, 10 अप्रैल 2019

पूर्णिया : जन्मदिवस पर याद किए गए डॉ हनीमैन

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पूर्णिया (आर्यावर्त संवाददाता): होम्योपैथ के अविष्कारक कहे जाने वाले डॉ सेमुएल हनीमैन का जन्मदिवस सहयोग स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा संस्थान के बैनर तले ओएचएम व पीएचएम के तत्वावधान में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ अजीत प्रसाद सिंह ने की। कार्यक्रम में डॉ हेनिमैन के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित व पुष्पाजंली अर्पित कर याद किया गया। सभा को संबोधित करते हुए डॉ अजीत ने कहा कि होम्योपैथ के अविष्कारक डॉ सेमूल हेनिमैन हैं। उनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी में हुआ था। हेनिमैन के पिता एक पेंटर थे और वह काफी गरीब परिवार के थे। अजीत ने कहा हेनिमैन ने अपनी गरीबी से जूझते हुए भी एलोपैथ का डिग्री हासिल की। उन्होंने गरीब वर्ग के लोगों को सस्ते में अच्छे इलाज के बारे में सोचा और काफी अनुसंधान और प्रयोग के बाद होम्योपैथ चिकित्सा का अविष्कार किया। यहां तक कि इस चिकित्सा पद्धति को हर गरीब वर्ग के लोगों तक पहुंचाने का काम किया। एलोपैथ में कई तरह के बदलाव आए लेकिन होम्योपैथ आज तक वही अपने पुराने वसूल और सिद्धांत पर चल रहा है। अजीत ने कहा होम्योपैथ सस्ता ही नहीं किसी भी बीमारी को जड़ से नष्ट कर देने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा हेनिमैन ने अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं को झेला लेकिन उनकी सकारात्मक सोच और प्रयास आज तक जीवित हैं। उन्होंने कहा कुछ संगठन बाजार नीति के कारण होम्योपैथ सेवा को दबाने के प्रयास में लगे हैं। इसलिए होम्योपैथ चिकित्सकों को हमेशा सजग और संगठित रहने की जरूरत है। हमें हेनिमैन के बताए हुए सिद्धांत पर हमेशा चलते रहना होगा। उन्होंने कहा संगठन मजबूत होने पर ही चिकित्सा को कायम रख सकते हैं। वहीं डॉ अरएम सिंह मनोज ने कहा डॉ हेनिमैन 24 वर्ष के उम्र में ही एमडी की डिग्री हासिल कर ली। जर्मनी में होम्योपैथ की बढ़ती लोकप्रियता से घबराए हुए एलोपैथ के समर्थक लोगों ने हेनिमैन को अपने ही देश से भगा दिया। डॉ मनोज ने कहा लेकिन हेनिमैन ने हिम्मत नहीं हारी और फ्रांस में शरण लिया और अपने हुनर का परिचय देनेे लगे। हेनिमैन के अविष्कार और होम्योपैथ दवा व इलाज का चमत्कार पूरे विश्व में फैल गया। मनोज ने कहा हेनिमैन कई भाषा के ज्ञाता थे और उन्होंने नए नए शोध और चमत्कार कर पूरे विश्व को चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया आयाम दिया। उन्होंने कहा हेनिमैन के शोध और होम्योपैथ इलाज के कारण कई देशों में सम्मानित किया गया। मनोज ने कहा 2 जुलाई 1843 को होम्योपैथ के जन्मदाता डॉ हेनिमैन का निधन हो गया लेकिन उनका योगदान और कृत्य आज भी पूरे विश्व में जीवित है। डॉ मनोज कुमार ने कहा होम्योपैथ चिकित्सा से बढ़ कर और कोई चिकित्सा पद्धति नहीं है। लेकिन देश की बाजार नीति के कारण कई लोग इस चिकित्सा को दबाने की कोशिश में हैं। लेकिन होम्योपैथ चिकित्सा के प्रति आमलोगों का काफी भरोसा और विश्वास है। डॉ मनोज ने कहा कई एलोपैथ के डॉक्टर खुद अपनी चिकित्सा पद्धति से संतुष्ट नहीं है और होम्योपैथ का सहारा ले रहे हैं। 

...समारोह में ये लोग थे मौजूद : 
डॉ अजीत प्रसाद सिंह, डॉ आरएम सिंह मनोज, डॉ मनोज कुमार, डॉ खुर्शीद आलम, डॉ मधुकर कुमार, डॉ जावेद आलम, डॉ पुष्प कमल, डॉ शम्स कमर, डॉ एसके जैसवाल, डॉ संजय कुमार, डॉ आरएस कुमार, डॉ अभिषेक कुमार, डॉ बंतेश बंतेश नारायण मेहता, मनी गोस्वामी, दिलीप कुमार, उमेश कुमार सिंह, मांगन ठाकुर, राहुल कुमार, मिथिलेश कुमार, मोहित कुमार, सतीश ठाकुर मौजूद थे।

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