बिहार : भाजपा के कद्दावर राधामोहन के सामने ताल ठोक रहे नवोदित आकाश - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 10 मई 2019

बिहार : भाजपा के कद्दावर राधामोहन के सामने ताल ठोक रहे नवोदित आकाश

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पटना 10 मई, बिहार में छठे चरण के लोकसभा चुनाव में पूर्वी चंपारण का पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता एवं केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह के सामने राजनीति में पदार्पण कर रहे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के प्रत्याशी आकाश कुमार सिंह ताल ठोक रहे हैं। बिहार में छठे चरण में 12 मई को वाल्मीकिनगर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सीवान और महाराजगंज में वोट डाले जायेंगे। पूर्वी चंपारण भाजपा के दिग्गज नेता और केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का गढ़ माना जाता है। भाजपा के टिकट पर श्री सिंह चुनावी मैदान में हैं और उन्हें रालोसपा के टिकट पर कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह के पुत्र आकाश कुमार सिंह चुनौती दे रहे हैं। वर्ष 2002 के परिसीमन से पूर्व पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट का नाम मोतिहारी था। परिसीमन के बाद 2008 में पूर्वी चंपारण सीट अस्तित्व में आई। कल के मोतिहारी और अब की पूर्वी चंपारण सीट की पहचान कांग्रेस के गढ़ के रूप में रही है। लेकिन, पिछले ढाई-तीन दशकों में भाजपा ने लगातार मशक्कत के बाद यहां अपनी पैठ बनाई है। वर्ष 1952 से लेकर अबतक सर्वाधिक छह बार कांग्रेस प्रत्याशियों को यहां के वोटरों ने लोकसभा भेजा है। इसके बाद केवल भाजपा ही है, जिसने पांच बार विजय हासिल की है। पांचों बार भाजपा नेता राधामोहन सिंह ने जीत का परचम लहराया। उनसे पूर्व कांग्रेस के विभूति मिश्र ऐसे राजनेता रहे, जिन्होंने वर्ष 1952 से 1971 तक लगातार जीत हासिल की।

मोतिहारी संसदीय सीट पर 1952 में हुये चुनाव मे कांग्रेस के टिकट पर विभूति मिश्रा ने जीत हासिल की। इसके बाद 1957 ,1962,1967 और 1971 में भी श्री मिश्रा ने ही कांग्रेस का परचम लहराया। वर्ष 1977 में लोकसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस को यहां मुंह की खानी पड़ी। जनता पार्टी के प्रत्याशी ठाकुर रमापति सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार श्री मिश्र को पराजित किया। वर्ष 1980 में में भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली और यहां से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के टिकट पर कमला मिश्र मधुकर चुने गये। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर में यहां के लोगों ने वर्ष 1984 के चुनाव में पुन: कांग्रेस को जिताया। प्रभावती गुप्ता लोकसभा पहुंची। इस चुनाव के बाद जिले की राजनीति ने करवट ली और भगवा रंग का पहली बार असर दिखा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले राधामोहन सिंह को भाजपा ने वर्ष 1989 में पहली बार लोकसभा का टिकट दिया और उन्होंने पहली बार में ही जीत हासिल की। वर्ष 1991 में फिर भाकपा के टिकट पर कमला मिश्र मधुकर चुनाव जीते लेकिन 1996 का चुनाव जीतकर फिर श्री सिंह ने अपना परचम लहराया। वर्ष 1998 के चुनाव में श्री सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की रमा देवी चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं। वर्ष 1999 में अटल लहर में भाजपा के टिकट पर श्री सिंह एक बार फिर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। वर्ष 2004 में फिर इस सीट पर सियासत ने पलटी मारी और भाजपा प्रत्याशी राधामोहन सिंह को हार का सामना करना पड़ा। राजद के अखिलेश प्रसाद सिंह जीतने में कामयाब रहे। वर्ष 2008 में मोतिहारी सीट पूर्वी चंपारण के नाम से अस्तित्व में आया। फिर इस सीट पर भाजपा का कमल खिलना शुरू हुआ। अगले दो 2009 और 2014 के दो चुनाव में राधामोहन सिंह को जीत हासिल हुई। वर्ष 2009 के चुनाव में श्री सिंह ने (राजद) प्रत्याशी अखिलेश प्रसाद सिंह और वर्ष 2014 में राजद प्रत्याशी विनोद कुमार श्रीवास्तव को पराजित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कैबिनेट में जगह दी और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बावजूद यहां के किसान आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो वहीं युवा रोजगार के लिए तरस रहा है। ऐसे में विकास के नाम पर वोट मांगने वाली भाजपा की यहां पर जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां की जनता अपने सांसद राधामोहन सिंह से किस हद तक संतुष्ट हैं। इस संसदीय क्षेत्र में जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फैक्टर भी शामिल होगा क्योंकि राज्य में उनकी सरकार है और वह भाजपा के साथ हैं।

चंपारण का नाम 'चंपा और अरण्य' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'चंपा के पेडों से आच्‍छादित जंगल। एक ओर चंपारण की भूमि मां सीता की शरणस्थली होने से पवित्र है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास का अमूल्य पन्ना है, जिस पर हर भारतीय को नाज है। गांधी जी का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास की अमूल्य धरोहर है। स्वाधीनता संग्राम के समय चंपारण के ही स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर बापू 1917 में मोतिहारी आए थे। उन्होंने नील्हों के खिलाफ असहयोग शुरुआत यहीं से की थी। यह यहां भगवान बुद्ध ने लोगों को उपदेश दिए और विश्राम किया। यहां कई बौद्ध स्तूप भी हैं। इस क्षेत्र की सीमाएं नेपाल से जुड़ती हैं। सत्याग्रह शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अप्रैल 2018 को मोतिहारी आए। यहां से पूरे देश को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया गया। इस संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की छह सीटें हरसिद्धी (सु), गोविंदगंज, केसरिया, कल्याणपुर, पिपरा और मोतिहारी आती हैं। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में इनमें से तीन भाजपा ने, दो राजद ने और एक सीट लोजपा ने जीती थी। इनमें हरसिद्धी (सु ) से राजेन्द्र कुमार (राजद), गोविंदगंज से राजू तिवारी (लोजपा), केसरिया से डॉ. राजेश कुमार (राजद), कल्याणपुर से सचिन्द्र प्रसाद सिंह (भाजपा), पिपरा से श्याम बाबू प्रसाद यादव (भाजपा) और मोतिहारी से प्रमोद कुमार (भाजपा) के विधायक हैं। सतरहवें आम चुनाव (2019) में पूर्वी चंपारण से कुल 22 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें भाजपा, रालोसपा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और छह निर्दलीय समेत 22 उम्मीदवार शामिल हैं। पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र में करीब 16 लाख 31 हजार मतदाता हैं। इनमें करीब आठ लाख 71 हजार पुरुष और सात लाख 60 हजार महिला शामिल हैं।

यूं तो पूर्वी चंपारण की चुनावी फिजा में कई मुद्दे तैर रहे लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जनता अधिक मुखर है। वोट के लिए घर-घर पहुंचने वाले नेताओं से सवाल दागे जा रहे हैं। शहर की मोतीझील का विकास यहां के लोगों के लिए भावनात्मक मुद्दा रहा है। इसके विकास के लिए जो प्रयास शुरू किए गए, वह अब तक पूरे नहीं हुए हैं। मोतीझील अतिक्रमण से लगातार सिकुड़ती जा रही है। अभी तक महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी है। सिर्फ 32 एकड़ जमीन ही विश्वविद्यालय को अब तक मिल पायी है। मोतीझील पर एक अतिरिक्त पुल की जरूरत है। पूर्व में रोइंग क्लब से श्रीकृष्णनगर तक पुल निर्माण की बात उठी थी। कई घोषणएं भी हुईं, लेकिन निर्माण की दिशा में गंभीर पहल होती नहीं दिख रही। मोतिहारी को नगर निगम का दर्जा देने की पूर्व में घोषणा हुई थी लेकिन घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी। वहीं, इस संसदीय क्षेत्र में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण कार्य हुये हैं। रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण कर उसे बेहतर लुक दिया गया। रेलवे लाइन का विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ जबकि दोहरीकरण कार्य निर्माणाधीन है। पीपराकोठी को कृषि के तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया गया। यहां राष्ट्रीय समेकित कृषि अनुसंधान केंद्र, बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय की स्थापना के साथ बंबू नर्सरी एवं पशुओं के सीमेन के लिए केंद्र खोला गया। कोटवा में मदरडेयरी प्लांट की स्थापना की गई। हरसिद्धि में गैस बॉटलिंग प्लांट की स्थापना हुई। कौशल विकास के लिए केंद्र खोला गया। केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ कई छोटे-बड़े कार्य नियमित रूप से होते रहे। लेकिन, स्थानीय किसानों को उनकी उपेक्षा खटकती है। बंद चीनी मिलों को चालू कराने और गन्ना उत्पादकों का बकाया भुगतान भी लंबित है।

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