वोट और नोट बैंक की राजनीति ने न्यायालय पर भी शिकंजा कस दिया है : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती - Live Aaryaavart

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रविवार, 26 मई 2019

वोट और नोट बैंक की राजनीति ने न्यायालय पर भी शिकंजा कस दिया है : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

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कुमार गौरव । पूर्णिया : देश में विकास, राजनीति और धर्म के नाम पर विकृति फैलाई जा रही है। देश में इन दिनों फूट डालो और राजनीति करो का कारोबार चल रहा है। लोगों में फूट डालने के लिए धर्म, संप्रदाय, जातपात और क्षेत्रीयता का मुद्दा बनाकर लोगों को आपस में लड़ाने और फूट डालने का काम हो रहा है। देश में नोट और वोट की राजनीति में न्यायालय पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। उक्त बातें गोवर्धन मठ पुरी के जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पूर्णिया प्रवास के दौरान दूसरे दिन रविवार को जिला स्कूल स्थित वीरेंद्र मोहन ठाकुर के निज आवास पर आयोजित धर्म सभा में कही। स्वामी निश्चलानंद ने कहा न्यायालय जब देश और धर्म के संबंध में कोई बड़ा फैसला करना चाहता है तो देश के कुछ राजनेता न्यायालय पर दबाव बना कर फैसला को प्रभावित करने का प्रयास करने लगते हैं। देश का न्यायालय जब तक स्वतंत्र और निर्भिक नहीं होगा तब तक विवाद का सुलह हो पाना संभव नहीं है। स्वामी निश्चलानंद ने कहा देश की राजनीति से न्यायालय को अलग रखने की जरूरत है। 

...शिक्षण संस्थान के नाम पर विकृति : 
शंकराचार्य जगतगुरू स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में शिक्षण संस्थाओं पर भी जम कर निशाना साधा। कहा देश में लोगों को शिक्षा देने के नाम पर शिक्षण संस्था खोले गए हैं लेकिन इन संस्थाओं में पढ़ाई से ज्यादा विकृति देखी जा रही है। स्वामी निश्चलानंद ने कहा शिक्षण संस्था मात्र एक बहाना है दरअसल इस संस्था के माध्यम से दूषित राजनीति और विकृति का पाठ पढ़ाया जाता है। वैसे स्वामी जी ने किसी संस्था का नाम तो नहीं लिया लेकिन निशाना जेएएनयू पर ही था। स्वामी जी ने कहा शिक्षण संस्थाओं का हाल यह है कि यहां बच्चे तो जाते है पढ़ाई व ज्ञान हासिल करने लेकिन पढ़ाई की जगह दूषित राजनीति और देश विरोध का पाठ पढ़ाया जाता है। शंकराचार्य ने कहा जब तक ऐसी संस्थाओं की गतिविधि के ऊपर लगाम नहीं लगेगा तब तक साफ सुथरा शिक्षा की परिकल्पना संभव नहीं है।

...रामसेतु व गौ हत्या का विरोध करने वालों को देशद्रोही बताया : 
शंकराचार्य जगतगुरू स्वामी निश्चलानंद स्वामी ने कहा भारत और श्रीलंका के बीच सुमुद्र में भगवान श्रीराम ने श्रीलंका जाने के लिए रामसेतु बनाई थी। जो आज भी मौजूद है। लेकिन देश की गंदी राजनीति ने रामसेतु को भी राजनीति में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शंकराचार्य ने कहा इस सेतु को भगवान श्रीराम ने ही बनाई थी इसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग और श्रीलंका सरकार ने भी की है। लेकिन भगवान के बनाए हुए सेतु को भी देश के कुछ राजनेताओं ने अपना चुनावी मुद्दा बना कर विवाद के कठघरे में खड़ा कर दिया है। शंकराचार्य ने कहा देश में गौ रक्षक से अधिक गौ भक्षकों की संख्या है। जो लोग गौ को माता या लक्ष्मी मानते हैं वे लोग यदि गौ हत्या का विरोध कर देंगे पर वैसे गौ रक्षकों को देशद्रोही बना दिया जाता है। यह हिन्दू धर्म पर सीधे तौर पर हमला करने के बराबर है। 

...सभी प्रधानमंत्री हिन्दू समुदाय के लेकिन फिर भी हिन्दुत्व खतरे में : 
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा देश में आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी हिन्दू धर्म के लोग ही प्रधानमंत्री बने। लेकिन उसके बाद भी दुर्भाग्य है कि हिन्दू धर्म खतरे में है और विलुप्त होने के कगार पर है। शंकराचार्य ने कहा देश में हिन्दू धर्म को नोट वोट और कमाने का जरिया बना दिया गया है। शुरू से लेकर आज तक हिन्दू धर्म के लोग प्रधानमंत्री बनने के बाद भी राम मंदिर का स्थापना नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा जब भी चुनाव का समय आता है तो देश के नेता माथे पर चंदन का लेप लगा कर मंदिरों में पहुंच जाते हैं और हिन्दुत्व रक्षा और राम मंदिर निर्माण की बात करने लगते हैं। लोग भी इन बहुरूपिया राजनेताओं के झांसे में आकर राम मंदिर और धर्म रक्षा के नाम पर सरकार की कुर्सी पर बैठा देते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव के बाद कुर्सी मिल जाती है राम मंदिर और धर्म रक्षा की बातें भूला दी जाती है। 

...राजनीति के नाम पर समाज को बांट रहे :
देश में राजनीति के नाम पर समाज को टुकड़ों में बांटा जा रहा है। जात, धर्म और क्षेत्र के नाम पर लोगों में फूट डाला जा रहा है। स्वामी ने कहा संविधान की धारा 25 में हिन्दू धर्म से संबंधित सभी धर्म को हिन्दू धर्म में समेट दिया गया है लेकिन देश के राजनेता संविधान की धारा 25 को दबा कर रख दिया है। हिन्दू धर्मावलंबियों में गरीबी का नाजायज फायदा दूसरे धर्म के लोग उठा रहे हैं जो काफी चिंता का विषय है।

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