बिहार : भाकपा-माले के पक्ष में साहित्यकार-संस्कृतिकर्मी-बुद्धिजीवियों की अपील - Live Aaryaavart

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बुधवार, 15 मई 2019

बिहार : भाकपा-माले के पक्ष में साहित्यकार-संस्कृतिकर्मी-बुद्धिजीवियों की अपील

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आरा (आर्यावर्त संवाददाता) देश के लोकतंत्र और संविधान के लिहाज से 2019 का चुनाव एक निर्णायक चुनाव है। मुट्ठी भर पूंजीपति तथा सांप्रदायिक-जातिवादी-लैंगिक भेदभाव और नफरत से ग्रस्त फासिस्ट शक्तियां पूरे सामाजिक और लोकतांत्रिक ढांचे को नष्ट करने पर आमादा हैं। राफेल का मामला हो या सीबीआई, एस.एस.सी का- हर मामले में संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। सांप्रदायिक जनसंहारों, दलितों के उत्पीड़न व हत्या के दोषियों और नृशंसतम यौन हिंसा के आरोपियों को सत्ताधारी पार्टी शर्मनाक तरीके से बचा रही है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए सेना के जवानों को जानबूझकर मौत के मुंह में झोंका जा रहा है। उनकी शहादत से भी चुनावी फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद होने वाले हेमंत करकरे जैसे अफसर की शहादत के बाद भी आतंक की आरोपी भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा अपमानित किया जाता है और देश का प्रधानमंत्री उस आतंकी की तरफदारी करता है। यह अभूतपूर्व शर्म की स्थिति है। गोविंद पानसरे, डाॅ. नरेंद्र दाभोलकर प्रो. एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश के हत्यारों के संगठन का संबंध भी इनसे है। सत्ता संरक्षण के कारण सामंती-सांप्रदायिक हत्यारे चुनाव के दौरान में माॅब लिंचिंग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। खुद भाजपा के प्रधानमंत्री और नेता सामंती-सांप्रदायिक-अंधराष्ट्रवादी भावनाएं भड़काने से बाज नहीं आ रहे हैं।  नरेंद्र मोदी की पांच साल की सरकार में प्रगतिशील मानवीय मूल्यों, देश की साझी संस्कृति, तर्कशीलता और वैज्ञानिक बोध पर चैतरफा हमला किया गया है। जनता को भयानक अंधकार में धकेलने की कोशिश की गई है।  आज लोकतंत्र की हर संस्था की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। न्यायपालिका, मीडिया और यहां तक कि चुनाव आयोग तक निष्पक्ष नहीं रह गया है। जज, पत्रकार, ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी तक को परेशान किया जा रहा है या उनकी हत्याएं की जा रही हैं। जनांदोलनों के नेताओं का उत्पीड़न जारी है। आम जनता चुनावों के जरिए अपना सच्चा प्रतिनिधि चुन सके, इसकी परिस्थितियां मुश्किल बना दी गई हैं। कारपोरेट के एजेंटों, करोड़पतियों, भ्रष्ट नौकरशाहों, अपराधी-माफियाओं ने एक तरह से संसद को अपने शिकंजे में ले रखा है। देश और लोकतंत्र के बेहतर भविष्य के लिए संसद और विधानसभाओं को भी जनविरोधी शक्तियों के चंगुल से आजाद कराना जरूरी है। आज यह पिछले किसी भी समय से ज्यादा जरूरी है कि मतदाता अपनी ताकत और एकजुटता के जरिए ऐसे उम्मीदवार को चुनें, जो संसद में जाकर उनके जीवन के बुनियादी मुद्दों को उठाए। जनता के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए संघर्ष तेज करे।  32-आरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से महागठबंधन समर्थित भाकपा-माले के प्रत्याशी राजू यादव ऐसे ही उम्मीदवार हैं, जिन्होंने छात्र-युवा और किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया है, जिन्होंने रोजगार, शिक्षा, सिंचाई और फसलों की वाजिब कीमत के लिए लगातार आंदोलन चलाए हैं और लोगों को फौरी राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। वे सांप्रदायिक-जातिवादी-लैंगिक उत्पीड़न, नफरत और उन्माद की राजनीति और हर तरह के अपराध के खिलाफ चलने वाले संघर्षों की अगली कतार में रहे हैं। महंगाई, कारपोरेट लूट और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनता के संघर्ष के ये ईमानदार और जुझारू साथी रहे हैं। इनकी जिंदगी जनता की जिंदगी की बेहतरी के लिए समर्पित है।  राजू यादव के पिता एक फौजी थे। ये देशभक्ति का असली मतलब जनता के जीवन को बेहतर बनाना समझते हैं। राजू यादव ईमानदार और जनपक्षधर हैं। हमें यकीन है कि राजू यादव की जीत से आरा संसदीय क्षेत्र की जनता का सर्वांगिण विकास होगा, बुनियादी जनसुविधाओं के मामले में आरा एक माॅडल बनेगा, शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार के लिए संघर्ष तेज होगा और सुखद बदलाव होगा। सामाजिक न्याय, समानता और समाज को सच्चे अर्थों में जनतांत्रिक बनाने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। आरा का बौद्धिक-सांस्कृतिक माहौल ज्यादा बेहतर बनेगा। इसलिए आपसे अपील है कि राजू यादव को झंडे पर तीन तारा चुनाव चिन्ह पर बटन दबाकर भारी मतों से विजयी बनाएं। लोकतंत्र, संविधान और इंसानी मूल्यों को बचाने के संघर्ष को भोजपुर से एक रास्ता दिखाएं। 

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