सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 05 मई - Live Aaryaavart

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रविवार, 5 मई 2019

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 05 मई

मतदान केन्द्र में मतदान कैसे करें

sehore map
जब मतदाता मतदान केन्द्र मे प्रवेश करेगा तो इसके लिये अवाश्यक है कि उसका नाम मतदाता सूची में हो। प्रथम मतदान अधिकारी मतदाता सूची की चिन्हित प्रति का प्रभारी होगा जो मतदाता के पहचान हेतु अभिलेख का मतदाता सूची से पहचान स्थापित करेगा। पहचान सुनिश्चित होने के पश्चात द्वितीय मतदान अधिकारी अमिट स्याही का प्रभारी होगा। जो मतदाता के बायें हाथ की तर्जनी पर अमिट स्याही लगायेगा। साथ ही मतदाता रजिस्टर का प्रभारी मतदाता रजिस्टर में हस्ताक्षर या अगूठे का निशान लेगा और मतदाता पर्ची जारी करेगा। तृतीय मतदान अधिकारी मतदाता पर्ची के सरल क्रमाक के आधार पर मतदान की अनुमति देगा। मतदान कक्ष में जाकर मतदाता अपनी पसंद के प्रत्याशी के समक्ष ईव्हीएम पर नीला बटन दबायेगा लाल बत्ती चमकने के साथ साथ एक लम्बी बीप के साथ आपका सफल मतदान रिकार्ड हो जायेगा। व्हीव्हीपैट के स्क्रीन पर मतदाता सत्यापित कर सकेगा की आपका वोट आपके पसंद के प्रत्याशी को दिया गया है।

मतदान केन्द्रों पर लगाए जाएंगे मॉकपोल की जानकारी वाले पोस्टर

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा निर्वाचन-2019 के दौरान प्रत्येक मतदान केन्द्र के बाहर मतदाताओं एवं राजनैतिक दलों एवं अभ्यर्थियों के पोलिंग एजेंट को मॉकपोल संबंधी जानकारी प्रदाय करने हेतु पोस्टर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि ईवीएम के माध्यम से मतदान प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व उसमें मॉकपोल कराया जाता है तथा मॉकपोल के पश्चात् मशीन को पुनः मतदान हेतु तैयार किया जाता है। इस दौरान 6 चरणों की कार्यवाही संपादित की जाती है। इन चरणों में मॉकपोल (दिखावटी मतदान)  के दौरान आयोग द्वारा निर्धारित संख्या में वोट डालने के पश्चात् क्लोज बटन दबाया जाता है, रिजल्ट बटन दबाकर परिणाम प्राप्त किया जाता है, यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक उम्मीदवार के लिए ईव्हीएम मशीन से प्राप्त परिणाम का वीवीपैट की पर्चियों से मिलान हो, कंट्रोल यूनिट से मॉकपोल डाटा हटाने के लिए क्लियर बटन दबाया जाता है, वीवीपैट के ड्रॉप बॉक्स से पर्चियां बाहर निकालकर उन पर्चियों के पीछे मॉकपोल स्लीप की सील लगाई जाती है तथा टोटल का बटन दबाकर पोलिंग एजेंट को बताया जाता है कि अब कंट्रोल यूनिट में कोई भी वोट नहीं है। इसी तरह वीवीपैट के ड्रॉप बॉक्स को खोलकर दिखाया जाता है कि उसमें भी कोई भी पर्ची नहीं है। ईवीएम, वीवीपैट मशीन की विश्वसनीयता एवं राजनैतिक दलों तथा अभ्यर्थियों के बीच विश्वास सृजन करने की दृष्टि से इस लोकसभा निर्वाचन के दौरान प्रत्येक मतदान केन्द्र के बाहर इन छः चरणों की जानकारी प्रदाय करने के आशय से पोस्टर लगाए जाएंगे।

चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी को खर्च का सही व स्पष्ट लेखा रखना होगा 

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चुनाव लडने वाले उम्मीदवारों को चुनाव खर्च का सही-सही व स्पष्ट लेखा रखना होगा और निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत करना अनिवार्य है। आयोग के निर्देशानुसार उम्मीदवार के निर्वाचन व्यय लेखा का शेडो व्यय लेखा रजिस्टर रिटर्निंग अधिकारी की ओर से तैयार किया जाएगा।  आयोग के निर्देशों में कहा गया है रिटर्निंग अधिकारियों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव लड रहे प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए सभी प्रकार की आवश्यक अनुमतियों की एक नस्ती संधारित करनी होगी अर्थात क्षेत्र में जितने उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे उतनी नस्तियां संधारित करनी होगी। रिटर्निंग अधिकारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि कार्यालय में जब भी किसी अभ्यर्थी का कोई आवेदन किसी भी प्रकार की अनुमति हेतु प्राप्त होता है तो उस आवेदन में प्रत्येक मद में होने वाले खर्च का स्पष्ट विवरण होना चाहिए साथ ही समस्त मदों को मिलाकर कुल कितना खर्च उक्त अनुमति में उल्लेखित कार्य करने में आयेगा उसका उल्लेख भी स्पष्ट रूप से होना चाहिए। यदि किसी आवेदन में खर्च का उल्लेख नहीं है तो वह आवेदन पूर्ण नहीं माना जाना चाहिए।  यह भी उल्लेखनीय है कि आवेदित अनुमति के कार्य पर किया जाने वाला खर्च स्वयं अभ्यर्थी, अभ्यर्थी का कोई समर्थक, पार्टी इत्यादि में से भले ही कोई भी वहन करे लेकिन आवेदन में सभी मदों का पृथक-पृथक खर्च एवं कुल खर्च का उल्लेख होना आवश्यक है। जनसभा में पंडाल, मंच, बैठने की कुर्सियां, कालीन झंडे, माइक, लेबर, परिवहन इत्यादि समस्त आवश्यक मदों के खर्चों का उल्लेख होना चाहिए। सभी मदों का समुचित उल्लेख होने के उपरांत ही कानून व्यवस्था इत्यादि दृष्टिगत उचित पाये जाने पर अनुमति प्रदाय करनी चाहिए। यदि कोई अभ्यर्थी जुलूस इत्यादि निकालने की अनुमति मांगता है तो आवेदन में स्पष्ट रूप से जुलूस में सम्मलित होने वाले प्रत्येक वाहन, पी.ओ.एल. वाहन में उपयोग होने वाले माइक, झंडे, पोस्टर, बैनर एवं अन्य जो भी प्रचार सामग्री संभव हो सकती है उसका विवरण एवं जुलूस के स्पष्ट मार्ग इत्यादि के उल्लेख के साथ प्रत्येक मद के खर्च एवं कुल खर्च बताते हुए पेश आवेदन ही मान्य किया जाना चाहिए। बिना खर्च बताये दिये आवेदनों पर कोई अनुमति जारी नहीं हो सकती। अभ्यर्थी द्वारा प्रचार हेतु वाहनों की अनुमति चाही जाने पर आवेदन में वाहन का प्रति दिन का किराया पी.ओ.एल. वाहन पर लगे ड्रायवर की मजदूरी, वाहन में लगे माइक का किराया, प्रचार सामग्री का विवरण एवं उन समस्त मदों पर आने वाले व्यय की मदवार जानकारी के साथ प्रतिदिन के कुल व्यय का उल्लेख होना चाहिए और यदि वाहन की अनुमति एक से ज्यादा दिन के लिए है तो जितने दिनों के लिए अनुमति है उतने दिनों में उक्त प्रचार वाहन पर होने वाले कुल खर्च का उल्लेख भी आवेदन में अनिवार्य होना चाहिए।

मतदान हेतु रिश्वत देने या लेने पर सजा का प्रावधान 

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदान के लिए रिश्वत देना या लेना, दोनो तथा निर्वाचकों पर किसी भी प्रकार का अनुचित प्रभाव डालना कानूनन अपराध हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 171 बी, सी एवं ई के तहत सम्बंधित को 1 साल का कारावास या अर्थदंड अथवा दोनो से दंडित करने का प्रावधान है। इसी प्रकार मतदाताओं को डराना धमकाना, फर्जी वोट डालना, मतदाताओं को मतदान केंद्र तक अभ्यर्थी अथवा राजनैतिक दल द्वारा लाना ले जाना आदि पूर्णतया वर्जित है एवं निर्वाचन अपराध की श्रेणी में आते हैं। 

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