बिहार : दोस्ताना सफर से जुड़ी किन्नरों द्वारा हो रहा है नोबेल वर्क - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 28 मई 2019

बिहार : दोस्ताना सफर से जुड़ी किन्नरों द्वारा हो रहा है नोबेल वर्क

पद्मश्री सुधा वर्गीस ने महादलित महिलाओं के बीच माहवारी स्वच्छता जोरशोर से चलाने पर दिया बल
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पटना,28 मई। आज विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस है। थर्ड जेंडर को मुख्यधारा में शामिल करने के उद्धेश्य से किन्नरों द्वारा सेनेटरी पैड बनाया जाता है। इन लोगों के द्वारा नोबेल कार्य भी किया जाता है। निर्मित सेनेटरी पैड को लेकर झोपड़पट्टियों में रहने वाले किशोरियों और महिलाओं के बीच में जागरूकता पैदा करते हैं।  आज  गैर सरकारी संस्था दोस्ताना सफर के तत्वावधान में विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के सहयोग से एनजीओ दोस्ताना सफर से जुड़े किन्नर साथियों के द्वारा निर्मित पुनः प्रयोग सेनेटरी पैड का वितरण किया।  इस अवसर पर पद्मश्री सुधा वर्गीज, समाजसेवी मधुमंजरी, अध्यापक सूर्यकांत गुप्ता,समाजसेवी देवप्रिया दत्ता, तेजतर्रार पर्यावरणविद पंकज किशोर, समाजसेवी एवं बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड की तरफ से इंजीनियर ब्रज किशोर जी मौजूद रहे। वहीं  दोस्ताना सफर के किन्नर साथी बिरहा यादव, रानी उमंग, रेशमा प्रसाद तथा चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की इंटर्न भी मौजूद रहीं।  सभी साथियों ने मिलकर सेनेटरी पैड का नि:शुल्क वितरण किया। लोहानीपुर पूर्वी अंबेडकर नगर बस्ती में करीब नौ सौ महिलाओं के बीच में सेनेटरी पैड वितरित किया गया। मौके पर महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के बारे में भी जानकारी दी गई। समाजसेवी मधु मंजरी जी ने कहा कि मेरे साथ यह खुद घटित घटना है कि मैं समझती थी यह बीमारी है लेकिन हमारी मां ने उसे इग्नोर करने के लिए कहा परंतु उसके बाद माहवारी स्वच्छता पर अपने आप को जानकारी कर आगे बढ़ी और दुनिया को भी इस बारे में आगे बता रही हूं। अपने अनुभव को साझा करते हुए पद्मश्री सुधा वर्गीज ने कहा कि माहवारी स्वच्छता की जानकारी रहने से किसी तरह से और कोई भी तरीके अपनाने को स्लम की महिलाएं मजबूर हो जाती हैं। दलित महिलाओं में खासकर मुसहर महिलाओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और वह इसके प्रति अनजान सी बनी रहती हैं। यह विडम्बना है कि समस्याओं को लोगों के बीच साझा भी नहीं करती हैं। जिसके कारण उनको बहुत सारी मुश्किलें शरीर में हो जाती है। उन्होंने कहा शिक्षा आवश्यक है जो महिला शिक्षा नहीं ले पाए वह भी ले और अपने बच्चों को पढ़ाएं जिससे माहवारी स्वच्छता के बारे में उनको जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके।  इस अवसर पर सूर्यकांत गुप्ता ने बताया कि गॉलब्लैडर में कैंसर की जो खतरे हैं वह भारी मात्रा में बढ़ जाती है अगर माहवारी स्वच्छता पर ध्यान नही देंते है तो । रेशमा प्रसाद, समाजसेवी ने बताया कि रियुजेबल सेनेटरी  पैड कितना लाभदायक है महिलाओं के लिए 1 महीने में अगर डेढ़ सौ रुपए खर्च करना पड़ता है तो 1 साल में 1800 के आसपास खर्च बैठता है। अगर  इस पैड का उपयोग करते हैं तो अधिकतम वर्ष में ₹300 खर्च होंगे। अतः यह जिंदगी को बचाने में भी आवश्यक है और आपके पैसे भी बचेंगे। समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् देवप्रिया दत्ता ने पर्यावरण के खतरे बताएं कि जिस तरीके से आज के समय में प्लास्टिक युक्त सेनेटरी पैड का उपयोग हो रहा है या भारी मात्रा में अपशिष्ट का भी कारण बन रहा है एवं जो इसमें प्रयुक्त प्लास्टिक होता है वह हमारे शरीर को भी नुकसान कर रहा है और हमारे पर्यावरण को भी अतः प्लास्टिक मुक्त सेनेटरी पैड का उपयोग करें।

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