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बुधवार, 10 जुलाई 2019

पूर्णिया : मध्य विद्यालय सिमरिया में नहीं है चाहरदिवारी, असामाजिक तत्व पहुंचाते हैं क्षति

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कसबा (आर्यावर्त संवाददाता)  : सरकारी विद्यालयों के स्वरूप में समय के साथ परिवर्तन तो आए पर ये परिवर्तन समयानुरूप गति से नहीं हो रहे हैं। गढ़बनैली स्थित मध्य विद्यालय सिमरिया का अपना ऐतिहासिक महत्व रहा है। पर, 1962 में स्थापित इस विद्यालय में आज तक चाहरदिवारी की सुविधा प्रदान नहीं की गई है। विद्यालय परिसर आवागमन का रास्ता बन गया है। विद्यालय में छुट्टी के बाद असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि शाम ढलने के बाद विद्यालय परिसर में असामाजिक तत्व घुस आते हैं। प्रधानाध्यापक मनीष कुमार राय ने पूछने पर इससे अपनी अनभिज्ञता प्रकट की। उन्होंने कहा मेरे या शिक्षकों के जाने के बाद विद्यालय में क्या होता है ये कैसे बताया जा सकता है जब हमलोग यहां रहते ही नही हैं? पर इतना जरूर है कि विद्यालय परिसर में छुट्टी के बाद भी बच्चे खेलते देखे जा सकते हैं। गाय, बकरियां और कुत्ते देखे जा सकते हैं। हमने कई बार पौधरोपण अभियान चलाया पर वे हर बार जानवरों और कुछ शैतान बच्चों की भेंट चढ़ गए। चाहरदिवारी नहीं होने के कारण पोषण वाटिका तथा विद्यालय के अंदर सौंदर्यीकरण एक सपना ही बनकर रह गया है। कुछ शैतान बच्चों ने नए पाइप फिटिंग वायरिंग से भी छेड़छाड़ की है। चाहरदिवारी न होने के कारण आमतौर पर बच्चे इसका फायदा उठाने की कोशिश करते देखे गए हैं। इससे विद्यालय संचालन की अवधि में पूर्ण रूप से बच्चों का ठहराव नहीं हो पाता है और वे घर भागने का प्रयास करते हैं। शिक्षक भी क्या करें। जब इतने खुले रास्ते हों तो कोई भी कभी भी भाग सकता है। शिक्षक चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। विद्यालय के बच्चों ने भी बताया कि चाहरदिवारी नहीं होने के कारण अब हमलोग पेड़ पौधे नहीं लगाते हैं और न विद्यालय की हरित सज्जा कर पाते हैं। हमलोगों ने तीन प्रयास करके देख लिया पर ये काम सफल नहीं हो पाया। बच्चों से ये भी पता चला कि कुछ बड़े बच्चे जो इस विद्यालय में नहीं पढ़ते है वे ही अक्सर यहां खेलते घूमते रहते हैं। दूसरी बात ये कि विद्यालय में अब ढेर सारी परिसंपत्ति हो गई है। इन सरकारी परिसंपत्तियों की न तो कोई रखवाली करने वाला है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात हैं। कभी भी विद्यालय में चोरी हो सकती है। 57 वर्ष के इस प्रौढ़ विद्यालय को आज तक चाहरदिवारी भी नसीब नहीं हुई। प्रधानाध्यापक ने बताया कि पिछले साल उन्होंने मुखिया ग्राम पंचायत घोड़दौड़ के माध्यम से मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी, कसबा को विद्यालय की चाहरदिवारी का आवेदन दिया था पर आज तक उक्त कार्य के लिए फंड ही नहीं आया। बताया गया कि जो राशि आई वह पिछले कार्य के भुगतान में ही खर्च हो गई। अब सच क्या है ये तो वे ही बता सकते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि एक तरफ हम चंद्रमा पर जाने की बात करते हैं मंगलयान भेजते हैं और दूसरी तरफ इन अभियानों की जड़ों पर ही ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। आजादी के 72 वर्षों के बाद विद्यालय में एक चाहरदिवारी का न होना हमारी योजना और कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न तो लगाता ही है। कसबा विधायक मो आफाक आलम ने बताया कि जहां तक विद्यालय में चाहरदिवारी की समस्या है तो इसके लिए विभाग के पदाधिकारियों से बात की जाएगी।

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