बिहार :टैक्स और राजस्व राशि अन्यत्र चले जाने से जन प्रतिनिधि परेशान - Live Aaryaavart

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रविवार, 7 जुलाई 2019

बिहार :टैक्स और राजस्व राशि अन्यत्र चले जाने से जन प्रतिनिधि परेशान

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पटना,07 जुलाई। पटना नगर निगम का विभाजन  होता है दीघा नहर से। इस नहर से पश्चिम की ओर का क्षेत्र नगर परिषद दानापुर निजामत में पड़ता है। तो स्वभाविक है कि जन प्रतिनिधि भी  नगर परिषद  दानापुर निजामत के ही होंगे। दुर्भाग्य से लोगों का टैक्स आदि पटना नगर निगम में जाता है और राजस्व राशि  पटना सदर के अंचल कार्यालय में जाता है। टैक्स और राजस्व राशि अन्यत्र चले जाने से जन प्रतिनिधि परेशान हैं कि कहां जाकर आवाज व मसला उठाए?  इसका खामियाजा विकास कार्य पर पड़ रहा है। राशि के अभाव में महादलितों का मकान नहीं बन पा रहा है। पटना सदर प्रखंड में  पड़ता है रामजीचक मोहल्ला, बाटागंज व नाच बगीचा मुसहरी । जो दीघा थानान्तर्गत में पड़ता है। पटना सदर प्रखंड और दीघा थाना क्षेत्र के सीमांत पर स्थित है नाच बगीचा। सीमांत पर रहने के कारण नाच बगीचा हाशिए पर है। आजादी के 72 साल के बाद भी आवासीय परिवेश में सुधारकर मकान नहीं बना। यहां के महादलित कई बार प्रयास किये। जो असफल साबित हुआ। 

नगर परिषद दानापुर निजामत अन्तर्गत वार्ड नम्बर-32 में पड़ता है नाच बगीचाः 
दीघा थाना क्षेत्र में है रामजीचक मोहल्ला। इस रामजीचक मोहल्ले में आधे दर्जन से अधिक मुसहरी है जिसमें एक नाच बगीचा मुसहरी भी है। इस नाच बगीचा मुसहरी में कई दशक से मुसहर समुदाय के लोग 50 से अधिक झोपड़ियों में रहते हैं। सभी फटेहाल जिदंगी व्यक्त करने को मजबूर हैं। मजबूरी में ही झोपड़ी बनाकर धूप,वर्षा और ठंड से सामना करते हैं। आजादी के 69 साल के बाद भी विकास का डगर महादलित मुसहर समुदाय तक नहीं पहुंचा है। इन महादलित मुसहर समुदाय ने गण प्रतिनिधियों को वोट देकर नेताओं की तकदीर और तस्वीर बनाये। मगर नेताओं ने महादलित मुसहरों की तकदीर और तस्वीर नहीं बदली और न ही झोपड़ी के बदले में मकान ही बन सका।

दिव्यांग मुखु मांझी का कहना हैः 
दिव्यांग मुखु मांझी का कहना है कि हम लोग झोपड़ी में लेते हैं जन्म। जवान होते हैं झोपड़ी में। ताउम्र जिल्लत की जिदंगी जीने के बाद झोपड़ी में मर जाते हैं। इस तरह की लाचारी हैं झोपड़ी में रहने वालों की। यह सच है कि इंडिया के लोग तरक्की करके गगनचुम्बी इमारत में रहने लगे और भारत के लोग धरती पर ही झोपड़ी में रहने को बाध्य हैं। हर चीजों पर बढ़ती कीमत के कारण महादलित घर नहीं बना पाते हैं। तो इसके आलोक में कल्याणकारी सरकार द्वारा पहल की जाती है कि ऐसा लोगों को चिन्हित करके मकान बना सकें। मकान निर्माण के लिए योजना और राशि भी निर्धारित है। 

न ग्रामीण और न ही नगर बनने से लाभ मिलाः 
ग्रामीण परिवेश वाले क्षेत्र को नगर बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने के समय भी मुसहरी का विकास नहीं हुआ। अब तो नगर में आ जाने से विकास कार्य कोसों दूर चला गया है। सदैव राशि नहीं होने का रोना रोया जाता है। रामजीचक मोहल्ला नाच बगीचा के संदर्भ में नागेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि 2005 में माननीय विधान पार्षद द्वारा अनुशंसित योजना दानापुर मुख्य सड़क से जनक सरदार के मकान से होते हुए मुसहरी तक पी0सी0सी0 पथ का निर्माण कार्य का उद्घाटन राम कृपाल यादव तब के सदस्य विधान परिषद बिहार अब के केन्द्रीय राज्य मंत्री ने किया था। अध्यक्षता डा0 रामानन्द यादव यादव विधायक ने की थी। यह तो लूट का मामला बन गया था।इसके अलावे कोई कार्य नहीं हुआ है। 11 साल गुजर गये। जमीन का मालिका हक 1993-94 में जाकर मिलाः कई पीढ़ी से मुसहर समुदाय के लोग रहते हैं। यहां पर स्व0जुगेश्वर मुसहर रहे। इनके पिताश्री भी रहे। अब दोनों परलोक में चले गये। अब स्व0 जुगेश्वर मुसहर के पुत्र जयराम मुसहर भी झोपड़ी में रहते हैं। जयराम मुसहर कहते हैं कि हमलोग कई पीढ़ी से झोपड़ी में ही रहते हैं। हमलोग मजदूर किस्म के आदमी हैं। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले। केन्द्र और राज्य सरकार बनाते हैं। मगर कोई हमलोगों की झोपड़ी हटाकर मकान नहीं बना देता है। हां, सामाजिक न्याय के मसीहा पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 1993-1994 में जमीन का मालिकाना अधिकार वाले पर्चा दिये थे। यह भी कहे थे कि आवास निर्माण करा देंगे।

अवकाश प्राप्त कर्मी ने मुंह खोलाः 
सभी जनप्रतिनिधि नगर परिषद दानापुर निजामत में बैठक करने जाते हैं। वहीं लोगों की समस्याओं का समाधान करने प्रतिनिधियों का एक पांव पटना में और द्वितीय पांव दानापुर में रहता है। इसके कारण रामजीचक मोहल्ला में पड़ने वाले मुसहरी की हालत दयनीय है। नगर परिषद दानापुर निजामत से अवकाश प्राप्त कर्मी नगीना प्रसाद को यह कहने में संकोच नहीं है कि महादलित मुसहर समुदाय के लोग सरकारी जुल्म सहने को लाचार हैं। कारण स्पष्ट है कि आजादी के 69साल में अनेकों विकास की योजना बनायी गयी। इसमें आवास योजना भी है। शहरी गरीबों का अलग और ग्रामीण गरीबों को आवास निर्माण करके देना है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीबों को काम के बदले अनाज योजना, ग्रामीण बेरोजगार रोजगार गारंटी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण नियोजन योजना, इन्दिरा गांधी आवास योजना आदि। उसी तरह शहरी क्षेत्र में रहने वाले गरीबों को भी मकान निर्माण करने वाली योजना है। बेसिक सर्विसेस फोर पुअर, हुडकों द्वारा आवास निर्माण, राजीव गांधी आवास योजना आदि। अब प्रधानमंत्री आवास योजना विराजमान है। 

सीएम नीतीश कुमार का 7 निश्चय को लागू करेंः 
राजधानी के निकट में है नाच बगीचा। सीएम नीतीश कुमार के चहेते महादलित मुसहर समुदाय के लोग रहते हैं। यहां पर आसानी से सीएम नीतीश कुमार का 7 निश्चय लागू किया जा सकता है। काफी जमीन है। सभी महादलितों के पास परवाना पत्र है। यहां के लोग परवाना पत्र को जन्नत से रखे हैं। फिलवक्त झोपड़ी में रहते हैं। इस झोपड़ी के बदले में राजीव गांधी आवास योजना से मकान बनाया जा सकता है। एक कुआं और 2 चापाकल है। लोग मजदूरी करते हैं। उनको और युवाओं को हुनर का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। ऐसा करने से आदर्श मुसहरी बन सकता है। जो उद्हाण पेश करते रहेगा। नाच बगीचा मुसहरी में रहने वाले महादलित मुसहर समुदाय की सुधि लेकर इनकी समस्याओं को दूर करें तथा सीएम नीतीश कुमार के 7 निश्चय को लागू करें। 

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