मातृभाषा बने शिक्षा का माध्यम : उपराष्ट्रपति - Live Aaryaavart

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शनिवार, 13 जुलाई 2019

मातृभाषा बने शिक्षा का माध्यम : उपराष्ट्रपति

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बेंगलुरु, 13 जुलाई, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को सुझाव दिया कि स्कूलों में, कम से कम प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम मातृभाषा को बनाया जाना चाहिये। नायडू ने कहा, ‘‘हमारी भाषाएं हमें समावेशी और स्थायी विकास के लिए जोड़ने का काम करनी चाहिए, बांटने का नहीं।’’  उन्होंने कहा कि किसी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिये और न ही किसी भाषा का विरोध होना चाहिये। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाषा के संरक्षण और विकास के लिए एक बहु आयामी रुख की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह समय देश में समूची भाषा शिक्षा को लेकर पुनर्विचार और इसमें नयापन लाने का है।  वह मैसुरू में केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें शुरुआत मातृभाषा को अपने स्कूलों में शिक्षा का माध्यम बनाकर करनी होगी, कम से कम प्राथमिक स्तर पर।  उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर नए मसौदे को लेकर भी प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इसमें क्षेत्रीय, मातृ भाषाओं के साथ ही आदिवासी एवं संकेत भाषा में शिक्षा के लिए कई सुझाव दिये गए हैं। नायडू ने कहा कि हमारी भाषाओं के विकास और संरक्षण के लिए कई और कड़े फैसले किए जाने चाहिये।  उन्होंने कहा कि देश में दस हजार या उससे अधिक लोगों के द्वारा 121 भाषाएं बोली जाती हैं।  उन्होंने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि देश की 196 भाषाओं को लुप्तप्राय की श्रेणी में रखा गया है। 

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