पूर्णिया : प्रतिवर्ष 70 लाख राजस्व देने वाले बस स्टैंड के विकास में 70 रुपए भी खर्च नहीं - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

बुधवार, 10 जुलाई 2019

पूर्णिया : प्रतिवर्ष 70 लाख राजस्व देने वाले बस स्टैंड के विकास में 70 रुपए भी खर्च नहीं

- सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं, साफ सफाई की तो बात ही दूर, पेयजल तक की व्यवस्था नहीं - दस एकड़ में फैले इस बस स्टैंड के चारों तरफ पसरी है गंदगी 
purnia-bus-stand
कुमार गौरव । पूर्णिया : हर रोज 300 बसें और करीब 20000 लोगों का जहां अस्थायी ठौर होता है वहां की स्थिति ऐसी है कि लोगों को नाक पर रूमाल रखकर जाना पड़ता है। हर तरफ गंदगी, नाले में बजबजाते कीड़े और सूअरों के झुंड के बीच लोग सफर करने को विवश हैं। वर्ष 1984 में बना जिले के महत्वपूर्ण बस स्टैंड को इन दिनों अपने उद्धारक की तलाश में है। करीब दस एकड़ में बना यह बस स्टैंड अपने 34 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है लेकिन बदहाली का आलम यह है कि यहां बस यात्रियों के लिए बस से नीचे उतरना भी काफी दूभर होता है। बता दें कि इस बस स्टैंड से प्रतिदिन बिहार, झारखंड और बंगाल की करीब 300 बसें गुजरती हैं। इसके अलावा दर्जनों लोकल रूट की बसें अलग हैं। प्रतिदिन करीब 15-20 हजार बस यात्री यहां आते जाते हैं लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा है। हर तरफ गंदगी और बदहाली का साम्राज्य है। यहां से प्रतिवर्ष सरकार करीब 70 लाख रूपए राजस्व वसूलती है लेकिन साफ सफाई और मौजूदा व्यवस्था को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता कि यहां विकास मद में कोई काम हुआ ही नहीं। यहां यह कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि प्रत्येक साल 70 लाख राजस्व देने वाले बस स्टैंड के विकास में 70 रुपए भी खर्च नहीं हुए। बहरहाल, बेहद संक्रामक हो चुके इस बस स्टैंड की ओर अविलंब ध्यान देने की जरूरत है ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके। बस स्टैंड परिसर में घुसते ही गंदगी और कुव्यवस्था से ही बस यात्रियों का सामना होता है। खासकर बरसाती दिनों में तो स्थिति बेहद भयावह हो जाती है। बस यात्रियों को घुटने भर पानी में किसी तरह बचते बचाते बस में सवार होना पड़ता है। बस चालक मजबूरन एनएच 31 किनारे बस की पार्किंग कर यात्रियों को चढ़ाते और उतारते हैं। जिस वजह से यहां अक्सर जाम की नौबत बनी रहती है। रही सही कसर प्रेशर हॉर्न की मुसीबत पूरी कर देती है। बसों में लगे प्रेशर हॉर्न से यहां आसपास के क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी होती है। दिन हो या रात उन्हें प्रेशर हॉर्न की मुसीबत से दो चार होना पड़ता है। डॉक्टर बताते हैं कि इस प्रेशर हॉर्न के कारण लोग बहरे व चिढ़चिढ़ापन के शिकार हो रहे हैं। 

...महिला यात्रियों को होती है खासी परेशानी... 
साफ सफाई के इतर जो सबसे बड़ी समस्या है वो है शौचालय और यूरिनल का अभाव। गंदगी और जीर्ण शीर्ष अवस्था के कारण मौजूदा शौचालय की स्थिति ऐसी है कि वहां संक्रमण के हालात बने रहते हैं। महिलाओं के लिए अलग से शौचालय या फिर यूरिनल की व्यवस्था नहीं रहने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

...बस स्टैंड की बदहाली को मुख्यमंत्री, आयुक्त व जिलाधिकारी का ध्यान कराया आकृष्ट :  
प्रमंडलीय परिवहन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीव कुमार कहते हैं कि यहां सफाई कर्मी नहीं आते हैं जिस वजह से गंदगी का साम्राज्य है। उन्होंने कहा कि बदहाली से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री, आयुक्त समेत कई बार जिलाधिकारी और संबंधित पदाधिकारियों से व्यवस्था सुधारने की गुहार की गई लेकिन नतीजा सिफर रहा है। हरेक बार महज आश्वासन की घुट्‌टी ही पिलाई गई। थक हारकर संघ के सदस्यों ने एकमात्र सफाई कर्मी को संघ के खर्चे पर बहाल किया लेकिन दस एकड़ के परिसर की सफाई एक सफाई कर्मी के जिम्मे संभव नहीं है। बस ऑनर एसोसिएशन पूर्णिया के अध्यक्ष जयहिंद सिंह ने बताया कि पेयजल के लिए मंदिर परिसर में मौजूद एकमात्र चापाकल है। अध्यक्ष कहते हैं नाला निर्माण नहीं होने और पानी का बहाव बाहर नहीं होने के कारण गंदा पानी परिसर में ही रह जाता है। इन तमाम समस्याओं को लेकर संघ के सदस्यों ने कई बार धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल भी किया लेकिन नतीजा सिफर निकला। वहीं मनोज कुमार, नित्यानंद, मुन्ना, संतोष, शंकर, मुंशी जी, संजय, विकास समेत कई अन्य निजी बसों के कर्मी बताते हैं कि सुविधा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। बड़े ही भावुक होकर इन कर्मियों ने बताया कि वे पिछले तीस वर्षों से यहां काम कर रहे हैं। अपने बस स्टैंड से भेजे गए कई बच्चे आज बड़े बड़े पदों पर आसीन हैं लेकिन इस बस स्टैंड की सूरत को किसी ने नहीं सुधारा। 

...जल्द ही जिला परिषद की टीम लेगी बस स्टैंड का जायजा :  
बस स्टैंड की स्थिति मेरे संज्ञान में है। जल्द ही जिला अभियंता, डीडीसी और जिला परिषद की टीम बस स्टैंड का जायजा लेगी। बस स्टैंड की सूरत सुधारने के लिए पहल की जा रही है। गत दिनों जिला परिषद की बैठक में भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी कर कवायद शुरू की जाएगी।  : क्रांति देवी, अध्यक्ष, जिला परिषद पूर्णिया।

कोई टिप्पणी नहीं:

Loading...