दुमका : भारतीय परम्परा, आधुनिक भारत का स्वरूप एवं दिशा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन - Live Aaryaavart

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रविवार, 28 जुलाई 2019

दुमका : भारतीय परम्परा, आधुनिक भारत का स्वरूप एवं दिशा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ व महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में वाराणसी (यूपी) के गांधी अध्ययनपीठ सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ दिन शनिवार को किया गया। ’भारतीय परम्परा का आधुनिक भारत, स्वरूप एवं दिशा विषयक इस दो दिवसीय संगोष्ठी के प्रारम्भ में यूपी के उप मुख्यमंत्री प्रो दिनेश शर्मा ने राष्ट्रपिता के चित्र पर माल्यार्पण  किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अखिल भरतीय शैक्षिक महा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो जे पी सिंघल ने मंच से शैक्षिक महासंघ का परिचय देते हुए उसकी प्राथमिकताएँ बतलायी।  का कि संघ का मूल उद्देश्य राष्ट्र के हित मे शिक्षा का विस्तार करना है इसीलिये हम शिक्षकों की बेहतरी के साथ ही राष्ट्र के पुनर्निर्माण में छात्रों की भूमिका भी तय करवाते हैं। उन्होंने कहा कि अखिल भरतीय शैक्षिक महासंघ द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिये हर वर्ष तीन शिक्षकों को शिक्षा भूषण का सम्मान दिया जाता है’। संगोष्ठी मे मुख्य वक्ता के रूप मे सम्पूर्णानन्द संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व कुलपति राजेन्द्र मिश्र ने कहा कि भारत पूरे विश्व का नेतृत्वकर्ता के रुप में जाना जाता है। लेकिन हम अपने राष्ट्र को नही सम्भल पा रहे जबकि हमारे पूर्वजों में पूरे विश्व को संभालने की क्षमता थी और उन्होंने उसे सम्भाला भी था। हमारे पूर्वजों की संकल्पना थी कि हम पूरे विश्व को आर्य बनाएंगे। आर्य किसी जाति का वाचक नही था। आर्य शब्द श्रेष्ठता का वाचक था। हमारे ऋषियो ने अपने धर्म को सनातन धर्म कहा क्योकि यह लोक कल्याण का निर्देश करने वाला है।  हमारी प्राचीन भाषा देव भाषा के रूप में है आज फिर भारत को विश्व गुरु बनने का समय आ गया है। दो दिवसीय राष्ट्रिय संगोष्ठी  में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मन्त्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा एक समय वो था जब पूरी दुनिया में हिन्दुतान की छवि एक गरीब व पिछड़े हुए देश की थी और विदेशी उसे सपेरों और जादु टोना वाले देश के रूप में प्रचारित भी करते थे लेकिन आज वर्तमान समय का भारत ऐसा नही है आज भारत के युवा अमेरिका जैसे महाशक्ति के समक्ष भी चुनौती पेश कर रहे है।अमेरिका जैसी महाशक्ति आज यह कहने को मजबूर है कि भारतीयों से आप बच के रहना ये हमारे युवाओं का रोजगार छीन सकते है ।बीते कुछ वर्षों में हिंदुस्तान के प्रति पूरे विश्व का नजरिया बदला है मुगलो व अंग्रेजो ने हमारी संस्कृति को तो तहस नहस किया लेकिन वो हमारी संस्कार को नष्ट नही कर पाये जिसका सबसे बड़ा परिणाम हमारे सामने यह है कि जितनी पैसों में भारत मे एक फिल्म बनती है उतने में हमारे वैज्ञानिको ने चन्द्रयान 2 को लांच कर पूरे विश्व को अपनी ताकत का एहसास करा दिया कि भारत अब यह जादू टोना वाला देश नही रह गया है क्योकि हिंदुस्तान ने कभी अपनी संस्कृति को नही छोड़ा।आज हमारे युवाओं के एक हाथ मे वेद की ऋचाए है तो दूसरे हाथ मे कम्प्यूटर है जो बदले हुए भारत की कहानी कह रहा है। नैतिकता के भाव के साथ ही विकास सम्पूर्ण विकास माना जायेगा। मुख्य अतिथी महोदय ने अपने उदबोधन में आधुनिक तकनीक के नकारात्मक पक्षों से सावधान रहने के लिये भी कहा। आज मोबाईल की लत पारिवारिकता और सामाजिकता को प्रभावित कर रहा है। इससे सचेत रहने की आवश्यकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो टी एन सिंह कुलपति काशी विद्यापीठ ने कहा कि भारतीय परम्परा में आधुनिकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हम सब आगे बढ़ना चाहते है तो हमे अपने मूल को समझना होगा और उसे लेकर निरन्तर आगे बढ़ना होगा तभी हम सही मायने में विकसित हो पाएंगे हम लोग को अपने पाठ्यक्रम में परिवर्तन करने होंगे जिससे हम उन्हें उनके मूल ज्ञान के साथ ही  उन्हें उनकी परम्परा व संस्कृति का भी ज्ञान मिले जिससे उनका संपूर्ण विकास हो सके साथ ही कुलपति ने शिक्षा पर बजट की चर्चा करते हुए उसे बढाने की भी बात कही । धन्यवाद ज्ञापन प्रो आर पी सिह ने किया।

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