बिहार : गैंगरेप, ट्रैफकिंग, एसिड अटैक, अपरहण की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ विधानसभा मार्च - Live Aaryaavart

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रविवार, 28 जुलाई 2019

बिहार : गैंगरेप, ट्रैफकिंग, एसिड अटैक, अपरहण की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ विधानसभा मार्च

विधानसभा सत्र के शेष बचे दिनों में महिला उत्पीड़न पर चर्चा कराओ, रोक के लिए ठोस कदम उठाओभाकपा-माले विधायकों ने भी महिलाओं के प्रदर्शन को किया संबोधितरेडियो स्टेशन से निकला मार्च, सैंकड़ों की संख्या में शामिल हुईं महिलाएं
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पटना, । बिहार में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, गैंग रेप, लड़कियों की ट्रैफकिंग, एसिड अटैक, माॅब लिंचिंग, बच्चियों के अपहरण आदि घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि और इन सवालों पर तथाकथित सुशासन की नीतीश सरकार की चुप्पी के खिलाफ आज महिला संगठनों ने संयुक्त रूप से राजधानी पटना में विधानसभा के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया.  आज पटना स्थित रेडियो स्टेशन से विभिन्न महिला संगठनों के नेताओं के नेतृत्व में मंगलवार काे मार्च निकला और फ्रेजर रोड होते हुए डाकबंगला चौराहे की ओर गया.आज के मार्च का नेतृत्व ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, बिहार महिला समाज की निवेदिता झा, ऐडवा की रामपरी, ऐपवा की बिहार राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, राज्य सचिव शशि यादव, स्त्री मुक्ति संगठन विमुक्ता की कंचन, बिहार महिला समाज की सुशीला सहाय, घरेलू महिला कामगार संगठन की सिस्टर लीमा, ऐडवा की सरिता पांडेय व नीलम, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर बख्तियारपुर की सिस्टर लीना, बिहार मुस्लिम महिला मंच की अख्तरी, स्वाभिमान लोक सभा संस्थान की सिस्टर स्मिता, जन जागरण जन शक्ति संगठन की कल्याणी, रेनबो फाउंडेशन इंडिया की विशाखा, ऐपवा की पटना नगर सचिव अनीता सिन्हा, एआईएसएफ की भाग्य श्री, आइसा की प्रियंका, कोरस की समता, हिरावल की प्रीति प्रभा, नटमंडप की मोना, इप्टा की श्वेत प्रीत, चंद्रकांता, आसमा खातून, तबस्सुम अली, सविता अली, सुधा अम्बष्ठ, सुष्मिता, पूनम खातून, शाइस्ता अंजुम आदि शामिल थे. डाकबंगला चौराहे पर महिला संगठनों के निकले मार्च को भाकपा-माले विधायक सत्येदव राम व सुदामा प्रसाद ने भी संबोधित किया. विधायकों ने आज इसी सवाल पर विधानसभा के अंदर भी सरकार का घेराव किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं पर उत्पीड़न की बाढ़ सी आ गई है लेकिन नीतीश जी को फिर भी बिहार में सुशासन की सरकार दिख रही है. यह आज की सबसे बड़ी विडंबना है. डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि विधानसभा के एक महीने का बजट सत्र चला लेकिन महिलाओं के सवाल पर चर्चा करने के लिए सरकार के पास समय नहीं है. जबकि आज पूरे बिहार में महिलाओं के दमन-उत्पीड़न की बाढ़ सी आ गई है. जैसे लगता है कि उनके खिलाफ युद्ध छेड़ दिया गया है. महिला नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि आज समाज में नफरत और हिंसा की मानसिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है. कहीं जानवर चोरी का आरोप लगा कर मॉब लिंचिंग हो रही है तो कभी किसी लड़की को ‘संस्कृति’ के नाम पर छेड़खानी या बलात्कार कर उसका वीडियो बनाया जा रहा है और वायरल किया जा रहा है. 

लड़कियों की ट्रैफिकिंग और लापता होने की घटनाओं पर सरकार संवेदनहीन बनी हुई है. यही कारण है कि विगत डेढ़ महीने में गांधी मैदान क्षेत्र से लापता ग्यारह साल की तन्वी के मामले में कोई कार्यवाई नहीं हुई है. दलित, अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग की महिलाओं पर अत्याचार बढ़ गया है. बेगूसराय के भगवानपुर क्षेत्र में एक महिला के साथ बलात्कार के मामले में नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. समस्तीपुर में एक महादलित महिला के साथ राहत चलते सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर बलात्कारियों ने उसका वीडियो बनाकर वायरल किया. बलात्कारियों का मनोबल आज इस कदर बढ़ चुका है. पटना के बाद सिवान में कार्यरत पुलिसकर्मी स्नेहा मंडल की संदिग्ध मौत ने पुलिस विभाग के अंदर महिला पुलिसकर्मियों के यौन उत्पीड़न को बेनकाब करके रख दिया है लेकिन सरकार इन मामलों में दोषियों पर कार्रवाई की बाजए उलटे उन्हें बचा रही है. स्नेहा के मामले में सरकार का रवैया अपराधियों के बचाव का है. जबकि इस मामले में साफ दिख रहा है कि पुलिस के आला अधिकारी शामिल हैं. शेल्टर होम कांड जिसमें लंबे संघर्ष के बाद सीबीआई जांच शुरू तो हुई लेकिन सीबीआई की सुस्ती और उसकी पूरी कार्यप्रणाली दिखा रही है कि अपराधियों को बचाने का भरपूर प्रयास हो रहा है और दलित छात्रा डीका हत्याकांड में ढाई साल के बाद भी सीआइडी न तो सभी हत्यारों को पकड़ पाई है और न पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ कोई सबूत जुटा पाई है. संस्थागत यौन उत्पीड़न के मामले में हम आज के प्रदर्शन के जरिए मांग करने आए हैं कि संबंधित अधिकारियों को इसके लिए जवाबदेह बनाया जाए. पुुलिस कांस्टेबल स्नेहा मंडल की संदिग्ध मौत मामले में उसके उच्च अधिकारियों पर कार्यवाई की जाय और  स्नेहा के परिजनों की मांग को स्वीकार कर पूरे मामले की सीबीआई जांच हो. ट्रैफिकिंग रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं. लड़कियों को गायब करनेवाले दलाल पुलिस गठजोड़ को खत्म करने के लिए ठोस उपाय करे. हम मांग करने आए हैं कि ग्यारह वर्षीय तन्वी को तत्काल बरामद किया जाए. शेल्टर होम कांड में सीबीआई शीघ्र जांच रिपोर्ट सौंपे और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाय. समस्तीपुर में सामूहिक बलात्कार की शिकार महादलित महिला को न्याय मिले और उसके सभी आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए. अम्बेडकर विद्यालय, हाजीपुर की छात्रा डीका हत्याकांड में सीआईडी जांच शीघ्र पूरी की जाय डीका के परिवार को मुआवजे की राशि का पूरा भुगतान किया जाय. बिहार में हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाया जाय और धार्मिक आयोजनों के नाम पर आर एस एस द्वारा तलवार बांटने, लाठी बांटने या षाखा में बंदूक चलाने का प्रशिक्षण देने को सख्ती से रोका जाय.

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