बिहार : बेतिया पल्ली की 275 वीं वर्षगांठ - Live Aaryaavart

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सोमवार, 9 सितंबर 2019

बिहार : बेतिया पल्ली की 275 वीं वर्षगांठ

बेतिया पल्ली की रीता बेनेडिक्ट की भतीजी के पुत्र आशीष व एंजेल, एलेन आलबर्ट आदि ने राजाओं के राजा प्रभु येसु को रोटी व रक्त के रूप में भक्ति के साथ ग्रहण किए। बेस्ट गायक मंडली में प्रिंस राज चार्ल्स ने मधुर गीत पेश किए ' दिल का दरवाजा खुला हुआ हमारे दिल में आओं प्रभु..'.
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बेतिया। आज बेतिया पल्ली की 275 वीं वर्षगांठ शुरू। यह पल्ली 8 सितम्बर, 2019 से 31दिसम्बर, 2020 तक महत्वपूर्ण रहेगा । बता दें कि ईसाई समुदाय का उद्गम स्थल बेतिया पल्ली है। जुबली वर्ष के अवसर पर 18 बच्चों में 6 लड़कियां और 12 लड़कों को प्रथम परमप्रसाद ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बेतिया पल्ली की रीता बेनेडिक्ट की भतीजी के पुत्र आशीष व एंजेल, एलेन आलबर्ट आदि ने राजाओं के राजा प्रभु येसु को रोटी व रक्त के रूप में भक्ति के साथ ग्रहण किए। बेस्ट गायक मंडली में प्रिंस राज चार्ल्स ने मधुर गीत पेश किए ' दिल का दरवाजा खुला हुआ हमारे दिल में आओं प्रभु..'. इसके पूर्व बेतिया पल्ली के प्रधान पल्ली पुरोहित फादर सुशील साह व राजा ध्रुव सिंह पूर्व शासक के मैंनेजर ने मिलकर जुबली वर्ष का गुब्बारा आकाश में छोड़े। बताते चले कि बेतिया में छोटे पैमाने पर ईसाई समुदाय के द्वारा कार्य किया जा रहा था। इससे राजा ध्रुव सिंह काफी प्रभावित हुए। उन्होंने मानव सेवा करने वाले फादर जोसेफ मेरी से कहा कि जमकर कार्य करे इसमें मेरा पूर्ण योगदान रहेगा। फादर ने राजा ध्रुव सिंह को सुझाव दिया कि अगर व्यापक तौर पर कार्य करना है तो अधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर लें। राजा पर जुनून सवार था तो उन्होंने ईसाई कलीसिया से बेतिया में मानव सेवा करने की अनुमति मांगी । राजा के अनुरोध को स्वीकार कर रोम में बैठे पोप बेनेडिक्ट ने अनुमति प्रदान कर दी। तत्पश्चात पोप बेनेडिक्ट ने फादर जोसेफ मेरी, ओएफएम कैप को जिम्मेवारी सौंपा। फादर जोसेफ मेरी ने बेतिया को केन्द्र में रखकर सन् 1745 में बेतिया मिशन की बुनियाद डाली। इस तरह फादर जोसेफ मेरी को बेतिया मिशन के संस्थापक बनने का गौरव प्राप्त हुआ। वर्ष 2012 में बेतिया की 15,891,000 में ईसाइयों की संख्या 5810 है। बेतिया का शानदार इतिहास है 275 साल। यहां के लोग संसारभर में फैले हैं। खुद को पुराना ईसाई समझते हैं। पिछड़ी जाति के ईसाई हैं। बच्चों का नामकरण अंग्रेजों के अनुसार ही है। जो किसी न किसी संत का नाम है। अब तो हिन्दी वाले नामकरण रखते हैं। सरकार से काफी संवाद और संघर्ष करने के बाद पिछड़ी जाति का प्रमाण-पत्र निर्गत होता है।  आज के पावन अवसर पर बेतिया पल्ली के प्रधान पल्ली पुरोहित फादर सुशील साह, फादर चेम्बरलेन, फादर रॉबर्ट तिंग्गा,फादर पौल, फादर हेनरी फर्नाडो समेत 19 पुरोहितों ने मिस्सा पूजा अर्पित किए। मौके पर गौरखपुर, आसनसोल, पटना, चखनी, चुहड़ी, रामपुर, मोतिहारी आदि जगहों के लोग आकर जश्न को जोरदार बना दिए। एक कसक रहा कि बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेवास्टियन गोबिएस मौजूद नहीं थे। सम्प्रति धर्माध्यक्ष पीटर सेवास्टियन गोबिएस रोम में हैं। बावजूद इसके पल्ली पुरोहित फादर सुशील साह ने शानदार ढंग से आयोजन करने में सफल हो गए। 

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