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रविवार, 22 दिसंबर 2019

दिल्ली में प्रदर्शन जारी, चौकस पुलिस

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नयी दिल्ली, 22 दिसंबर, राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक रैली को संबोधित करने के बीच संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में यहां शहर में कई प्रदर्शन हुए। हालांकि पुलिस कड़ी चौकसी बरत रही है और संवेदनशील इलाकों में उसने फ्लैग मार्च भी किया। दक्षिणी दिल्ली में रविवार को विवादित कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना करने वाले जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के समर्थन में काफी संख्या में लोगों ने ‘एकजुटता मार्च’ निकाला। अलकनंदा इलाके में निकाले गए मार्च के दौरान हाथों में पोस्टर लिए लोगों ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा लगाया और विवादित कानून को निरस्त करने की मांग की। जामिया के छात्रों के एक समूह ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री मोदी की रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उसके आसपास के इलाकों जंतर मंतर, जामिया मिल्लिया, निजामुद्दीन और कनॉट प्लेस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए। शहर में पिछले कुछ दिनों से सीएए के विरोध में कई हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए एम्स के डॉक्टरों के एक समूह ने पुलिसकर्मियों के साथ हुई झड़प में घायल हुए लोगों को तत्काल चिकित्सकीय मदद देने का फैसला किया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मनोचिकित्सक डॉ. अजय वर्मा ने कहा, ‘‘हिंसक प्रदर्शन में घायल हुए प्रदर्शनकारियों को चिकित्सकीय मदद उपलब्ध कराने के लिए हमलोग डॉक्टरों के साथ दो एंबुलेंस भेजेंगे।’’  एलजीबीटी समुदाय के सदस्य भी सड़कों पर उतरे और जंतर मंतर पर सीएए एवं एनआरसी के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए यह चिंता जताई कि देशभर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के लागू होने से उनमें से अधिकतर लोग ‘‘बाहर’’ हो जाएंगे। असम के लखीमपुर जिले से आने वाली ऋतुपर्णा बोरा ने कहा कि क्वीर समुदाय के लोगों के लिए दस्तावेज जुटाना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे माता पिता अगर मुझे घर से बाहर फेंक देते तो क्या होता। हिंसा के कारण लोग भागते हैं, अपने-अपने घरों को छोड़ते हैं। ऐसे हालात में उन सब के पास सिर्फ आधार कार्ड होता है।’’  नये कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन को झेल चुके सीलमपुर और आस पास के इलाकों में दिल्ली पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बल के जवानों ने एक बार फिर फ्लैग मार्च निकाला। इलाके में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस के अलावा एहतियातन रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया है। पुलिस ने भी लोगों से बात की और अपने-अपने इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के प्रदर्शन का आज आठवां दिन है। माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने उनका (छात्रों का) साथ दिया। उन्होंने नये कानून को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की और इसे ‘‘संविधान के खिलाफ’’ बताया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पास जमा हुए लोगों को संबोधित करते हुए येचुरी ने कहा, ‘‘हर धर्म का एक पवित्र ग्रंथ होता है। समूचे देश का एकमात्र पवित्र ग्रंथ हमारा संविधान है। हमलोग अपने संविधान और अधिकारों की सुरक्षा के लिए लड़ाई लड़ेंगे।’’ उन्होंने जोर दिया कि विवादित कानून के खिलाफ प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए। जंतर-मंतर पर पूर्वोत्तर के लोग भी जमा हुए और कहा कि सीएए के विरोध में प्रदर्शन को ‘‘हिंदू्-मुस्लिम का रंग’’ दिया जा रहा है और मूल निवासियों के अधिकारों के लिए क्षेत्र की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों में शामिल छात्र एवं नागरिक समाज के लोगों ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोधी लोगों पर पुलिस की ‘‘बर्बरता’’ से बेहद निराश और चिंतित हैं लेकिन हमारा प्रदर्शन ‘‘अपने अधिकारों’’ को लेकर है। इस मौके पर मौजूद त्रिपुरा के राजपरिवार के वंशज प्रद्योत देब बर्मन ने कहा, ‘‘हम दूसरों को अपना एजेंडा हाइजैक नहीं करने देंगे। हम यहां अपने लोगों के बारे में बोलने के लिए आए हैं।’’  संशोधित नागरिकता कानून और पूरे देश में प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस (सीपी) स्थित सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन के लिए जुटे लोगों में छात्र, चिकित्सक और कलाकार भी शामिल थे। कई प्रदर्शनकारियों ने हाथ में तिरंगा थाम रखा था और अपने-अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर ध्यान खींचने वाले नारे लिखे थे। इन नारों में ‘माई नेम इज खान एवं आई एम एन इंडियन’ (मेरा नाम खान है और मैं एक भारतीय हूं), ‘इट इज सो बैड दैट इवेन इंजीनियर्स आर हियर’ (यह इतनी खराब बात है कि इंजीनियर भी यहां पर हैं), ‘मेक इंडिया डेमोक्रेटिक अगेन’ (भारत को फिर से लोकतांत्रित बनायें), ‘डिजिटल इंडिया विदाउट इंटरनेट’ (बगैर इंटरनेट डिजिटल इंडिया) और ‘डर के आगे पीस है’ शामिल थे। प्रदर्शन स्थल पर एम्स के कई चिकित्सक भी जुटे थे जिन्होंने अपने गले में स्टेथोस्कोप लटकाया हुआ था। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने देशभक्ति के गाने गाये और कविताएं पढ़ीं। प्रदर्शन का आयोजन हाल में गठित समूह ‘डेल्हाइट्स फॉर कॉन्स्टीट्यूशन’ ने किया था। शनिवार को भी कई जगहों पर लोगों ने संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय राजधानी में पिछले कुछ दिनों से हिंसक प्रदर्शन हुए हैं।

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