सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 19 दिसंबर - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 19 दिसंबर 2019

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 19 दिसंबर

सामान्य सभा बैठक  

दिनांक 20 दिसंबर 2019 को प्रस्तावित जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक अपरिहार्य करणों से स्थगित की गई है। आगामी तिथि का निर्धारण होने पर सर्व संबंधितों को शीघ्र सूचित किया जावेगा।

कलेक्टर-एसपी की निगरानी में विस्फोट करके ढहाया अंतिक्रमण सुरक्षा की दृष्टि से 200 मीटर क्षेत्र को किया गया था मानव रहित

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शासन के निर्देशानुसार शासकीय भूमि पर कब्जा कर अवैध रूप से बनाए गए भवनों को हटाने की कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा भोपाल नाका क्षेत्र में अतिक्रमण कर बनाए जा रहे भवन को पुलिस एवं प्रशासनिक अमले द्वारा दो दिनों की मशक्कत के बाद गुरुवार दोपहर को तोड़ दिया गया। भवन तोड़ने के लिए इंदौर से विस्फोट द्वारा भवन गिराने में विशेषज्ञ लोगों का दल बुलाया गया था। दल द्वारा डायनामाइट का उपयोग करके भवन को गिराया गया। पुलिस द्वारा भवन के चारों और लगभग 200 मीटर क्षेत्र को खाली कराया गया था। साथ ही ध्वनी विस्तारक यंत्रों से आवश्यक निर्देश दिए गए थे। इस मौक पर इस मौके पर कलेक्टर श्री अजय गुप्ता, पुलिस अधीक्षक श्री शशीन्द्र चौहान, अपर कलेक्टर श्री विनोद कुमार चतुर्वेदी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शशीन्द्र चौहान, अनुविभागीय अधिकारी सहित के साथ ही पुलिस-प्रशासन एवं नगरपालिका अमले के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।

24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस का आयोजन

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मध्यप्रदेश के द्वारा 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस का आयोजन किया जायेगा । आयोजन स्थल पर उपभोक्ता संरक्षण गतिविधियों से जुड़े विभाग प्रमुखतः खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नापतौल, शिक्षा, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, ऑयल कम्पनी, विद्युत कम्पनी, दूरसंचार, वाणिज्यिक तथा समस्त बैंक के संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी अपने-अपने विभाग में संबंधित प्रदर्शनी लगायेंगे ।

बिना अनुमति के धरना, प्रदर्शन, रैली, जुलूस होंगे प्रतिबंधित कलेक्टर ने धारा 144 के अंतर्गत जारी किये प्रतिबंधात्मक आदेश   

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री अजय गुप्ता द्वारा जिले में वर्तमान परिपेक्ष्य में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। जारी आदेशानुसार जिले में कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह प्रतिबंधित अवधि में किसी भी प्रकार के धरना, रैली, प्रदर्शन जुलूस आदि पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगे तथा किसी भी स्तर पर इनके आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस अवधि में किसी भी तीज त्यौहार को मनाने के लिए संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, व्हाटसएप, ट्विटर, एसएमएस, इंस्टाग्राम आदि का दुरुपयोग कर धार्मिक, सामाजिक जातिगत भावनाओं एवं विद्वेष को भड़काने के लिए नहीं करेगा। किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक एवं उननमाद फैलाने वाले संदेश जिसमें फोटो, आडियो-वीडियो आदि सम्मिलित जिससे कि धार्मिक सामाजिक जातिगत आदि भावनाएं भड़क सकती हैं एवं सांप्रादायिक सौहाद्र बिगड़ सकता हो प्रसारित नहीं करेगा या भेजेगा। कोई भी व्यक्ति या समूह अफवाह या तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर भड़काने या उन्माद पैदा करने वाले संदेश जिससे लोगों या समुदाय या विशेष हिंसा की भावना उत्पन्न हो जाए को प्रचारित या प्रसारित नहीं करेगा और नहीं लाईक/शेयर/फारवर्ड करेगा न ही उसके लिए प्रेरित करेगा। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दण्डनीय कार्यवाही की जायेगी। यह आदेश 31 दिसंबर 2019 तक प्रभावशील रहेगा।

नशामुक्त ग्राम पंचायत पुरस्कार के लिए प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि आज

प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक जिले की एक ग्राम पंचायत को पुरस्कृत किय्या जाएगा। यह पुरस्कार ग्राम पंचायत मे निवासरत युवा, वृद्ध तथा महिलाएं नशा मुक्त जीवन यापन कर रहे हैं, को नशामुक्त ग्राम पंचायत पुरस्कार देने की योजना प्रारंभ की गई है। ऐसी नशामुक्त ग्राम पंचायत को एक लाख रूपए का पुरस्कार दिया जाएगा। सभी जनपद सीईओ को नशामुक्त ग्राम पंचायत पुरस्कार के लिए प्रस्ताव भेजने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं । जिले की कोई एक ग्राम पंचायत ऐसा कार्य करने में सफल रही है तो ऐसी ग्राम पंचायत का चयन किया जाकर एक लाख रूपए की पुरस्कार राशि ग्राम पंचायत को प्रदान की जाएगी। साथ ही गणतंत्र दिवस के जिला स्तरीय कार्यक्रम में संबंधित पंचायत के सरपंच को प्रशंसा पत्र प्रदान किया जाएगा। सभी जनपद पंचायतों के सीईओ को नशामुक्त ग्राम पंचायत पुरस्कार के लिए 20 दिसम्बर 2019 तक प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि के पश्चात पुरस्कार हेतु प्रस्ताव मान्य नहीं किए जाएंगे।

सहकारिता विभाग ने तैयार किया ‘‘एग्री व्यापार’’ एप

प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य दिलवाने के लिए "एग्री व्यापार" एप तैयार किया गया है। इसके माध्यम से किसान अपनी उपज व्यापारी को सीधे ऑनलाइन बेच सकेंगे। सहकारिता विभाग किसानों को सस्ती दरों पर उच्च गुणवत्ता की खाद-बीज उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें फसल का अधिकतम मूल्य दिलवाने के लिये कृतसंकल्पित है। इसके लिए "एग्री व्यापार" एप के माध्यम से एक डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस डिजीटल प्लेटफार्म  पर किसानों के साथ ही देश-विदेश के व्यापारी एवं उपभोक्ता भी जुड़ रहे हैं। इस एप पर किसानों की उपज के व्यापक प्रदर्शन के साथ ही ग्राहक की पसंद एवं कस्टमर फीड बैक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। ‘एग्री व्यापार’ एप के उपयोग का तरीका- गूगल प्ले स्टोर से इस एप को मोबाइल पर आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके बाद एप पर पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के बाद किसान को अपनी फसल की मात्रा एवं विवरण का इसमें उल्लेख करना होगा। इसी प्रकार व्यापारी/क्रेता को अपनी आवश्यकता इस एप पर दर्ज करनी होगी। इसके बाद किसान क्रेता के साथ अपनी फसल के मूल्य का सीधे सौदा कर सकेंगे। किसान अपनी फसल की ऑनलाइन बोली भी लगा सकेंगे। इसमें बिचौलियों के लिये कोई स्थान नहीं है। किसान सीधे क्रेता से व्यापार करेंगे। सहकारी विपणन समितियां इस कार्य में किसानों की मदद करेंगी।

जय किसान फसल ऋण माफी योजना अन्तर्गत होगा शिविरों को आयोजन

उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने जानकारी देते हुए बताया कि जय किसान फसल ऋण माफी योजनान्तर्गत जिन किसानों द्वारा गुलाबी फार्म भरे गये थे उनके निराकरण के लिए बैंक शाखा स्तर एवं जिला सहकारी बैंक की समिति स्तर पर शिविरों का आयोजन 23, 24, 26, 27, एवं 30 दिसम्बर 2019 में किया जा रहा है, जिसमें खाताधारकों को अपने अभिलेख से संबंधित दस्तावेज के साथ संबंधित बैंक शाखा/समिति में उपस्थित होकर निराकरण कराना है। जिन किसानों के प्रकरण का निराकरण बैंक शाखा/समिति स्तर पर नहीं होने पर 06, 07, 08 जनवरी 2020 को जनपद स्तर पर आयोजित शिविरों में उपस्थित होकर प्रकरण का निराकरण करावें।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना अन्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन की तिथि निर्धारित

समाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के उपसंचालक ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री विवाह/निकाह योजना अन्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन कार्यक्रमों का केलैंडर वर्ष 2020 शासन द्वारा जारी किया गया है। केलेंडर अनुसार वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना अन्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन की तिथि निर्धारित कर शासन के नियमानुसार सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का वर्ष 2020 का कैलेण्डर

मुख्यमंत्री योजना अन्तर्गत वर्ष 2020 में सामूहिक विवाह को आयोजन 30 जनवरी बसंत पंचमी, 1 फरवरी नर्मदा सप्तमी, 26 अप्रैल अक्षय तृतीया, 7 मई वैशाखी पूर्णिमा, 1 जून गंगा दशहरा एवं 29 जून भड़ली नवमी, 25 नवंबर तुलसी विवाह-देवउठनी ग्यारस एवं 11 दिसंबर उत्पन्न एकादशी व 19 दिसंबर विवाह पंचमी को किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कन्या निकाह योजना का वर्ष 2020 का कैलेण्डर

मुख्यमंत्री निकाह योजना अन्तर्गत वर्ष 2020 सामूहिक निकाहों का आयोजन 5 जनवरी, 9 फरवरी, 11 अप्रैल, 30 मई, 29 जून, 14 जुलाई, 12 अक्टूबर, 9 नवंबर एवं 21 दिसंबर को किया जाएगा।

"प्रेमार्थ" (विशेष लेख)

प्रेम प्रकृति की अनमोल भेंट है। माना जाता है कि प्रकृति और मानव जीवन का आरम्भ और अंत दोनों ही प्रेम हैं। वास्तव में वर्तमान समय में प्रेम को परिभाषित करना कुछ हद तक विवादित है। इसका एकमात्र कारण है सामाजिक मानसिकता। प्रेम अनेक अर्थों में अपने उदाहरण प्रस्तुत करता है जैसे प्रकृति से प्रेम, जीव जंतु से प्रेम, प्रभु से प्रेम, परिवार से प्रेम, कार्य से प्रेम या किसी व्यक्ति से प्रेम।

चलते चलते देखे मैंने दुनिया के सब रंग,
प्रेम रंग ही मीठा लागे प्रेम लगे सत्संग।।

प्राचीन समय में प्रेम के प्रत्यक्ष और वास्तविक परिचय हेतु द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लेकर समस्त संसार को बताया कि प्रेम किसी व्यक्ति मात्र को प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, अपितु प्रेम का वास्तविक अर्थ है कि प्रेम अपनी यथार्थता को प्राप्त करे और एक दूसरे में विलीन होकर सदा के लिए आत्माओं का मिलन सुनिश्चित हो जाए। आधुनिक युग में प्रेमी और प्रेमिका के सौंदर्य को बिसराकर समाज ने बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड की कुसंगति की ओर रुझान कर लिया है, जहां प्रेम अर्थहीन और अकारण प्रेम का आडंबर अधिक है। इसी प्रकार की कुसंगति के कारण आज समाज अनेक शर्मनाक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहा है। इस शारीरिक प्रेम की प्राप्ति के लिए मनुष्य अपनी मानवता को शर्मसार करने में आज कोई कसर नहीं छोड़ता। आज आवश्यकता है कि प्रेम को यथार्थ रूप से समझें और वास्तविक प्रेम करें।

देह प्रेम की आस गलत, मिथ्या है सौंदर्य प्रेम।

रंग रूप की शोभा झूठी, हृदय करे बस आत्मप्रेम।। : उमेश पंसारी (छात्र पी.जी. कॉलेज सीहोर)

जनसम्पर्क संचालनालय की विशेष फीचर श्रंखला ग्रामीण अंचलों में हर घर नल से जल योजना का प्रभावी क्रियान्वयन

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 98 फीसदी पेयजल व्यवस्था भू-जल स्त्रोतों पर आधारित है। विगत कई वर्ष से भू-जल स्तर में हो रही निरंतर गिरावट को देखते हुए राज्य सरकार ने ग्रामीण पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए पिछले एक साल में सतही जल स्त्रोतों पर आधारित समूह जल प्रदाय योजनाओं को प्राथमिकता दी है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में श्हर घर नल से जल  योजना लागू कर दी गई है। अब ग्रामीण माता-बहनों को पानी के लिये नदी, तालाब, कुआँ, बावड़ी के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। नई पेयजल नीति में छोटे और दूर-दराज के गाँवों को प्राथमिकता दी गयी है। इन गाँवों में नल-जल योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए नीति को सरल बनाया गया है। जिन बसाहटों में गर्मी के मौसम में 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मान से पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता है, उनमें नये हैण्डपम्प लगाए जायेंगे। पहले किसी भी बसाहट के 500 मीटर के दायरे में न्यूनतम एक शासकीय पेयजल स्त्रोत उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जगह नई पेयजल नीति में न्यूनतम 300 मीटर के दायरे में कम से कम एक शासकीय पेयजल स्त्रोत उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। हैण्डपम्प स्थापना में ग्रामों के चयन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बहुल ग्रामों को प्राथमिकता दी जा रही है। अब गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या से त्रस्त रहने वाले बड़े गाँवों के साथ छोटे गाँव भी नल-जल योजना के क्रियान्वयन से लाभान्वित हो सकेंगे।

मध्यप्रदेश राइट टू वाटर एक्ट बनाने वाला पहला प्रदेश- राज्य सरकार ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में राइट-टू-वाटर  एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। विधानसभा के आगामी बजट सत्र में यह एक्ट पारित करवाकर लागू कर दिया जाएगा। इस एक्ट के लागू होने पर मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहाँ लोगों को पानी का कानूनी अधिकार मिलेगा। इस कानून को लागू करने के लिये बजट में एक हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। यह एक्ट सरकारी कानून न होकर जनता का कानून होगा। इसमें जन भागीदारी सुनिश्चित करते हुए जल- संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों को बड़े अभियान के रूप में क्रियान्वित किया जायेगा। इस कानून से प्रदेश के सभी जल-स्त्रोतों, नदियों, तालाबों और परम्परागत जल-स्त्रोतों कुएँ-बावड़ी आदि को संरक्षित कर स्थायित्व दिया जायेगा। राज्य सरकार ने प्रत्येक परिवार को आवश्यकता के अनुरूप जल उपलब्ध करवाने से निश्चय का ही परिणाम पानी का कानूनी अधिकार है।

हर घर पहुँचेगा नल से जल-    ग्रामीण अंचलों में हर घर तक नल से जल पहुँचाने के लिये 68 हजार करोड़ रूपये की विस्तृत कार्य- योजना बनाई गई है। अभी तक 19 समूह जल योजनाएँ पूर्ण कर 802 गाँवों की लगभग साढ़े 11 लाख से अधिक जनसंख्या को घरेलू नल कनेक्शन द्वारा जल-प्रदाय शुरू कर दिया गया है। रूपये 6672 करोड़ की लागत की 39 योजनाओं का कार्य प्रगति पर है, जो अगले दो साल में पूरा हो जाएगा। इससे 6091 गाँवों की लगभग 64 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। प्रदेश के 14 हजार 510 गाँव की एक करोड़ आबादी को पेयजल सुलभ कराने के लिये 22 हजार 484 करोड़ रूपये की 45 समूह जल-प्रदाय योजनाओं की डीपीआर तैयार कर ली गई है।

ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने हुए स्थायी कार्य-   पिछले एक साल में ग्रामीण अंचल में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के सघन प्रयास किए गए हैं। इतने कम समय में ग्रामीण अंचल में 6 हजार से ज्यादा हैण्डपम्प स्थापित किये गए, 600 से अधिक नवीन नल-जल योजनाओं के कार्य पूरे कर पेयजल प्रदाय प्रारंभ कराया गया और 6700 से अधिक सिंगल फेस मोटर पम्प स्थापित किये गये हैं। पूर्ववर्ती सरकार के समय की लगभग तीन हजार नल-जल योजनाओं को भी पुनरू चालू करवाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े 3 लाख 12 हजार हैण्डपम्पों को सुधार कर चालू करवाया गया। साथ ही, साढ़े तीन लाख मीटर राइजर पाइप बढ़ाकर अथवा आवश्यकतानुसार बदलकर 65 हजार हैण्डपम्पों को चालू स्थिति में लाया गया है।

बेहतर प्लानिंग के लिये आईआईटी से अनुबंध-  पेयजल प्रदाय योजनाओं की बेहतर प्लानिंग के लिये आईआईटी दिल्ली से अनुबंध किया गया है। पेयजल उपलब्धता लिये न्यू डेवलपमेंट बैंक से 4500 करोड़ की योजनाओं की वित्तीय सहायता प्राप्त हो गई है। जायका से नीमच तथा मंदसौर जिले के सभी गॉंव और रतलाम जिले के आलोट विकासखण्ड के 1735 गाँवों में समूह पेयजल योजना के लिये वित्तीय सहायता प्राप्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

वचन-पत्र- कारगर पहल-   अपने वचन-पत्र में किये गये वायदों के अनुरूप ग्रामीण, आदिवासी अंचलों में शुद्ध पेयजल के नियमित प्रदाय तथा उनके रख-रखाव की स्थाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिकायत निवारण की भी सक्रिय व्यवस्था लागू की जा रही है। जल निगम का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। लगभग 27 हजार करोड़ रूपये लागत की समूह जल प्रदाय परियोजनाएँ प्रक्रियाधीन हैं। इनके क्रियान्वयन के लिए जाइका, एडीबी, एनडीबी सिक्योरिटाइज्ड माइनिंग फंड और पीपीसी से वित्तीय व्यवस्था की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। नई जल योजनाओं के निर्माण की गुणवत्ता एवं उन्हें समय-सीमा के भीतर पूर्ण कराने के लिए शीर्ष स्तर पर नियमित मानिटरिंग की जा रही है। नर्मदा एवं अन्य बारहमासी नदियों के 50 कि.मी. के दायरे की बसाहटों के लिए जल निगम और विभाग द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में साध्यता के आधार पर पेयजल योजनाएँ तैयार की जा रही हैं। विभाग में ठेकेदारी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा रहा है।

जल-गुणवत्ता में मिली पहली रैंक- भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रयोगशालाओं में जल-गुणवत्ता की जाँच के लिए निर्धारित 14 मानदण्डों में मध्यप्रदेश को प्रथम रैंकिंग मिली है। प्रदेश को आईएस 10500-2012 के तहत पहला स्थान दिया गया है।  प्रदेश की मुरैना, गुना, ग्वालियर, भिण्ड, शाजापुर, मंदसौर, पन्ना, मण्डला और सागर जिले सहित मुख्यालय की प्रयोगशालाओं ने प्रथम दस में स्थान हासिल किया है।

संविदा कर्मचारियों के हितार्थ लिए गए निर्णय-  प्रदेश में जल सहायता संगठन के अंतर्गत वर्ष 2013 से कार्यरत 500 से ज्यादा संविदा कर्मचारियों और उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित कराने के उददेश्य से राष्ट्रीय पेंशन योजना (एन.पी.एस) में खाते खुलवाए जा रहे हैं। इसमें 10 प्रतिशत अंशदान संविदा कर्मचारी देंगे और 10 प्रतिशत विभाग द्वारा दिया जाएगा। नवाचार- मैप आई.टी के माध्यम से विभागीय कार्यों के अनुबंधों के अनुश्रवण के लिए ऑनलाईन साफ्टवेयर बनाने की प्रक्रिया प्रचलन में है। स्थापित नल-जल योजनाओं के संचालन के अनुश्रवण और संबंधित ग्राम पंचायतों की संचालन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पोर्टल तैयार कराया जा रहा है। नल-जल योजनाओं में विद्युत खपत की रियल टाइम मानिटरिंग के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। जल निगम में ई-टेण्डरिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाते हुए सुदृढ किया गया है। प्रदेश की एक लाख 28 हजार 231 ग्रामीण बसाहटों में निरंतर पेयजल सुनिश्चित करने के सार्थक प्रयासों के परिणाम मिलने लगे हैं।

नेहरु युवा केन्द्र द्वारा किया गया कृषि व्यवसाय पर जागरुकता, कार्यक्रमों का आयोजन

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नेहरू युवा केन्द्र सीहोर द्वारा विषय आधारित जागरूकता एवं शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र सीहोर में 80 युवा प्रतिभागियों के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य था कृषि व्यवसाय पर युवा प्रतिभागियों को जागरूक करना एवं उनका उचित मार्गदर्शन करना। कायर्क्रम की शुरुआत सरस्वती मां की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्वलित कर की गई। उसके उपरांत नेहरू युवा केन्द्र सीहोर की जिला समन्वयक सुश्री निक्की राठौर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उनका स्वागत किया एवं कार्यक्रम के उद्देश्यो के बारे में अवगत करवाया। फिर नेहरू युवा केंद्र कांकेर छत्तीससगढ़ के सेवानिवृत जिला युवा समन्वयक श्री कुशल राय ने नेहरू युवा केन्द्र के इतिहास, मूल उद्देश्य एवं परिचय प्रतिभागियों को दिया। कार्यक्रम में के.वी.के. सेवनिया इछावर के चार वैज्ञानिकों ने कृषि व्यवसायी केंद्रित भिन्न विषयों पर भाषण दिए जैसे कि श्री जे.के.कनौजिया ने कृषि आधारित उद्यम, श्री संदीप तोड़वाल ने वेर्मिकम्पोस्टिंग, श्री दीपक कुशवाहा ने मधुमखी पालन एक व्यवसाय एवं श्री देवेंद्र पाटिल ने बीज उत्पादन पर लेक्चर दिया। कार्यक्रम के अंत में समस्त प्रतिभागियों को के.वी.के का भ्रमण करवाया गया और उन्हें वहां की उपज एवं भिन्न कृषि व्यवसाय के मॉडल दिखाए गये। आभार प्रकट करने हेतु सुश्री निक्की राठौर द्वारा के.वी.के के वरिष्ठ वैज्ञानिक को संविधान की उद्देशिका भेट दी गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओ के बीच कृषि व्यवसाय को लेकर रुझान पैदा करने की नेहरू युवा केन्द्र द्वारा एक कोशिश की गई । इस कार्यक्रम में आयोजक स्वामी विवेकानंद युवा मंडल ग्राम खैरी तहसील इच्छावर अध्यक्ष श्री रामबाबू वर्मा, मंडल के सदस्य श्री नितेश कुमार वर्मा एवं श्री सुरेश मालवीय भी उपथित थे।

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