विदिशा (मध्यप्रदेश) की खबर 17 दिसंबर - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

विदिशा (मध्यप्रदेश) की खबर 17 दिसंबर

कांग्रेस सरकार ने एक वर्ष में 164 वचन पूरे किए- डॉ प्रभुराम चौधरी

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विदिशा/ मप्र सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने माधवगंज पर एकत्रित होकर उत्साह और उल्लास के साथ मनाया । इस अवसर पर आकर्षक आतिशबाजी व मिष्ठान वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित मप्र शासन के स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि एक वर्ष के कांग्रेस शासन में प्रदेश का चहुँमुखी विकास हुआ है। कमलनाथ जी ने कर्जमाफी कर प्रदेश के किसानों का आत्मविश्वास बढाया है आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी के करकमलों से "विजन टू डिलेवरी" रोडमैप जारी किया है जिसमे 2020-2025 में 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने की बात कही गई है। प्रदेश के नागरिकों को राइट टू वाटर और राइट टू हेल्थ का अधिकार दिया जायेगा। विधायक शशांक भार्गव ने संबोधित करते हुए कहा कि मैं विदिशा की जनता का ऋणी हूँ जिन्होंने 1 वर्ष पूर्व कांग्रेस पार्टी पर भरोसा जताया। इस 1 वर्ष के कार्यकाल में हमने पिछली सरकार के अधूरे प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता स्वीकृत करवाकर और निश्चित अवधि में पूरा किया है। कमलनाथ जी ने गरीबों के कल्याण के लिए इंदिरा गृह ज्योति योजना लागू कर,कन्यादान योजना की राशि बढ़ाकर 51000 रु कर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि 600 रु कर अपना वचन निभाया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष शैलेंद्र रघुवंशी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से जारी मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के संदेश का वाचन किया। उन्होंने बताया कि विषम आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद कमलनाथ जी ने अपने वचन पत्र के 83 वचनों को पूरा किया है। जो चुनौतियों को अवसर में बदल दे उसी का नाम कमलनाथ है यह बात कमलनाथ जी ने साबित कर दी है। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एडवोकेट डोंगर सिंह कमल सिलाकारी नरेंद्र पीतलिया बसंत जैन रघुवीर सिंह रघुवंशी मजीद भाई वीरेंद्र पीतलिया महेंद्र यादव सुरेश मोतियानी मनोज कपूर बाबूलाल वर्मा रईस अहमद कुरेशी सुरेंद्र भदोरिया अजय कटारे नरेंद्र रघुवंशी दीवान किरार अनुज लोधी मोहर सिंह रघुवंशी वैभव भारद्वाज सुमित वैध वसीम खान विजयकांत रैकवार डालचंद अहिरवार धर्मेंद्र यादव विजेंद्र वर्मा धन्ना लाल कुशवाहा अवधेश दुबे नूर भाई महमूद कामिल राजकुमार डिडोत संजीव प्रजापति अमित ठाकुर इमरान जावेद संतोष गौड़ भोलाराम अहिरवार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता व नागरिक उपस्थित रहेI

खेलो को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में विशेष प्रयास-स्कूल शिक्षा मंत्री
65वीं राष्ट्रीय शालेय ताईक्वांडो प्रतियोगिता का शुभांरभ
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विदिशा जिला मुख्यालय पर आज 65वीं राष्ट्रीय शालेय ताईक्वांडो प्रतियोगिता का शुभांरभ प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल के प्रागंण में खेलध्वज का अनावरण कर किया।  कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ चौधरी ने कहा कि प्रदेश में खेलो को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खिलाड़ियों को सुविधाएं मिले के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जा रहे है इसके लिए खेल सामग्री सहित अन्य की पूर्ति के लिए प्राथमिक से लेकर हायर सेकेण्डरी तक प्रत्येक स्कूल के लिए राशि जारी की गई है कि जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्कूल के लिए पांच हजार, मिडिल स्कूल के लिए दस हजार तथा हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी के लिए क्रमशः 25-25 हजार रूपए की राशि प्रत्येक स्कूल को पहली बार जारी की गई है।  स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ चौधरी ने ताईक्वांडो को आत्मरक्षा का बेहतर कला बताते हुए कहा अब खेलों के माध्यम से आत्मरक्षा के साथ-साथ भविष्य का निर्माण हो रहा है। खेलों से शारीरिक चुस्ती और अनुशासन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने विदिशा जिले में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित करने का जो मेजबानी का अवसर मिला है। उससे जिला ही नही बल्कि प्रदेश की ख्याति राष्ट्रीय स्तर पर अर्जित होगी। कुछ समय के लिए मिनी भारत विदिशा में परलिक्षित होगा। विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों द्वारा खेलो से अपने हुनर को प्रदर्शित करने का अवसर मिला है जिसे अन्य राज्य के खिलाड़ी भी देखकर लाभांवित होंगे। मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और खेलों को बढ़ावा देने के लिए जो निर्णय लिए है परिणाम परिलिक्षित हो रहे है। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल युवक-युवतियों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत करना जरूरी है कठिन परिश्रम से हम किसी भी क्षेत्र में मुकाम हासिल कर सकते है। उन्होंने विजय दिवस आयोजन पर भी प्रकाश डाला। विधायक श्री शशांक भार्गव ने कहा कि विदिशा जिले को लगातार दूसरी राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता की मेजबानी मिली है। निश्चित ही इससे आयोजकों के लिए बेहतर से बेहतर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। उन्होंने ताईक्वांडो को आत्मरक्षा का साधन बताते हुए कहा कि अब इस कला से भविष्य के निर्माण को भी देखा जा रहा है। विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। नौकरी के क्षेत्र में भी अब पहले से अधिक खिलाड़ियों को स्थान मिल रहा है।  विधायक श्री भार्गव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी ने प्रदेश के विकास के लिए जो वचन आमजनों को दिए है कि शत प्रतिशत पूर्ति की ओर अग्रसर हो। इससे पहले जिला शिक्षा अधिकारी श्री एसपी त्रिपाठी ने आयोजन की प्रस्तावना, उद्वेश्य को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केन्द्रशासित सहित 35 राज्यों के खिलाड़ी एवं कोच प्रतियोगिता अवधि के दौरान मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम को एसजीएफआई के उपाध्यक्ष श्री आलोक खरे ने भी सम्बोधित किया। 

सांस्कृतिक कार्यक्रम
65वीं राष्ट्रीय शालेय ताईक्वांडो प्रतियोगिता के शुभांरभ अवसर पर स्कूली विद्यार्थियों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों से छठा बिखेरी। जिसमें मुख्य रूप से नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों के द्वारा असम का लोकनृत्य, नवांकुर विद्यालय गंजबासौदा के विद्यार्थियों ने बुदेंलखण्ड लोकनृत्य राई, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय सागर के विद्यार्थियों ने नौरता नृत्य प्रस्तुत किया। 

मंत्री बने रेफरी
65वीं राष्ट्रीय शालेय ताईक्वांडो प्रतियोगिता के शुभांरभ अवसर पर प्रदर्शन मैचो में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ चौधरी ने रेफरी की भूमिका अदा की। 17 वर्षीय बालक एवं बालिकाओ की पृथक-पृथक प्रतियोगिता में मंत्री डॉ चौधरी ने रेफरी की ही नही वरन खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका हौंसला अफजाई किया।  कार्यक्रम में कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री विनायक वर्मा समेत अन्य अधिकारी तथा पूर्व मंत्री श्री रघुवीर सिंह सूर्यवंशी के अलावा श्री रंधीर सिंह ठाकुर, श्री संजय रघुवंशी, श्री दीवान सिंह किरार, पूर्व विधायक श्री रूद्रप्रताप सिंह तथा लालाराम अहिरवार सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, खिलाड़ी, कोच, स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती दीप्ति शुक्ला ने किया और आगंतुको के प्रति आभार श्री विनोद चौधरी ने व्यक्त किया। 

एक  साल में 365 वचन पूरे  164 वचन पूर्ण और 201 सतत पूरे उल्लेखनीय रहा एक साल का सरकार का कार्यकाल

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मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी के एक वर्षीय कार्यकाल की उपलब्धियों से आमजनों को अवगत कराने के उद्वेश्य से आज विदिशा नगर के कांच मंदिर माधवगंज चौराहे पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।  स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी, विदिशा विधायक श्री शशांक भार्गव समेत अन्य ने सम्बोधित किया। जिसमें उद्बोधन के माध्यम से बताया गया कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने आज एक वर्ष पूरा किया। इस अवधि में प्रदेश सरकार ने दिसम्बर 2018 में प्रदेश विधानसभा के निर्वाचन के पूर्व जारी वचन-पत्र के बिन्दुओं को पूरी शिद्दत से अमली जामा पहनाया। पिछले एक वर्ष की अवधि के पूरे 365 दिनों में सरकार को प्रतिदिन एक वचन की पूर्ति/सतत पूर्ति करने में सफलता मिली। इस अवधि में 164 वचन पर पूर्ण रूप से और 201 वचन पर सतत् पूर्ति की श्रेणी में काम हुआ। इस प्रकार सरकार की कथनी और करनी में भेद नहीं रहा। उसने जो कहा सो किया। निर्वाचन के पूर्व जनता को दिये गये वचनों की पूर्ति की दृष्टि से पिछला एक वर्ष उल्लेखनीय रहा। इस अवधि में खासतौर से किसान-कल्याण और कृषि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला, युवा, नगरीय विकास और ग्रामीण विकास से संबंधित वचनों की पूर्ति विशेष रही। किसान-कल्याण के क्षेत्र में राज्य सरकार ने कार्यभार सम्हालने के पहले ही दिन किसानों की ऋण माफी का फैसला लिया। इस फैसले के अनुरूप प्रथम चरण में 20 लाख 22 हजार 731 ऋण खातों पर 7,154.36 करोड़ की राशि की माफी की जा चुकी है। कर्ज माफी का दूसरा चरण आज से प्रारम्भ हो रहा है, जिसमें कुल 12 लाख से अधिक ऋण खातों पर राशि रूपये 11 हजार 675 करोड़ से अधिक की माफी की जायेगी। सरकार ने गेहूँ के विपुल उत्पादन की स्थिति में मूल्य स्थिरीकरण के उद्देश्य से जय किसान समृद्धि योजना भी लागू की। मक्का में फ्लैट भावांतर भुगतान योजना में 896 करोड़ रूपये का प्रावधान किया। जैविक खेती का रकबा बढ़ाने के लिये 3828 क्लस्टर/ समूह में जैविक खेती का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सभी मंडियों में ई-अनुज्ञा (ऑनलाइन)  प्रणाली लागू की गई। पहली बार किसानों को अनुदान पर कन्बाइन हार्वेस्टर प्रदान किये गये । नये 264 कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना की जा रही है। उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण को भी प्रोत्साहन इस अवधि में दिया। नयी मुख्यमंत्री बागवानी और खाद्य प्र-संस्करण योजना लागू की गई। सब्जी और मसाला विस्तार योजना में अजजा और अजा वर्ग के किसानों की अनुदान राशि 50 से बढ़ाकर 70 प्रतिशत की गई। शिक्षित बेरोजगारों को उद्यानिकी फसलों के लिये भूमि के उपयोग का अधिकार देने संबंधी नई नीति बनाई जा रही है। सरकार ने अगले पाँच वर्ष में वर्तमान सिंचाई क्षमता को 33 लाख से बढ़ाकर 45 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य निर्धारित कर काम शुरू कर दिया है। पुरानी अपूर्ण सिंचाई योजनाओं को तेजी से पूरा करने के साथ नयी सिंचाई योजनाओं को मंजूरी दी गई। प्रदेश को आवंटित 18.25 एमएएफ नर्मदा जल का उपयोग वर्ष 2024 के पूर्व किये जाने संबंधी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया गया।  इस दौरान नगरीय विकास की योजनाओं को जन-अनुरूप बनाकर जन-भागीदारी से प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। प्रचलित योजनाओं को सुव्यवस्थित कर उत्तरदायी नगरीय प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में परिणाममूलक कोशिशें निरंतर जारी हैं। पिछले एक वर्ष में रूकी या अधूरी पड़ी हुई पेयजल, सीवरेज, मेट्रो आदि परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करना सुनिश्चित किया गया है। पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था निर्मित करने की दिशा में नई योजनाएँ शुरू की गई। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने शहरी गरीबों को पट्टा एवं पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से  सितम्बर माह में ष्मुख्यमंत्री आवास मिशन (शहरी)ष् का शुभारम्भ झाबुआ से किया। भूमिहीन परिवारों को पट्टा उपलब्ध कराया जा रहा है। निकायों में क्लस्टर की जगह विकेन्द्रीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्य-योजना लागू की गई। शहरी क्षेत्र में मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना आरम्भ की गई । इसका उद्देश्य नगरीय क्षेत्र के युवाओं को व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण देकर क्षमता बढ़ाना तथा जीवन-यापन की फौरी जरूरतों की पूर्ति हेतु एक वर्ष में 100 दिवस का अस्थायी रोजगार एवं समानुपातिक स्टाइपेंड प्रदान करना है। अभी 38 ट्रेंडों में करीब 20 हजार हितग्राही प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। योजना में 18 हजार से ज्यादा पात्र हितग्राहियों को 12 करोड़ से ज्यादा की स्टाईपेंड राशि दी गई। अवैध होर्डिंग हटाये जाने की कार्रवाई की गई। मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2019 बनायी गई। इंट्रा-सिटी एवं इंटरसिटी बस सेवाओं को प्रभावी बनाया गया। राज्य शहरी आजीविका मिशन में 30 नये शहरों को जोड़ा गया।  राज्य सरकार ने गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा व्यवस्था कायम करने के लिये पिछले एक साल में कई ऐतिहासिक निर्णय लेकर उन्हें जमीन पर उतारा। अब बच्चे स्कूल पहुँचने लगे हैं, शिक्षक भी बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिये समर्पित हुए हैं। अकादमिक सत्र 2019-20 से पाँचवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों का वार्षिक मूल्यांकन बोर्ड पैटर्न पर किये जाने का निर्णय लिया गया।  श्ऑनलाइन ट्रान्सफरश् व्यवस्था लागू कर शिक्षकों को उनकी पसंद के स्थान पर पद-स्थापना में प्राथमिकता दी गई है। अध्यापकों की शिक्षा विभाग में संविलियन की माँग को पूरा किया गया।  शिक्षकों के रिक्त पदों पर 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति शीघ्र की जा रही है।  उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश के चुनिंदा और बेहतर शिक्षा के लिए अग्रणी प्रदेशों के समकक्ष बनने की ओर मध्यप्रदेश ने शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर करने के साथ मजबूती से कदम बढ़ाये हैं। आधुनिक संसाधनों से शिक्षा संस्थानों को परिपूर्ण करना, अधोसंरचना का निर्माण, बेटियों के लिए सुलभ और बेहतर शिक्षा, प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, कौशल विकास और रोजगारमुखी शिक्षा, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारियों की नियुक्ति, ई-लायब्रेरी और खेल मैदान की उपलब्धता जैसी नीतियों के लागू और पूरा होने से प्रदेश का उच्च शिक्षा परिवेश रचनात्मक और विश्वसनीय बना है। इंदिरा गृह ज्योति योजना लागू कर आम उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक बिजली एक रूपये प्रति यूनिट देने का काम किया गया। इंदिरा किसान ज्योति योजना लागू कर किसानों के लिये 10 हार्स पावर तक के पंपों पर विद्युत शुल्क 1400 रूपये से घटाकर 700 रूपये प्रति हार्स पावर प्रतिवर्ष कर दिया। इस अवधि में प्रदेश के सुदूर अंचलों में सभी को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने और बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों को चिकित्सकों के परामर्श के साथ ही उपचार की बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा। सबके लिये सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिये सरकार के प्रयासों के नतीजे केवल एक ही वर्ष में नजर आने लगे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो जनता को स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी देने वाला कानून बनाने जा रहा है। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य निवेश प्रोत्साहन नीति-2019 को भी मंजूरी दे दी गई है। प्रदेश में लगभग 100 संजीवनी क्लीनिक स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। 118 सिविल डिस्पेंसरी एवं 136 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर्स-मध्यप्रदेश आरोग्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। चिकित्सा की आधुनिक सुविधाओं युक्त स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना के साथ समुचित संख्या में डाक्टरों की पदस्थापनाएँ की गई हैं। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकों की उपलब्धता के लिये ष्मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सक प्रोत्साहन योजनाष् लागू करने का निर्णय लिया गया। मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिये सीट्स की संख्या भी बढ़ाई गई हैं। स्वास्थ्य संस्थाओं की स्थापना और चिकित्सा शिक्षा के अध्ययन के लिये प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। खाद्य पदार्थों में मिलावट के कुचक्र के पूरी तरह से खात्मे के लिये सरकार ने एक युद्ध का ऐलान कर दिया है। मिलावटखोरों जैसे गुनाहगारों की धर-पकड़ के इस संवेदनशील संकल्प के अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। प्रदेश सरकार की नजर में पीने के लिये साफ पानी केवल जरूरत ही नहीं, बल्कि सामान्य जन का अधिकार भी है। ष्राइट टू वाटर एक्टष् लागू होने पर मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहाँ लोगों को पानी का कानूनी अधिकार मिलेगा। पिछले एक वर्ष में सड़कों के निर्माण, मजबूतीकरण और नवीनीकरण के अनेक कार्य प्रदेश के विकास के लिये प्रतिबद्धता का प्रमाण रहे। प्रदेश की नई सरकार की प्राथमिकताओं की फेहरिश्त में महिलाओं और बच्चों का सर्वांगीण विकास सबसे ऊपर रहा। नई बाल संरक्षण नीति बनाई जा रही है। पोषण आहार अभियान के तहत अब बच्चों के वजन के साथ ही उम्र के अनुसार कद के मान से उसके परिवार को पोषण परामर्श दिया जा रहा है। किशोर न्याय अधिनियम 2015 के प्रावधानों के तहत राज्य किशोर न्याय नियम बनाये जाने का निर्णय लिया गया है। अब दुष्कर्म पीड़िता बालिका अथवा महिला से जन्म लेने वाली बालिका को भी लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिये जाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह - निकाह योजना की राशि 28,500 से बढ़ाकर 51 हजार रूपये की गई है।  राज्य सरकार द्वारा गाँवों के विकास के लिये विभिन्न नवाचारी योजनाएँ एवं कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी घर शौचालयविहीन ना रहे, इसलिये शौचालयविहीन घरों का चिन्हांकन किया जा रहा है। नदियों के पुनर्जीवन हेतु नदी पुनर्जीवन योजना बनाई गई, जिसमें 40 जिलों में 40 नदियों का चयन किया गया। इस वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1000 गौ-शाला निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। कुल 903 गौ-शालाओं का कार्य प्रारम्भ किया जा चुका।  अपात्र बसाहटों के लिये एकल/ दोहरी सम्पर्कता प्रदान किये जाने हेतु प्रदेश में सड़कों के निर्माण एवं रख-रखाव के क्रियान्वयन के लिये नीति निर्धारण की कार्यवाही प्रचलन में है। एकल सम्पर्कता विहीन राजस्व ग्रामों में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना विकास निधि से डामरीकृत सड़क बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। ष्महात्मा गांधी ग्राम स्वराज एवं विकास योजनाष् में पक्के निर्माण कार्यों में 50 प्रतिशत राशि सी.सी. सड़क पर व्यय करने की अनिवार्यता समाप्त कर कुल व्यय सीमा 75 प्रतिशत की गई। पीएमजीएसवाय-एक एवं दो में 3319 किमी लंबाई सड़कें पूर्ण की गई। म.प्र. ग्रामीण सम्पर्कता परियोजना में 2752.51 कि.मी. लंबाई की बी.टी./सी.सी. मार्गों का निर्माण पूर्ण किया गया। अन्य योजनाओं में भी 580 ग्रामों को सड़कों से जोड़ा गया।  प्रधानमंत्री आवास योजना में दो लाख 23 हजार आवास पूर्ण किये गये। सर्वे  में छूट गये तीन लाख से अधिक शौचालयविहीन घरों में शौचालयों का निर्माण कराया गया। सवा 5 लाख से ज्यादा परिवारों को संगठित कर करीब 50 हजार स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया। इन समूहों को 37 हजार प्रकरणों में बैंकों से 232 करोड़ रूपये का ऋण दिलाया गया। मनरेगा में साढ़े 12 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये।  इस अवधि में सरकार ने आदिवासी समुदाय के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक उत्थान के प्रयासों के अलावा संस्कृति, इतिहास और देव स्थानों के संरक्षण एवं उन्हें बढ़ावा देने की कोशिश की है। वनअधिकार अधिनियम के दावों के निराकरण और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया। मुख्यमंत्री मदद योजना शुरू कर जन्म और मृत्यु संस्कार के समय भोज देने के लिये अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। आदिवासी समुदाय के देव स्थानों के संरक्षण के लिये आष्ठान योजना शुरू की गई। साहूकारी ऋण से मुक्ति दिलायी गयी। विशेष पिछड़ी जनजातियों को कुपोषण से मुक्ति के लिये महिलाओं को पोषण आहार राशि देने की शुरूआत की गई। विश्व आदिवासी दिवस के एच्छिक अवकाश को सार्वजनिक अवकाश में बदला गया। आदिवासी विकास खण्डों में डेबिट कार्ड योजना शुरू की गई। राज्य सरकार ने सभी तरह के माफिया को समाप्त करने की मुहिम भी शुरू कर दी है। कानून को हाथ में लेने वाले तत्वों, फिर चाहे वे कितने ही रसूखदार हो, को कानून के शिकंजे में लाने के परिणाम भी दिखने लगे हैं। शासन-प्रशासन के सुदृढ़ीकरण, सभी वर्गों के कल्याण एवं शासकीय सेवकों के हित में महत्वपूर्ण फैसले लेकर लागू किया गया। अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को शैक्षणिक संस्थाओं और शासकीय नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। शासकीय सेवाओं में मध्यप्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए अभ्यर्थियों का रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन अनिवार्य किया गया। खुली प्रतियोगिता से भरे जाने वाले पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित की गई। इसी के साथ आरक्षित वर्गों को आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट दी गई है। इस तरह प्रदेश सरकार ने पिछले एक वर्ष में हर उस क्षेत्र में लोगों के कल्याण और बेहतरी की कोशिशें की, जो बुनियादी रूप से महत्व के हैं। फिर चाहे वह खेती-किसानी हो, सिंचाई हो, पेयजल हो, बिजली हो, उद्योग हो, कुटीर उद्योग हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, शासन-प्रशासन हो, राजस्व प्रकरण हो या लोक सेवाओं का प्रदाय, सबमें कुछ न कुछ नया हुआ, उल्लेखनीय हुआ। पर्यटन-संस्कृति, आध्यात्म हो या बेहतर कानून-व्यवस्था, सरकार ने हर मोर्चे पर काम किया और वह भी पूरी शिद्दत से और परिणामोन्मुखी। यह सब प्रदेश सरकार ने तब किया जब विरासत में खाली खजाना मिला। ऐसे में सरकार ने अपनी चुनौतियों को अवसरों में बदला। हर तबका चाहे वह युवा हो, महिला हो, किसान हो या आदिवासी भाई, पिछड़े वर्ग के भाई-बहन हो या सामान्य वर्ग के, बच्चे हो या बुजुर्ग कोई भी पिछले एक वर्ष में सरकार की चिंताओं से अछूता नहीं रहा। इस एक वर्ष में प्रदेश सरकार ने वक्त है बदलाव को सार्थक किया तो प्रदेशवासियों को यह विश्वास भी दिया कि वह अकेले नहीं है सरकार हर समय उनके साथ खड़ी है सुख में-दुख में।

मौके पर 81 आवेदन निराकृत 

कलेक्टर श्री  कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के मार्गदर्शन में आहूत की गई आज जनसुनवाई कार्यक्रम में 150 आवेदकों ने आवेदन प्रस्तुत कर अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया।  जिला पंचायत सीईओ श्री मयंक अग्रवाल ने मौके पर 81 आवेदनों का निराकरण कराया है शेष आवेदनों पर समय सीमा में कार्यवाही करने के निर्देश उनके द्वारा विभागों के अधिकारियों को दिए गए है।  जिला पंचायत के सभागार कक्ष में सम्पन्न हुई जनसुनवाई कार्यक्रम में एसडीएम श्री प्रवीण प्रजापति, डिप्टी कलेक्टर श्री बिजेन्द्र सिंह यादव के अलावा अतिरिक्त जिला पंचायत सीईओ श्री दया शंकर सिंह के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने पंक्तिबद्व रो में बैठकर आवेदकों से आवेदन प्राप्त कर निराकरण की कार्यवाही की गई है। 

अब स्कूल प्रातः साढे आठ बजे से संचालित होंगे

जिले में जारी सर्दी के प्रकोप को देखते हुए समस्त शासकीय, अशासकीय विद्यालय अब साढे आठ बजे से संचालित होंगे। उक्त आदेश कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के द्वारा आज जारी किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश का हवाला देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी श्री एसपी त्रिपाठी ने बताया कि जिले के समस्त शासकीय अशासकीय, सीबीएसई एवं अनुदान प्राप्त विद्यालय प्रातः साढे आठ बजे के पूर्व संचालित ना किए जाए साथ ही किसी भी विद्यालय की स्कूल बस, वैन, आटो इत्यादि आठ बजे के पूर्व छात्रों को लेने ना पहुंचे का कढाई से पालन करने के निर्देश संबंधितों को दिए गए है। जारी आदेश में उल्लेख है कि जिले का कोई भी पूर्व उल्लेखित स्कूल सांय पांच बजे के बाद संचालित ना किया जाए। जारी आदेश समस्त शासकीय अशासकीय, सीबीएसई एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं के लिए मान्य होगा। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है। 

खुशियों की दास्तां : आजीविका से जीविका उपार्जन के संसाधन मिले

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आजीविका मिशन से व्यवसायी बनी श्रीमती शीला बाई का मानना है कि महिलाओं के बीच में मिशन से आत्म निर्भरता की ओर अग्रसर हुई है। सीता समूह की सदस्य श्रीमती शीलाबाई समूह से जुड़ने से पहले वार्तालाप करने में हिचकती थी और अब बेंकिंग प्रणाली की बाते नही करती बल्कि ऑन लाइन भुगतान कर रही है यह सब आजीविका मिशन की गतिविधियों में सहभागिता निभाने से संभव हुआ है।  हितग्राही श्रीमती शीलाबाई बताती है कि घर में पांच सदस्य की जीविका उपार्जन के लिए जद्दोजहद करना पड़ रही थी ऐसे समय आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में गठित समूह की दीदीयों से जुड़ने का सौभाग्य मिला और धीरे-धीरे अग्रसर होने लगी। आजीविका मिशन के द्वारा किराना दुकान एवं पशुपालन के लिए बैंक के माध्यम से फायनेंस कराया गया। उक्त व्यवसाय से पारिवारिक आमदनी में वृद्वि होने लगी। अब बच्चों की पढ़ाई और खर्चा के लिए खासकर फीस भरने की समस्या से निजात मिली है वही आर्थिक रूप से सबल होते जा रही हूं। परिवार की आय में वृद्वि होने से सम्मान बढ़ा है। समूह से जुड़कर घरेलू खर्चे कैसे कम हो और आमदनी कैसे बढ़े की ओर मार्गप्रस्त किया है। समूह में जुडने से पहले और बाद में आए जीवन में परिवर्तन को स्पष्ट देखा जा सकता है। परिवार की जीविकाउपार्जन में पति के साथ कंधा से कंधा मिलाकर आर्थिक सबलता की ओर बढ़ रहे है।  

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