झारखण्ड : एंग्लो इंडियन समुदाय से ग्लेन जोसेफ गॉलस्टान को विधानसभा के सदस्य मनोनीत - Live Aaryaavart

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शनिवार, 25 जनवरी 2020

झारखण्ड : एंग्लो इंडियन समुदाय से ग्लेन जोसेफ गॉलस्टान को विधानसभा के सदस्य मनोनीत

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रांची, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि सदस्य को मनोनीत करने की अनुशंसा की झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से की थी।इसके आलोक में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने विधि विशेषज्ञों से परामर्श ली। इसके बाद निवर्तमान एंग्लो इंडियन समुदाय से ग्लेन जोसेफ गॉलस्टान को विधानसभा के सदस्य मनोनीत कर दी। उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा में जोसेफ पी गॉलस्टेन एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में मनोनीत थे।इस बीच 15 नवम्बर 2000 को बिहार विभाजित हो गया। तब झारखंड प्रदेश का उद्गम हुआ। विभाजित झारखंड के सीमांकन में  मैकलुस्कीगंज आ गया। यहां पर एंग्लो इंडियन समुदाय की बहुतायत संख्या हैं। इसके चलते विधायक जोसेफ पी गॉलस्टेन झारखंड प्रदेश के एंग्लो इंडियन समुदाय से प्रतिनिधित्व करने लगे। विधायक जोसेफ पी गॉलस्टेन का निधन होने पर सरकार ने उनके पुत्र जीजे गॉलस्टेन को प्रतिनिधि मनोनीत कर दिए । पिता जोसेफ पी गॉलस्टेन और पुत्र जीजे गॉलस्टेन मिलकर 22 सालों से एंग्लो इंडियन समुदाय से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधानसभा के एंग्लो इंडियन सदस्य के रूप में जीजे गॉलस्टेन ने शुक्रवार को शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने अपने कक्ष में उन्हें शपथ दिलाई। इस मौके पर विधानसभा के सचिव महेंद्र प्रसाद समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे। गौरतलब है कि राज्य सरकार विधानसभा में एक एंग्लो इंडियन सदस्य को मनोनीत करती है। अभी ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन झारखंड विधानसभा में मनोनीत सदस्य हैं। वो बताते हैं कि एंग्लो-इंडियन के जन प्रतिनिधि होने के नाते वह और उनके पिता ने मैकलुस्कीगंज को आबाद करने और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने के भरसक प्रयास किए हैं। मैकलुस्कीगंज में पुलिस थाना खोलने के लिए उन्होंने अपनी जमीन और घर दे दिया। उन्हें उम्मीद है कि अब बाकी 26 एंग्लो-इंडियन परिवार यहीं रहेंगे और उनके गांव की रौनक भी लौटेगी। मैकलुस्कीगंज के सुरेंद्र पांडेय ने गरीब बच्चों के लिए आदर्श उच्च विद्यालय के नाम से एक स्कूल की स्थापना की है। वह कहते हैं कि स्कूलों के खुलने से परिस्थितयां बदली हैं। वह भी चाहते हैं कि यहां से जाने वाले एंग्लो-इंडियन अपने मुलुक को लौट आएं। एंग्लो-इंडियन परिवारों की स्कूलों के प्रति तन्मयता देखते बनती है। बच्चों को पढ़ाना, गाड़ियों से घर पहुंचाना, छात्रावास में उन्हें अपनों जैसा रखना, साथ खेलना और अंग्रेजी सिखाने पर विशेष ज़ोर विशेषता रही है। पांडेय मनोनीत विधायक के प्रतिनिधि भी हैं। वह बताते हैं कि गॉलस्टेन ने इस बस्ती में डीप बोरिंग और पक्की सड़कें बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया है। मैकलुस्कीगंज स्टेशन के सामने चाय-पानी की एक छोटी सी दुकान है। इसके संचालक सुरेश जी बताते हैं कि स्कूल और छात्रावास जैसे-जैसे खुलते गए, यहां स्थानीय लोगों के लिए आमदनी का ज़रिया बढ़ता गया। महेश्वर गोप बता रहे थे कि वह 'खटाल' चलाते हैं। अब तो दूध की डिमांड भी वह पूरी नहीं कर पाते। नर्सरी से बारहवीं कक्षा तक पूरे इलाके में कम-से-कम पचास स्कूल खुले हैं। 37 छात्रावास हैं। आख़िर इतने बच्चे आते कहां से हैं, इस सवाल पर वे कहते हैं कि यहां बड़ी तादाद में बाहर से आकर बच्चे पढ़ते हैं। वो बताते हैं कि डॉन वास्को स्कूल ने यहां की विश्वसनीयता बढ़ा दी है। पटना के एडीजी रोजारियो ने इस स्कूल को खोला है।

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