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बुधवार, 15 जनवरी 2020

मुद्रास्फीति जनवरी में 8% से ऊपर जा सकती है, आरबीआई के लिए चुनौती

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नयी दिल्ली, 14 जनवरी, भारतीय स्टेट बैंक की शोध इकाई की एक रपट के अनुसार सब्जियों के दाम में वृद्धि को देखते हुए जनवरी माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है लेकिन उसके बाद इसके नरम पड़ने की उम्मीद है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में यह भी कहा गया है कि मार्च तक खुदरा मुद्रास्फीति सात प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है और इसे देखते हुए आरबीआई नीतिगत दर वर्तमान स्तर पर बनाए रख सकता है। मंगलवार को जारी इर रपट में कहा गया है कि अगर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में कमी नहीं आती है, हम गतिहीन मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) की स्थिति में जा सकते है जहां आर्थिक वृद्धि कमजोर रहने के साथ महंगाई दर ऊंची होती है।  उल्लेखनीय है कि सोमवार को जारी खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2019 में उछलकर 64 महीनों (रिपीट 64 महीनों) के उच्च स्तर 7.35 प्रतिशत पहुंच गयी। यह इससे पिछले महीने नवंबर में 5.54 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर में वृद्धि का प्रमुख कारण प्याज, आलू और अदरक के दाम में उल्लेखनीय तेजी है। इसके अलावा दूरसंचार शुल्क में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति में 0.16 प्रतिशत का प्रभाव पड़ा है। इसमें कहा गया है, ‘‘इसे देखते हुए सीपीआई आधारित महंगाई दर इस महीने 8 प्रतिशत के ऊपर निकल सकती है। हालांकि उसके बाद स्थिति में सुधार की संभावना है।’’  इकोरैप के अनुसार, ‘‘हालांकि महंगाई दर में वृद्धि को देखते हुए रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति और वृद्धि के अनुमानों पर पुनर्विचार करने के लिये बाध्य हो सकता है। लेकिन हमारे विचार से रुख में बदलाव अवांछित होगा। इसका कारण खपत में उल्लेखनीय रूप से कमी है।’’  रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक के पास दिसंबर में नीतिगत दर में कटौती का अच्छा मौका था। उस समय अक्टूबर में मुद्रास्फीति 4.62 प्रतिशत थी। इसके अनुसार, ‘‘खाद्य वस्तुओं के दाम में अगर नरमी नहीं आती है, हम गतिहीन मुद्रास्फीति की स्थिति में जा सकते हैं।’’  महंगाई दर में नरमी के बारे में इकोरैप में कहा गया है, ‘‘इसमें सितंबर 2020 के बाद नरमी की उम्मीद है। दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 में सकल मुद्रास्फीति घटकर 3 प्रतिशत के नीचे जा सकती है। इसका मतलब है कि आरबीआई 2020 में यथास्थिति बनाये रख सकता है।’’  आरबीआई मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से सीपीआई आधारित महंगाई दर पर विचार करता है। केंद्रीय बैंक छह फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब्जी के दाम में तेजी को देखते हुए आने वाले समय में अंडा, मांस, मछली जैसे प्रोटीन युक्त खाने के सामान की महंगाई दर बढ़ सकती है। इसका कारण लोग महंगी सब्जी के बजाए दाल, अंडा, मांस के उपभोग को बढ़ा सकते हैं जिससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। इकोरैप में सीपीआई की गणना के तरीके पर भी पुनर्विचार पर जोर दिया गया है।  इसमें कहा गया है, ‘‘केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) सीईएस (प्रतिस्थापन की स्थिर लोचशीलता) सर्वे का उपयोग करता है। इससे सीपीआई आधारित महंगाई दर में 2 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। सीपीआई के अनुमान में इस तरीके पर विचार करने की जरूरत है।’’  रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में लगभग 7 प्रतिशत की दर से ऊंची बनी रह सकती है। वित्त वर्ष 2019-20 में यह औसतन 5 प्रतिशत रहेगी।  इसमें कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि आरबीआई पूरे 2020 में मौद्रिक नीति के मोर्चे पर यथस्थिति बनाये रख सकता है क्योंकि जून-जुलाई 2020 तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के ऊपर बनी रह सकती है।’’  आर्थिक वृद्धि में नरमी और तथा उच्च मुद्रास्फीति को देखते हुए आरबीआई के लिये नीतिगत दर के मोर्चे पर कोई निर्णय करना आसान नहीं होगा। सीएसओ के अग्रिम अनुमान के अनुसार देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 में 5 प्रतिशत रह सकती है।

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