सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 12 जनवरी - Live Aaryaavart

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रविवार, 12 जनवरी 2020

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 12 जनवरी

सदगुरू कबीर आश्रम में हुई सदभावना के लिए बैठक संत शिरोमणी रविदास जयंती मनाने का निर्णय 

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सीहोर। सत्य गुरू कबीर आश्रम डाईट कालोनी में सदभावना सत्संग सेवा समिति की रविवार को बैठक हुई। शुभारंभ दयाराम कबीरपंथी ने संत कबीर के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। सदभावना प्रेमियों ने बैठक के दौरान समिति गठन के लिए अपने विचार व्यक्त किए।  कार्यक्रम में उपास्थित सदस्य के समक्ष दयाराम कबीरपंथी ने सदभावना सेवा समिति गठन के लिए प्रस्ताव रखा और सेवा समिति का उदद्ेश्य व अर्थ विस्तारपूर्वक समझाया। तत्पश्चात सदस्यों ने समिति गठन करने और आगामी बैठक ९ फरवरी को आयोजित करने सहित संत शिरोमणी रविदास जयंती मनाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम में दयाराम कबीरपंथी ने बताया की नियमानुसार समिति गठन किया जाकर प्रचार प्रसार कर कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। उन्होने बताया की कोई भी व्यक्ति सदभावना समिति से जुड़कर समाज सेवा कर सकता है। समिति के द्वारा जिले में सदभावना एकता के लिए अभियान चलाने की भी योजना बनाई जाएगी। जिस के तहत सदभावना के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।  कार्यक्रम के दौरान पूर्व सरपंच विष्णु मेवाड़ा, ग्राम पटेल हीरालाल परमार, श्रीमल परमार, जगन्नाथ मास्टर आष्टा, हरि सिंह परमार कालापीपल, कमलेश दोहरे, योगेश भास्कर शेलेंश शेल, एडवोकेट श्रावण वास्तवार, कमल कीर, जीवन पंसोरिया, डॉ अनिल बोद्ध्र, जनम सिंह परमार, बाबूलाल सागर, प्रशांत राठौर, राजकमल वंशकार, बनप सिंह कबीरपंथी, घीसीलाल कबीरपंथी, इंदर सिंह कबीरपंथी, संतोष मालवीय, विजय मालवीय, संजय मालवीय, आकाश मालवीय, जसपाल मालवीय, निर्दोष मालवीय, ललित मालवीय आदि सदस्यगण मौजूद रहे।

अध्यामिक शक्ति से बच्चों को बनाना होगा संस्कारित- संत सतीष भाई
आश्रम में गुरूकुल के बच्चों ने प्रस्तुत किये धार्मिक नाटक 
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सीहेार। संसारिक शिक्षा पददती से बच्चों को संस्कारित नहीं बनाया जा सकता है बच्चों को आध्यमिक शिक्षा शक्ति से हीं संस्कारित बनाया जा सकता है जिस में गुरूकुल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है उक्त विचार गणेश मंदिर स्थित आश्रम में आयोजित संत्सग प्रवचन के दौरान संत सतीष भाई ने श्रद्धालुओं समक्ष व्यक्त किए।  कार्यक्रम के दौरान गुरूकुल के बच्चों ने सुन्दर आध्यमिक नाटकों की प्रस्तुति देकर आश्रम में उपास्थित श्रद्धालजुओं का मनमोह लिया। आश्रम में विधिवत पूजा अर्चना की गई। गीता-भागवत सत्संग कार्यक्रम के बाद  सद साहित्य का वितरण किया गया। संत सतीष भाई ने कहा की गुरुकुल के बालको में अत्यंत परमात्मा की शक्ति होती है। संतजी ने कहा की संसार अनित्य हे परमात्मा गुरू शशवत है समय रहते हमे जाग जाना चाहिए भजन सेवा साधना सुमिरन करके अत्म कल्याण कर लेना चाहिये अभी संतो संस्कृती को नष्ट करने का कुचक्र किया जा रहा है। कार्यक्रम में आश्रम प्रमुख संतोष यादव ने सत्संग में आष्टा नसरूल्लागंज इछावर, श्यामपुर पाटन, खोकरा खमलाय सहित आसपास के श्रद्धालुगण शामिल रहे सत्संग आरती व महाप्रसादी भंडारे के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया। 

पंचायतों से राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित

राज्य शासन ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायत राज संस्थाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत करने के लिए 31 जनवरी 2020 तक ऑनलाईन प्रविष्टियाँ आमंत्रित की है। संस्थाएं वेबसाइट panchayataward.gov.in के माध्यम से प्रविष्टि प्रस्तुत कर सकते है। आयुक्त पंचायत-राज श्री संदीप यादव ने बताया कि राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोह में 24 अपैल को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसमें उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा है। नामांकन निर्धारित ऑनलाईन प्रपत्र में है - मूल्याँकन वर्ष 2018-19 के आधार पर होगा। आवेदन की श्रेणियाँ दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार - सामान्य और विषयात्मक श्रेणी के लिए तीनों स्तर की पंचायतों को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार - ग्राम पंचायतों को ग्राम सभा के उत्कृष्ट कार्य निष्पादन, ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार - ग्राम पंचायत को, बाल- हितैषी ग्राम पंचायत पुरस्कार ग्राम पंचायत को दिया जाएगा। सभी जिला और जनपद पंचायतों से कहा गया है कि पाँचवी अनुसूची (PESA) क्षेत्र की जनपद पंचायतें और ग्राम पंचायतें आनुपातिक रूप से अधिक संख्या में अपने नामांकन प्रस्तुत कर सकते हैं। एक  जिले से 2 जनपद पंचायतों एवं 2 ग्राम पंचायतों से अधिक नामांकन अग्रेषित न किये जाएं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिले के नामांकनों की सतत मॉनिटरिंग करेंगे। जिला पंचायत को प्रमाण-पत्र के साथ 50 लाख, जनपद पंचायत को प्रमाण-पत्र के साथ राशि रू. 25 लाख एवं ग्राम पंचायतों को उनकी जनसंख्या के अनुसार प्रमाण-पत्र के साथ राशि 5 लाख से 15 लाख तक पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाती है।

19 जनवरी को बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जायेगी

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 19 जनवरी को 5 वर्ष के सभी बच्चों को पोलियो रोधी दवाई पिलाई जायेगी। इसके लिये जिले में सूक्ष्म कार्य योजना बनाई गई, जिसमें मंजरे टोले, ईट भट्टे, निर्माण स्थल वन ग्राम, हाई रिस्क एरिया को चिन्हांकित किये गये है। पल्स पोलियो अभियान को सुचारू रूप से क्रियान्वयन करने के लिए आशा कार्यकर्ता, आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सुपरवाईजरों को प्रषिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही आशा एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता व्दारा अभी से पल्स पोलियो की जानकारी आमजनों मे दी जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की दवाई से छूटने न पाये। 

आदिवासियों में घेंघा रोग की रोकथाम के लिये आयोडीन युक्त नमक का वितरण

प्रदेश में आदिवासियों में घेंघा रोग की रोकथाम के लिये 89 आदिवासी बहुल विकासखण्ड में आयोडीनयुक्त नमक वितरण योजना शुरू की गई है। समस्त अंत्योदय परिवारों और प्राथमिकता श्रेणी वाले आदिवासी परिवारों को प्रति राशन-कार्ड एक रुपये प्रति किलो के मान से आयोडीनयुक्त नमक प्रदाय किया जा रहा है। इस कार्य पर अभी तक 18 करोड़ 46 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। प्रदेश में अति गरीब आदिम जनजातियों को अंत्योदय अन्न योजना में पीले राशन-कार्ड वितरित किये गये हैं। शेष जनजातियों में से जो परिवार अंत्योदय अन्न योजना में पात्र नहीं हैं, उन्हें बीपीएल कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। अंत्योदय अन्न योजना के हितग्राहियों को 2 रुपये प्रति किलो गेहूँ, 3 रुपये प्रति किलो चावल और प्रति परिवार 35 किलो उपलब्ध करवाया जा रहा है। बीपीएल कार्ड योजना में 3 रुपये किलो गेहूँ और 4.50 रुपये किलो चावल उपलब्ध कराया जा रहा है।  प्रदेश में अनुसूचित-जनजाति वर्ग के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना में प्रति छात्र प्रतिमाह 12 किलो 500 ग्राम खाद्यान्न, एक रुपये किलो की दर पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश में करीब पौने दो लाख विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है।

सभी जिलों में चलेगा ड्रग माफिया के खिलाफ अभियान

नियंत्रक ड्रग श्री रविन्द्र सिंह ने सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए कि  ड्रग माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाए। इसके लिए सभी दवाई की दुकानों, स्टाकिस्ट, थोक व्यपारियों के यहां लगातार जांच की जाए, बिना लाइसेंस के दवाई,  प्रतिबंधित और नार्कोटिक्स दवाई को बनाने और विक्रय करते पाए जाने पर उनके विरुद्ध एफ आई आर दर्ज कराएं। यदि किसी दवाई में नशीले पदार्थो का मिश्रण या उसका उपयोग नशीली दवाई के रूप में आम लोग द्वारा किया जाने पर भी उसे प्रतिबंधित करने की कार्रवाई करे। नियंत्रक ड्रग ने कहा कि सभी औषधि निरीक्षक झोला छाप डॉक्टर के यहाँ भी जांच करें और देखें कि उनके यहाँ दवाई का अवैध भण्डारण तो नही किया जा रहा है, तो पुलिस के साथ कार्रवाई करें। 

विशेष लेख :  आओ चले हम सीवन तट की और
देश के 1857 के महान 356 अमर शहीद वीर सपूतों की बलिदान गाथा
सीहोर। स्वतंत्रता संग्राम के गौरवमयी इतिहास में पूरे मध्य भारत का सबसे समृद्ध इतिहास यदि किसी क्षेत्र का है तो वह सीहोर का है। यहॉ अंग्रेज सैनिकों की छावनी थी। सन 1857 के इतिहास के पन्नों में सीहोर में हुई सैनिक क्रांति दर्ज तो है लेकिन आज तक इसे स्थानीय स्तर पर ही शासन द्वारा महत्व नहीं मिल सका है। अनेक ऐतिहासिक पुस्तकों में सीहोर के इतिहास की दास्तां लिखी है। सिपाही बहादुर सरकार के गठन से लेकर उसके जांवाज 356 सैनिकों के जनरल ह्यूरोज द्वारा कराये गये सामुहिक हत्याकाण्ड के घटनाकम को सीहोर शायद भूलता जा रहा है। देश की स्वतंत्रता के 73 साल बीत जाने के बाद भी सीहोर का गौरवमयी स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास की गौरव गाथा पर नये सिरे से थोड़ा शोध कार्य होना चाहिये। सिद्धपुर की वीर धरा पर भारत का पहला स्वतंत्रता का आंदोलन सबसे दमदारी के साथ लड़ा गया था। 6 अगस्त 1857 से लेकर 14 जनवरी 1858 तक पूरे 6 माह तक हम पूरे सीहोरवासी स्वतंत्र थे। यहॉ अंग्रेजों की छावनी में ही भारतीयों ने सारे अंग्रेजों को खदेडक़र भगा दिया था और सिद्धपुर को आजाद करा लिया था। हवलदार महावीर कोठ, रमजूलाल, बलि शाह, आरिफ शाह, फाजील मोहम्मद आदि विद्रोही सिपाही नेतृत्व कर रहे थे। क्रांतिकारियों के नेतृत्व में सिपाही बहादुर सरकार का गठन कर प्रजातांत्रिक तरीके से सीहोर में 6 माह तक महावीर कौसिंल के नाम से शासन हुआ। अंग्रेजों के झण्डे को उतारकर निशाने मोहम्मदी व निशाने महावीरी नामक दो झण्डे पूरे 6 माह तक पूरी शान से लहराते रहे। सीहोर में सिपाही बहादुर सरकार महावीर कौंसिल के संस्थापकों ने अंग्रेजों को मार-मारकर खदेड़ दिया था। नवाब सिकंदर जहॉ बेगम व अंग्रेजों के झण्डे उखाड़ दिये थे। लेकिन इन वीरों का उल्लेख आजादी के बाद लिखे व पढ़ाये जा रहे इतिहास में नहीं किया जा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री माननीय दिग्विजय सिंह के शासन काल में संस्कृतिक विभाग के स्वराज संस्थान संचालनालय द्वारा एक पुस्तक सिपाही बहादुर सरकार प्रकाशित की गई थी। जिसका नाट्य मंचन सीहोर नगर के टाउनहाल में किया जा चुका है। प्रेरणा स्वरुप निरन्तर नाट्य प्रस्तुति इतिहास के पक्ष को सही दृष्टि प्रदान करती है। नागरिकों को इतिहास की जानकारी होना आवश्यक है।  14 जनवरी 1858 के कुछ दिनो पूर्व जनरल ह्यूरोज जिसने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से युद्ध किया था, ने सीहोर आकर यहॉ की सिपाही बहादुर सरकार के वीर सिपाहियों को चारों तरफ से घेर लिया था। उन्हे भोपाल की सिकंदर जहॉ बेगम की सहायता से बंदी बना लिया था और अंतत: उन्हे कैद में डाल दिया गया । फिर माफी मांगने को कहा गया।  लेकिन किसी भी वीर क्रांतिकारी ने अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी। यह क्रांतिकारी कोई 3-4 नहीं वरन 356 से अधिक थे, जिन्होने एक साथ कह दिया कि चाहे इस भारत मॉ की गोद में सो जायेंगे लेकिन माफी नहीं मागेंगे अपने धर्म से विमुख नहीं होंगे । और क्रांतिकारियों ने सामुहिक रूप से माफी लिखकर नहीं मांगी। अंतत: घबराये जनरल ह्यूरोज ने इतने अधिक लोगों को एक साथ मारने का फैसला करते हुए 14 जनवरी 1858 को 356 क्रांतिकारियों को गोलियों से भुनवा दिया। पूरे भारत में इससे बड़ा हत्याकाण्ड कभी नहीं घटा। कहा जाता है कि कुछ लोगों ने सामुहिक रूप से फांसी भी दी गई क्योंकि ह्यूरोज को फांसी पर लटके क्रांतिकारियों के शव देखने में मजा आता था। इन सैनिको के शवों का सीहोर की जनता ने फिर यहीं सीवन नदी के किनारे अलग-अलग स्थान पर अंतिम संस्कार करते हुए उनकी समाधियॉ बना दी। जो आज भी स्थित हैं। हम साधुवाद देते हैं पर्यटन निगम को जिसने जिला प्रशासन की पहल पर शहीद स्मारक का निर्माण करवाया।  आज आवश्यकता है उक्त प्रांगण में जिले के वीरे स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित एक संग्रहालय का निर्माण हो एवं स्मारक व उसके आसपास वीर शहीदों की अनुकृतियॉ बनाई जाये जिससे नई पीढ़ी इन शहीदों को जानकर गर्व करें और देश के प्रति समर्पण भाव बने।  जिला प्रशासन सीहोर की पुरातत्व शाखा ने भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। जबकि पुरातत्व का एक संग्रहालय यहॉ बना हुआ है। विभाग बकायदा इसकी देखभाल करता है। स्थानीय पत्रकार, बुद्धीजीवि वर्ग, स्वतंत्रता संग्राम सैनानी अपने स्तर पर प्रशासन के साथ हर वर्ष 14 जनवरी को एकत्र होकर सैकड़ाखेड़ी के सीवन तट पर स्थापित समाधी पर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजली अर्पित करते हैं।

ऋषियों और सूर्य चंद्रमा वायू अग्रिदेव के हम है ऋणी- शास्त्री  
मुरली सीताराम मंदिर ने निकाली गई भव्य कलश यात्रा  भोपाल नाके पर श्रीमद भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ शुरू 
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सीहोर। भोपाल नाका श्रीमदभागवत कथा आयोजन समिति के तत्वधान में रविवार से मूरली रोड स्थित प्रांगण में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमदभागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ कर शुभारंभ किया गया। मुरली नगर स्थित सीताराम मंदिर से विधिवत यजमनों के द्वारा भगवान की पूजा अर्चना कर बेडबाजों ढोल ढमाकों के साथ कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल महिलाएं मंदिरश्री से कथा आयोजन स्थल पर पहुंची। व्यासगादी के समक्ष कलश पात्रों को रखा गया।  श्रीमद भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ के के प्रथम दिवस रविवार को कथा वाचक मनोज कृष्णचंद्र शास्त्री ने भागवत का महत्व बताते हुए कहा कि ऋषियों और सूर्य चंद्रमा वायू अग्रिदेव मातापिता का ऋणी हम कभी नहीं उतार सकते है यह देवता है केवल देते है संसार के लोग देते है तो लेते भी है लेकिन देवता कुछ नहीं लेते है हम इनके सदेव ऋणी ही रहेंगे। देवताओं का ऋण दान पुण्य और भगवान के भजन कथा सुनने से हीं कम हो सकता है सनातन धर्म हीं व्यक्ति को जीने का धर्ममय ज्ञान देता है उन्होने भागवत कथा के श£ोक और राजा गोरधन कथा सुखदेव कथा का सार बताया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण भजनों पर भक्तों ने नृत्य भगवान के प्रति आस्था प्रकट की। आयोजन समिति के विजेंद्र परमार ने बताया की श्रीमद भागवत कथा दोपहर एक से शाम पांच बजे तक आयोजित की जा रहीं है। प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुगणों श्रीमद भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ में पहुंचकर धर्म का लाभ अर्जित किया। 

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