पटना 6 फरवरी 2020. भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने विगत 5 फरवरी को सहरसा जाने के क्रम में जन-गण-मन यात्रा के दौरान सीपीआई नेता कन्हैया कुमार व यात्रा में शामिल अन्य नेताओं-सामाजिक कार्यकर्ताओं के काफिले पर भाजपा-आरएसएस संरक्षित गुंडों द्वारा किए गए पथराव की घटना की तीखी निंदा की है, जिसमें कई वाहनों के शीशे टूट गए थे. इसके पहले सारण में भी काफिले पर पथराव किया गया था. पथराव में कई लोग बुरी तरह जख्मी भी हुए. सबसे चिंताजनक यह है कि पूरी घटना स्थानीय थाना से महज 100 मीटर की दूरी पर घटित हुआ. माले राज्य सचिव ने बिहार सरकार को आगाह किया है कि लोकतंत्र का गला घोंटना बंद करे. इन घटनाओं के पीछे कोई और नहीं बल्कि भाजपा व आरएसएस के ही लोग हैं, जो पूरे देश की तर्ज पर बिहार में भी विभाजन-नफरत की राजनीति का जहर फैला रहे हैं. काफिले पर पथराव करने वाले गुंडों की शिनाख्त कर तत्काल गिरफ्तारी और जन-गण-मन यात्रा की सुरक्षा की गारंटी की जाए.
चंपारण में भूस्वामियों के पक्ष में लाठी लेकर खड़ी है पुलिस, माले नेता की पिटाई निंदनीय
माले राज्य सचिव कुणाल और चंपारण के लोकप्रिय माले नेता वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा है कि एक तरफ सरकार गरीबों को नागरिकता से बेदखल कर रही है तो दूसरी ओर जमीन से बेदखली का कार्यक्रम भी अनवरत जारी है. चंपारण के इलाके में प्रशासन पूरी तरह से भूस्वामियों की लठैती कर रहा है. वहां के डीएम प्रशासन का गैरकानूनी इस्तेमाल करके गरीबों को सीलिंग की जमीन से बेदखल करने का अभियान चलाये हुए हैं और लहलहाती फसलों को काट लेने में भी कोई संकोच नहीं कर रहे हैं. माले नेता वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि पश्चिम चंपारण के मैनाटांड़ के बेलवा टोला में सीलिंग से फाजिल जमीन पर गरीबों द्वारा लगाई गई फसल को प्रशासन 6 थानों की पुलिस और गुंडों के साथ कटवाने पहुंच गया तथा जमीन जोतने लगा. जब भाकपा-माले के अंचल सचिव अच्छेलाल राम, बन्हू राम और अन्य नेताओं ने इसका विरोध किया और फसल लगी जमीन जोतवाने संबंधी कागज दिखाने की मांग की तो उनकी बर्बरता से पिटाई कर दी गई. माले नेता ने कहा कि यह कार्रवाई जिला के डीएम व मंत्री खुर्शीद आलम के दबाव में किया गया है. सरकार इसपर तत्काल संज्ञान ले और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि दरअसल 2015 के सीलिंग गजट में मैनाटांड़ की जिस जमीन पर गरीबों को पर्चा देने का कानून है, उस जमीन को गैर कानूनी तरीके से भूस्वामियों ने रजिस्ट्री करवा ली है. डीएम व मंत्री गरीबों के अधिकार की रक्षा करने की बजाए भूस्वामियों के पक्ष में रजिस्ट्री को जायज ठहरा रहे हैं. जबकि कानून के मुताबिक सीलिंग की जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले व करने वाले को जेल में होना चाहिए. इस संदर्भ में एक बार पहले डीजीपी से भी बात की गई थी और उनके हस्तक्षेप से फसल बरामद की गई थी. भाकपा-माले मांग करती है कि नीतीश सरकार पश्चिम चंपारण के अपने प्रशासन व मंत्री पर लगाम लगाए तथा गरीबों को बेदखल करना बंद करे. सरकार व प्रशासन का काम गरीबों के अधिकारों की रक्षा करना है न कि भूस्वामियों की लठैती करना. इस सवाल पर 7 फरवरी को पूरे जिला में प्रतिवाद किया जाएगा.

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