25 फरवरी का विधानसभा मार्च सीएए - एनआरसी - एनपीआर विरोधी आंदोलन में साबित होगा महत्वपूर्ण पड़ाव - Live Aaryaavart

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रविवार, 23 फ़रवरी 2020

25 फरवरी का विधानसभा मार्च सीएए - एनआरसी - एनपीआर विरोधी आंदोलन में साबित होगा महत्वपूर्ण पड़ाव

गांधी मैदान से  प्रशासन ने मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी,  अब गर्दनीबाग धरना स्थल पर होगा प्रदर्शनराजद, कांग्रेस और हम (सेकुलर )को भेजा आमंत्रण, विधानसभा में संयुक्त कार्य स्थगन लाने का प्रस्तावजल-जीवन-हरियाली योजना के नाम पर दलित-गरीबों की बेदखली और प्रोन्नति में आरक्षण पर रोक के सवाल को भी उठाया जाएगापूरे बिहार से हजारों दलित-गरीबों और अकलियत समुदाय के लोगों की होगी भागीदारी
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पटना 23 फरवरी, विगत 2 महीनों से पूरे देश की तरह बिहार में भी सीएए-एनआरसी और एनपीआरसी खिलाफ जबरदस्त आंदोलन चल रहा है. आम लोग विगत 1 महीने से जगह-जगह अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर हैं. हमारी पार्टी भाकपा-माले व इंसाफ मंच भी इस संघर्ष के अगली कतार में हैं. हमने 31 जनवरी को पटना में आयोजित राज्यस्तरीय जन एकता सम्मेलन से 25 फरवरी को एनपीआर रोकने के सवाल पर विधानसभा मार्च का आह्वान किया था. एक महीने तक बिहार के गांव-गांव में इसकी तैयारी की गई. इस बीच, केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी विधानसभाओं से इन काले कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया है, लेकिन बिहार में नीतीश जी ने एनपीआर लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. सभी को पता है कि सीएए के सवाल पर नीतीश जी ने संसद में भाजपा का साथ दिया था. एनआरसी पर उन्होंने कहा कि इसकी जरूरत नहीं लेकिन हर कोई जानता है कि एनपीआर कुछ और नहीं बल्कि एनआरसी की ही पहली सीढ़ी है. अब 25 फरवरी का समय नजदीक आ गया है. विधानसभा मार्च के कार्यक्रम में बिहार के हजारों दलित - गरीब और अकलियत समुदाय के लोगों की भागीदारी हो रही है. विधान सभा के सामने प्रदर्शन करके बिहार सरकार से मांग करेंगे कि एनपीआर पर तत्काल रोक लगाए और सीएए -एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करे. इस प्रकार, यह विधानसभा मार्च सीएए-एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जारी आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने वाला है. 25 फरवरी को ही विधानसभा के अंदर भी सरकार को इस सवाल पर घेरने की योजना बनाई गई है. हमने राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और हम (सेकुलर) को आमंत्रण भेज कर अपील की है कि उस दिन विपक्ष का संयुक्त कार्यस्थगन लाया जाए और एनपीआर के खिलाफ बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करने का दबाव सरकार पर बनाया जाए. हमने इन पार्टी के नेताओं को विधानसभा मार्च के बाद आयोजित सभा को संबोधित करने के लिए भी आमंत्रित किया है. विगत 22 फरवरी को हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता कॉमरेड केडी यादव और कॉमरेड राजाराम ने इन दलों के नेताओं से मुलाकात की. पटना में अनुपस्थिति की वजह से केवल राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष श्री जगदानंद सिंह से ही मुलाकात हो सकी. कांग्रेस के प्रदेश अध्य्ाक्ष श्री मदन मोहन झा और हम-सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीतन राम मांझी से टेलिफोनिक वार्ता हुई. विपक्ष के नेताओं ने इस विषय पर अपनी सहमति प्रकट की है. उम्मीद है कि विधानसभा के अंदर भी हम एकताबद्ध कार्रवाई के द्वारा सरकार पर दबाव बनाने में सफल होंगे. यह मार्च पहले गांधी मैदान से निकलने वाला था, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति प्रदान नहीं की. प्रशासन की ओर से हमें बताया गया यह पूरा इलाका प्रतिबंधित क्षेत्र है. दरअसल, यह और कुछ नहीं कोर्ट का हवाला देकर विरोध आंदोलनों को दबाने की ही साजिश है. इसके लिए हमने गांधी मैदान की बुकिंग भी कर ली थी. प्रशासन के इस नकारात्मक रवैये के बाद हमने अपना कार्यक्रम स्थल बदल दिया है. अब यह गर्दनीबाग धरना स्थल पर होगा. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के बतौर हमारे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य भाग लेंगे.   25 फरवरी के कार्यक्रम की तैयारी में लगभग 500 से ज्यादा सभाओं का आयोजन हुआ और हजारों की संख्या में ग्राम बैठकें हुई है. लोगों को समझाया गया है कि एनपीआर दरअसल और कुछ नहीं बल्कि एनआरसी की ही पहली सीढ़ी है और इस मामले में नीतीश कुमार बिहार की जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं. इसलिए अगर - मगर की भाषा बोलने की बजाय वे साफ-साफ एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित करें. यही बिहार की जनता की मांग है.  हमने असम में एनआरसी का अनुभव देखा. बिहार के 56000 से अधिक प्रवासी मजदूरों  की नागरिकता वहां खत्म होने के कगार पर है. हमने बिहार सरकार से लगातार मांग की है कि प्रवासी मजदूरों की नागरिकता की गारंटी की जाए, उनके जरूरी कागजात  असम सरकार को भेजे जाएं, लेकिन सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है. इससे साफ होता है कि बिहार की सरकार अपने नागरिकों को लेकर कहीं से चिंतित नहीं है. इस प्रमुख मांग के अलावा जल-जीवन - हरियाली योजना के नाम पर 50 लाख से ज्यादा दलित गरीबों को उजाड़ने की की नोटिस के खिलाफ भी यह मार्च आयोजित है . इस योजना के नाम पर पूरे बिहार में गरीबों के ऊपर नए सिरे से हमले किए जा रहे हैं . हर कोई जानता है कि नदी, चैर, पोखर आदि जमीनों पर दबंगों का कब्जा है. सरकार उनके खिलाफ कुछ नहीं कर रही, लेकिन गरीबों को निशाना जरूर बना रही है. एक तो पहले से गरीबों की बड़ी आबादी के पास आवास की समस्या मौजूद है. उसे हल करने के बजाय सरकार उल्टे उन्हें उजाड़ रही है. इसपर पर तत्काल रोक लगानी होगी. प्रदर्शन की तीसरी प्रमुख मांग में प्रोन्नति में आरक्षण की गारंटी से जुड़ा हुआ है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि प्रोन्नति में आरक्षण कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है बल्कि वह राज्य सरकारों के विवेकाधीन है. दरअसल भाजपा और संघ परिवार के द्वारा दलित गरीबों के आरक्षण खत्म करने की जो एक सुनियोजित साजिश चल रही है यह उसी का एक उदाहरण है. दलितों के न केवल आरक्षण पर हमला किया जा रहा है बल्कि हमने बिहार में देखा नीतीश जी की सरकार ने 30,000 से ज्यादा सफाई कर्मियों को नौकरी से हटा देने का फरमान जारी कर दिया. यह सभी सफाई कर्मचारी दलित समुदाय से आते हैं. इस प्रकार ऊपर से लेकर नीचे तक दलित - गरीबों पर ही हमले आयोजित किए जा रहे हैं. शिक्षा के क्षेत्र में भी दलितों के अधिकारों में और आरक्षण में लगातार कटौती की जा रही है. हम मांग करते हैं कि प्रोन्नति में आरक्षण के सवाल पर सरकार को तत्काल अध्यादेश लाना चाहिए.

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