शिक्षित नारी समृद्ध भारत की कुंजी : निशंक - Live Aaryaavart

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शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

शिक्षित नारी समृद्ध भारत की कुंजी : निशंक

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नयी दिल्ली 29 फरवरी, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि महिला शिक्षा प्रत्येक परिवार, समाज, राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए न केवल महत्वपूर्ण है बल्कि परम आवश्यक है इसलिए शिक्षित नारी ही समृद्ध भारत की कुंजी है। नई शिक्षा नीति में पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि बलिकाएं कहीं भी पीछे नहीं रहें। श्री निशंक ने शनिवार को ‘यूनीवार्ता’ से कहा कि महिला शिक्षा एक ऐसा सक्षम शस्त्र है जो दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है। नए भारत के निर्माण का नया अध्याय लिखने के लिए यह आवश्यक है कि हर बेटी पढ़े और इस कुशलता से पढ़े कि वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। बेटियों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी सफल बनाने की मुहिम में सरकार पूरी तत्परता से उनके साथ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि नव भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में महिला शिक्षा एक सक्षम उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से विश्व के सबस बड़े शिक्षा तंत्रों में से एक का परिवारिक सदस्य होने के नाते सम्पूर्ण देश की शिक्षण संस्थाओं के दीक्षांत समारोहों में जाने का अवसर मिलता रहता है। इस दौरान एक बात स्पष्ट रूप से सामने आया है कि हर क्षेत्र में हमारी बेटियां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। बात डिग्रियों की हो, या फिर स्वर्ण पदक विजेताओं का विषय हो, यह औसतन साठ प्रतिशत से अधिक हमारी बेटियों का होता है। कहीं -कहीं तो यह 70-75 प्रतिशत से अधिक हो जाता है। विश्व के विकसित राष्ट्रों ने अपना गौरवमयी स्थान अपने देश की महिलाओं को समुचित आदर प्रदान करके ही हासिल किया है। मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि संपूर्ण विश्‍व आठ मार्च को अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस मनाने जा रहा है। राष्ट्र के निर्माण और विकास में स्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए स्वामी विवेकानंद ने नारी को पुरुष के समकक्ष बताते हुए कहा था, “जिस देश में नारी का सम्मान नहीं होता, वह देश कभी भी उन्नति नहीं कर सकता।” हमारे देश में वेदान्त ने स्पष्ट घोषणा की है कि सभी प्राणियों में एक समान आत्मा विराजमान है। इस नाते स्त्रियों और पुरुषों में कोई भी भेद संभव नहीं है। उनका सदैव से यह मानना रहा है कि पुरुष का सम्पूर्ण जीवन नारी पर आधारित रहता है। कोई भी पुरुष अगर सफल है, तो उस सफलता का आधार नारी ही है। उन्होंने कहा कि जब कोई शिशु इस संसार में आता है, तो किशोरावस्था तक प्रथम गुरू के रूप में माँ से उसका सबसे अधिक संसर्ग होता है। यही कारण है कि स्त्री शिक्षा अत्यन्त महत्वपूर्ण है। समाज को संस्कारवान बनाने के लिए महिला शिक्षा उपयोगी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य है। श्री निशंक ने कहा कि किसी भी सभ्य, विकसित और श्रेष्ठ समाज का निर्माण उस देश के शिक्षित नागरिकों द्वारा किया जाता है और नारी इस कड़ी का केवल महत्वपूर्ण आधार ही नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त है। जिस तरह एक-एक कोशिका मिलकर जीवन का निर्माण करती है, वैसे ही प्रत्येक परिवार की छोटी-छोटी इकाइयां मिलकर समाज का निर्माण करती हैं। सभी इकाइयों की ऊर्जा का स्रोत और सम्पूर्ण परिवार की केंद्र बिंदु नारी होती है। यदि नारी शिक्षित होती है, तो दो परिवार शिक्षित होते हैं और जब परिवार शिक्षित होता है, तो पूरा राष्ट्र शिक्षित होता है। यही कारण था कि महान विचारक रूसो कहते थे,“आप मुझे सौ आदर्श माताएं दें, तो मैं आपको एक आदर्श राष्ट्र दूंगा।” केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अजर -अमर भारतीय संस्कृति से हमें नारी को अत्यंत सम्मान देने की प्रेरणा मिलती है। हमारी संस्कृति हमें सिखाती है, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता’ अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। श्री निशंक ने कहा कि बच्चे सबसे अधिक माताओं के सम्पर्क में रहा करते हैं। माताओं के संस्कारों, व्यवहारों और शिक्षा का प्रभाव बच्चों के मन मस्तिष्क पर सबसे अधिक पड़ता है। शिक्षित माता ही बच्चों के कोमल और उर्वर मन मस्तिष्क में उन समस्त संस्कारों के बीज बो सकती है, जो समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए परम आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षित और विकसित मन मस्तिष्क वाली नारी अपनी परिस्थिति और परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता आदि का ध्यान रखकर घर की उचित व्यवस्था एवं संचालन कर सकती है। जीवन रूपी गाड़ी चलाने के लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है । सशक्त भागीदारी के लिए महिला शिक्षा की अत्यन्त आवश्यकता है। यदि नारी अशिक्षित हो, तो वह अपने जीवन को विश्व की गति के अनुकूल बनाने में सदा असमर्थ रहेगी। यदि वह शिक्षित हो जाए, तो न केवल उसका पारिवारिक जीवन स्वर्गमय होगा, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति के युग का सूत्रपात भी हो सकेगा। भारतीय समाज में शिक्षित माता, गुरु से भी बढ़ कर मानी जाती है, क्योंकि वह अपने बच्चों को महान से महान बना सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में नारी और पुरुष के बीच जब-जब फ़र्क आया, तब-तब उस फ़र्क की बड़ी कीमत हमें चुकानी पड़ी । वास्तव में गंभीरता के साथ देखा जाए, तो यही ज्ञात होता है कि भारत की समस्याओं का एक प्रमुख कारण नारियों की अशिक्षा रहा है। इसका फल यह हुआ कि जो राष्ट्र विश्व गुरु था, वही आज अपना पुराना वैभव , गौरव पाने हेतु संघर्षरत है। सरकार बेटियों के कल्याण के लिए कृत संकल्‍प है। महिला सशक्तीकरण के लिए कई सारी योजनाएं चलायी गई हैं। पंचायती राज योजनाओं में महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने महिला सशक्तीकरण एवं विकास की एक नई इबारत लिखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा,“महिला शिक्षा हमारे राष्ट्र की सफलता एवं विकास की सीढ़ी है।”  

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