स्टेट बार काउंसिल ने सीएम और राज्यपाल को लिखा पत्र, युवा अधिवक्ताओं को भत्ता देने का किया अनुरोध - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 26 मार्च 2020

स्टेट बार काउंसिल ने सीएम और राज्यपाल को लिखा पत्र, युवा अधिवक्ताओं को भत्ता देने का किया अनुरोध

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सभी युवाओं और आर्थिक रुप से कमजोर अधिवक्ताओं को भत्ता देने का आग्रह किया है.
bar-councel-demand-for-lawyyer
जमशेदपुर (आर्यावर्त संवाददाता) : झारखंड स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ल ने कोरोना को लेकर एक अहम फैसला लिया है. उन्होंने राज्य के सभी जिला और अनुमंडल के युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं को 20-20 हजार रुपये का जीवन यापन भत्ता देने का आग्रह झारखंड सरकार से किया है. राजेश कुमार शुक्ला ने झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर उनसे आर्थिक रूप से पिछड़े अधिवक्ताओं के बारे में चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि सभी स्तर के न्यायालय बंद पड़े हैं, अधिकांश अधिवक्ता दैनिक आय पर आधारित है, न्यायालय के लंबे समय तक बंद होने से उनके सामने आर्थिक तंगी आएगी, ऐसे में राज्य सरकार 20-20 हजार रुपए युवा और आर्थिक रूप से पिछड़े अधिवक्ता को जीवन यापन भत्ता के रूप में वितरित कराएं, जिससे उनके सामने जीवन यापन की कठिनाई न पैदा हो. राजेश कुमार शुक्ला ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में राज्य में लागू किए गए लॉकडाउन के निर्णय की सराहना की है. उन्होंने सीएम और राज्यपाल को भेजे पत्र में लिखा है कि अधिवक्ताओं का गौरवशाली इतिहास रहा है, स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अबतक के सभी चुनौतियों के समाधान में उनकी निर्णायक भूमिका रही है, इस वैश्विक महामारी में विदेश के साथ पूरे झारखंड के अधिवक्ता मजबूती के साथ अपने सामाजिक दायित्व का भी निर्वहन कर रहे हैं, ऐसे में राज्य सरकार का भी यह दायित्व है कि युवा और आर्थिक रूप से पिछड़े अधिवक्ता को गुजारा भत्ता प्रदान करें, साथ ही सय स्ते दर पर खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराएं.

कोई टिप्पणी नहीं: