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सोमवार, 2 मार्च 2020

परीक्षा की कॉपी जाँच के लिये मुर्दे हुए नियुक्त सेन्टर पर नहीं पहुँचने पर हो गए सस्पेंड

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अरुण शाण्डिल्य (बेगूसराय) बिहार के शिक्षा बोर्ड पर तरस आना कोई बड़ी बात नहीं होगी।जी हाँ अब बिहार का शिक्षा विभाग जिन्दों के बजाय मुर्दों से कॉपी जाँच करने के लिये वो भी एक नहीं दो-दो मुर्दों को नियुक्त कर दिया।अब जबकि मुर्दे श्मशान से कॉपी जाँच करने सेंटर पर नहीं पहुँचे तो विभाग ने दोनों को सस्पेंड भी कर दिया।

बेगूसराय और बांका डीईओ ने जारी किया आदेश 
यह कारनामा बिहार के बेगूसराय और बांका जिले से जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किया है।बेगूसराय में शिक्षक रंजीत कुमार की दो साल पहले मृत्यु हो गई थी,फिर भी उनको परीक्षक बना दिया गया।बांका में भी तीन साल पहले जिस शिक्षक हैदर की मौत हो गई थी उसको भी परीक्षक बना दिया गया है,दोनों में से किसी का भी बिना जांच पड़ताल किये ही कॉपी जाँच के लिये नियुक्त कर दिया गया।भला कभी मुर्दे भी श्मशान से उठकर आनेवाले हैं क्या? 

विडम्बना यह है कि जिन्दा शिक्षकों से अधिक मुर्दों पर भरोसा
बिहार में इंटर की कॉपी जांच करने वाले शिक्षक भी हड़ताल पर चले गए है।जिससे कॉपी जांच कराने में शिक्षा विभाग को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।कॉपी जांच का विरोध करने वाले बिहार के करीब 1200 शिक्षकों पर विभाग अब तक कार्रवाई कर चुकी है।अब शिक्षकों से अधिक अधिकारियों को मुर्दों पर भरोसा हो गया है।कॉपी की जांच के लिए मृत शिक्षकों के बुलाया जा रहा है और जब मृत शिक्षक शमशान घाट से कॉपी जांच के लिए सेन्टर पर नहीं पहुंचे तो उनको सस्पेंड भी कर दिया गया है।बिहार में शिक्षा विभाग पहले भी अपने कारनामों को लेकर देश ही नहीं विदेश में भी अपना परचम लहरा रहा है।धन्य है बिहार का शिक्षा विभाग।जिन्दों की कदर नहीं मुर्दों के लिए नियुक्तियाँ ही नियुक्तियाँ।

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