आज पोप फ्रांसिस का पोप बनने की सातवीं वर्षगांठ हैं - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 13 मार्च 2020

आज पोप फ्रांसिस का पोप बनने की सातवीं वर्षगांठ हैं

पहले लातिन अमरीकी पोप, नाम है पोप फ्रांसिस
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अर्जेंटीना. पोप फ्रांसिस प्रथम पहले पोप हैं जिनका संबंध यूरोप के बाहर से है.अर्जेंटीना के कार्डिनल खोर्खे मारियो बैरगोगलियो को नया पोप चुना गया है. वो ब्यूनस आयर्स के आर्चबिशप हैं.आज भक्तगण पोप फ्रांसिस का पोप बनने की सातवीं वर्षगांठ मना रहे हैं. बताया जाता है कि बेनेडिक्ट सोलहवें ने ऐसे समय में पोप का पद छोड़ा था,जब कैथोलिक चर्च बाल यौन शोषण और वेटिकन में भ्रष्टाचार के कथित आरोपों से जूझ रहा था. बेनेडिक्ट सोलहवें ने बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए पोप का पद छोड़ा था जिसके बाद नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई थी.

अर्जेंटीना में जश्न
आज विश्व के लगभग सवा अरब कैथोलिक ईसाइयों का नेतृत्व करने वाले पोप फ्रांसिस के पोप बनने की 9 वीं वर्षगांठ है.सारे देश में 13.03.2022 को खुशी व्याप्त हैै.खासकर अर्जेंटीना के लोग काफी खुश हैं. आखिर हो क्यों न पोप फ्रांसिस प्रथम पहले पोप हैं जिनका संबंध यूरोप के बाहर से है. बता दें कि ब्यूनस आयर्स के आर्चबिशप हैं और अर्जेंटीना के कार्डिनल खोर्खे मारियो बैरगोगलियो को  115 कार्डिनल ने नए पोप के नाम पर मतदान किए थे और स्पष्ट नतीजे से पहले चार मतदान सत्रों में कोई नतीजा नहीं निकला था.किसी भी उम्मीदवार के पोप चुने जाने के लिए जरूरी है कि उसे दो तिहाई कार्डिनलों का समर्थन प्राप्त हो.चिमनी से निकला सफेद धुआं ने सकेंत दिया था कि अर्जेंटीना के कार्डिनल खोर्खे मारियो बैरगोगलियो को नया पोप चुना गया है. तब से उन्हें पोप फ्रांसिस प्रथम के नाम से जाना जाने लगा.इस तरह पोप  फ्रांसिस 266वें पोप हैं. जैसे ही सफेद धुआं से सकेंत मिला वैसे ही अर्जेंटीना देश से प्रथम पोप फ्रांसिस बनने में खुशियां मनाई गयी.वैसे ही खुशियां आज  भी है.वहीं कुछ लोग इससे हैरान भी थे.ब्यूनस आयर्स कैथेड्रल के बाहर प्लाजा जे मायो पर जमा लोगों ने जब नया पोप चुने जाने के बारे में सुना तो उनमें खुशी की लहर दौड़ गई. उन्होंने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया. इसके साथ ही कैथेड्रल की घंटियां जोर जोर से बजने लगीं.फिलीपींस से वेटिकन पहुंचे एक व्यक्ति ने कहा, “मेरे लिए बता पाना बहुत मुश्किल है कि मैं कितना खुश हूं.”बता दें कि वेटिकन में कार्डिनलों का अहम सम्मेलन शुरू होने से ऐसा कोई स्पष्ट नाम नहीं था जिसे बेनेडिक्ट का उत्तराधिकारी माना जा.

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