चाईबासा : कोविड-19 डेडीकेटेड अस्पताल में पूर्ण रूपेण मॉक ड्रिल, बिन बताए किया गया अभ्यास - Live Aaryaavart

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रविवार, 12 अप्रैल 2020

चाईबासा : कोविड-19 डेडीकेटेड अस्पताल में पूर्ण रूपेण मॉक ड्रिल, बिन बताए किया गया अभ्यास

चाईबासा के चक्रधरपुर कोविड-19 डेडीकेटेड अस्पताल में पूर्ण रूपेण मॉक ड्रिल किया गया. 3 किमी के रेडियस में कर्फ्यू और कंटेनमेंट स्ट्रेटजी से लेकर सभी बिंदुओं पर त्वरित सतर्कता दिखी. 
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चाईबासा (आर्यावर्त संवाददाता)  चक्रधरपुर कोविड-19 डेडीकेटेड (समर्पित) अस्पताल में एक पूर्णरूपेण मॉक ड्रिल आयोजित किया गया. मॉक ड्रिल के पहले किसी भी पदाधिकारी, चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि कोविड-19 स्पेशलिटी अस्पताल चक्रधरपुर में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया है. उपायुक्त और अस्पताल के वरीय प्रभारी-सह-उप विकास आयुक्त ने पदाधिकारियों व चिकित्सा कर्मियों की पूरी टीम के प्रदर्शन को संतुष्टिप्रद बताया. मॉक ड्रिल के उपरांत उपायुक्त अरवा राजकमल ने बताया कि जब मॉक ड्रिल शुरू हुआ था उसके करीब 1 घंटे पहले सभी संबद्ध पदाधिकारियों को यह बताया गया था कि चाईबासा में कोरोना संक्रमण से प्रभावित मरीज का केस आ चुका है. किसी को भी पता नहीं था कि यह मॉक ड्रिल है. जिले में कोरोना संक्रमण का मामला संज्ञान में आने पर संबंधित चिकित्सकों और पदाधिकारियों की क्या त्वरित प्रतिक्रिया होनी चाहिए इससे आंकलन किया गया. उपायुक्त ने कहा कि चाहे सिविल पदाधिकारी हो, पुलिस पदाधिकारी, चिकित्सक या फिर चिकित्सा कर्मी हो सभी को यह बताया गया कि जिले में कोरोना संक्रमण का पॉजिटिव केस आ चुका है. मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना है इसलिए यथाशीघ्र सभी को आने का निर्देश दिया गया. त्वरित रूप से क्या उपागम अपनाए जाने चाहिए इसका आंकलन करना उद्देश्य था. उपायुक्त ने कहा कि सभी पदाधिकारियों चिकित्सा कर्मी और चिकित्सकों में सतर्कता देखने को मिली. मॉक ड्रिल का उद्देश्य ही था कि किसी स्तर पर यदि ससमय कर्तव्य के अनुपालन में किसी के तरफ से देरी की जाती है तो ऐसे लोगों को भी चिन्हित किया जा सके. वास्तव में यदि ऐसा केस आता है तो उस समय प्रशासन की पूरी टीम पूर्णतया तैयार रहे, यही मुख्य उद्देश्य है. आधा घंटे के भीतर सभी प्रतिनियुक्त चिकित्सक (डॉक्टर्स ऑन ड्यूटी) पीपीई किट के साथ मरीज को भर्ती कराने के लिए अपने ड्यूटी पर तैनात हो गए. पुलिस प्रशासन के पदाधिकारी और कर्मी भी पूरी तरह से मुस्तैद रहे. प्रशासनिक रूप से इस बात की तैयारी की गई कि कहीं से कोई कोरोना संक्रमण का पॉजिटिव मामला आता है तो उसके आसपास के 3 किलोमीटर के रेडियस में कर्फ्यू लगाया जाता है. संक्रमण के फैलाव को रोकने और हालात पर काबू पाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार करना (कंटेनमेंट स्ट्रेटजी) भी मॉक ड्रिल में शामिल रहा. सर्वे टीम्स को यथाशीघ्र वैसे स्थानों पर प्रतिनियुक्त करने से लेकर सभी बिंदुओं पर त्वरित सतर्कता देखने को मिली. उपायुक्त अरवा राजकमल ने कहा कि आने वाले दिनों में यदि कोरोना संक्रमण का कोई मामला संज्ञान में आता है तो सिविल, पुलिस प्रशासन और चिकित्सा कर्मियों की पूरी टीम शत-प्रतिशत कुशलता, दक्षता और कर्तव्य परायणता के साथ स्थिति का सामना करेगी. उपायुक्त ने जानकारी दी कि इससे पूर्व भी एक ड्राई रन सदर अस्पताल में किया गया है. कोविड-19 से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से समर्पित अस्पताल साउथ ईस्टर्न रेलवे अस्पताल चक्रधरपुर में इस तरह का यह पहला मॉक ड्रिल था. मॉक ड्रिल पूर्णत: वास्तविकता के सदृश था. पदाधिकारियों और चिकित्सकों के द्वारा काफी बेहतर प्रदर्शन किया गया. दूसरे अन्य जो पदाधिकारी हैं जो इसमें काम करने वाले हैं उनको भी एक जानकारी प्राप्त हुई कि यदि कोरोना संक्रमण का कोई मरीज आता है तो उसकी किस तरह से देख-रेख करनी है, क्या करना है और क्या नहीं करना है, क्या सावधानियां अपनानी हैं. उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिला प्रशासन की पूरी टीम शत-प्रतिशत तैयारी के साथ हर समय किसी भी परिस्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहें.

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