बिहार : बेगूसराय में घटित संतोष कुमार शर्मा हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच कराओ - माले - Live Aaryaavart

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रविवार, 19 अप्रैल 2020

बिहार : बेगूसराय में घटित संतोष कुमार शर्मा हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच कराओ - माले

लाॅकडाउन के नाम पर प्रशासन विरोध की आवाज को दबा रहा है.
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पटना 19 अप्रैल, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने आज प्रेस बयान जारी करके बेगूसराय में घटित संतोष कुमार शर्मा हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. कहा कि प्रारंभिक सूचना के मुताबिक यह हत्या सामंती-अपराधियों के दबाव में नवाकोठी थाना द्वारा किया गया प्रतीत होता है. इसमें जिले की बड़ी राजनीतिक हस्तियों की भी संलितप्तता बताई जा रही है. इसलिए, इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. आगे कहा कि हमारी पार्टी के जिला सचिव दिवाकर कुमार ने बताया कि विगत 23 मार्च को वैश्य जाति से आने वाले विक्रम पोद्दार की हत्या वीरपुर थाना के हाजत में कर दी गई थी. मामला प्रेम प्रसंग का था, जिसमें लड़की उच्च जाति की थी. लड़की के पिता ने विक्रम पर अपहरण का मुकदमा दायर किया था और इसी आधार पर वीरपुर प्रभारी ने उसे तीन दिन पुलिस कस्टडी में रखा और फिर थाने में ही उनकी फांसी लगाने की खबर आई. जाहिर सी बात है कि हाजत में उनकी हत्या की गई होगी. संतोष कुमार शर्मा इस हत्याकांड का लगातार विरोध कर रहे थे. इससे बौखलाई सामंती ताकतों के इशारे पर 6 अप्रैल की शाम में नवाकोठी थाना प्रभारी उन्हें लाॅकडाउन तोड़ने के जुर्म में थाना लेकर गई. हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहलकदमी पर उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन फिर उन्हें अन्यत्र ले जाकर बुरी तरह पिटाई की गई, जिसके कारण उनकी तबीयत खराब हो गइ और 17 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई. माले राज्य सचिव ने कहा कि बेगूसराय में दलितों-पिछड़ों पर सामंती अपराधियों व पुलिस प्रशासन का यह हमला नया नहीं है. इसके पहले हमारी पार्टी के भी कई नेताओं की हत्या की गई है. गिरिराज सिंह के सांसद बनने के बाद वहां इन ताकतों का मनोबल और सर चढ़कर बोल रहा है. इसलिए हम मांग करते हैं कि संतोष व विक्रम हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. दोषी पुलिस अधिकारियों पर अविलंब कार्रवाई की जाए तथा मृतक परिजन को मुआवजे की उचित राशि प्रदान की जाए.

लाॅकडाउन के नाम पर राजनीतिक विरोध की आवाज कुचलना बंद करे प्रशासन 
माले राज्य सचिव ने कहा कि हमारी पार्टी, ऐक्टू व खेग्रामस प्रवासी मजदूरों की सकुशल घर वापसी को लेकर कोरोना की रोकथाम के सभी उपायों और देह की दूरी के नियमों का पालन करते हुुए भूख हड़ताल का आयोजन कर रही है, लेकिन प्रशासन को इससे भी परेशानी हो रही है. लाॅकडाउन में भीड़ नहीं लगाने का नियम है, यह नहीं कि हम अपनी कोई जायज मांग भी नहीं कर सकते. प्रशासन अपने इस रवैये से बाज आए और लोकतंत्र का गला घोंटना बंद करे.

पटना जिले के कई स्थानों पर चले रहे भूख हड़ताल को आज प्रशासन की ओर से धमकी दी गई.
1. पुनपुन के चकिया कृषि भवन में बेहरावां पंचायत के मुखिया जयप्रकाश पासवान, प्रखंड सचिव राकेश मांझी, बेहरवां सरपंच विजय मांझी के द्वारा भूख हड़ताल जारी है. आज वहां सीओ व थाना प्रभारी पहुंचे और जाकर कहा कि लाॅकडाउन में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि पर रोक है, इसलिए इसे अविलंब खत्म करें. नेताओं ने अनशन तो खत्म कर दिया लेकिन प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि यह उनकी तानाशाही है. साथ ही, अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा और उसपर कार्रवाई की मांग की.
2. पुनपुन के ही लखना में मुखिया मदन पासवान एवं अन्य लोग भूख हड़ताल कर रहे थे. थाना प्रभारी वहां भी पहुंचे और भूख हड़ताल खत्म करने की बात कही.
3. नौबतपुर कार्यालय में किसान महासभा के जिला सचिव कृपानारायण सिंह, प्रखंड सचिव देवेन्द्र वर्मा, किसान सभा प्रखंड के अध्यक्ष मधेश्वर शर्मा, किसान सभा जिला कमिटी के सदस्य उमेश सिंह, एक्टू के प्रखंड सचिव पप्पू शर्मा आदि भूख हड़ताल पर लोग थे. पुलिस ने यहां भी भूख हड़ताल बंद करने को कहा वरना एफआईआर करने की धमकी दी. 
4. मसौढ़ी में खेग्रामस बिहार राज्य सचिव गोपाल रविदास, जिला कमिटी सदस्य नागेश्वर पासवान, नगर पार्षद शशि यादव द्वारा जारी भूख हड़ताल को एसडीओ द्वारा रोके जाने की खबर मिली है.

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