बिहार : अब बिना किसी देरी के सभी मजदूरों को घर लाने की व्यवस्था की जाए. - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

बिहार : अब बिना किसी देरी के सभी मजदूरों को घर लाने की व्यवस्था की जाए.

  • देश के विभिन्न हिस्सों में प्रवासी बिहारी मजदूरों के खिलाफ नफरत का माहौल, नीतीश कुमार शर्म करें.
  • कर्नाटक में बिहारी मजदूरों को ‘कोरोना बम’ कहे जाने पर महबूब आलम ने सीएम को लिखा पत्र, भाजपा व नीतीश कुमार बिहार व मजदूर विरोधी.
  • कोरोना मरीज आगे की लड़ाई में सहायक हो सकते हैं, घृणा का नजरिया छोड़ें.
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पटना 30 अप्रैल, भाकपा-माले, खेग्रामस व ऐक्टू ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों को उनके घर जाने की इजाजत मिलना आंदोलनों की जीत है. इन तीनों संगठनों ने मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के सवाल पर लाॅकडाउन में भी लगातार आंदोलन चलाया था, जिसका दबाव सरकार पर काम कर रहा है. माले के राज्य सचिव कुणाल, खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार ने आज संयुक्त बयान जारी करके यह जानकारी दी. नेताओं ने कहा कि अब बिना किसी देरी के सभी मजदूरों को वापस लाने की व्यवस्था की जानी चाहिए. लेकिन इस मामले में यह देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार दिशा-निर्देश जारी करके अपने काम से मुक्त हो गई है. ऐसा नहीं हो सकता है. केंद्र सरकार मजदूरों की घर वापसी के लिए तत्काल सेनेटाइज रेलों की व्यवस्था करे. बिहार में जब डबल इंजन की सरकार तब इतनी देरी क्यों हो रही है! नेताओं ने कहा कि लाॅकडाउन की मार झेल रहे प्रवासी मजदूरों के खिलाफ चारो तरफ दुष्प्रचार चलाया जा रहा है. पहले तबलीग के लोगों के खिलाफ दुष्प्रचार चलाया गया और अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाया गया, अब हम देख रहे हैं कि जगह-जगह बिहारी प्रवासी मजदूरों को टारगेट किया जा रहा है. कर्नाटक में उन्हें कोरोना बम कहा जा रहा है. अल्पसंख्यकों, बिहारी प्रवासी मजदूरों व कोरोना मरीजों के प्रति यह तंग नजरिया बेहद निंदनीय है. आज हम देख रहे हैं कि तबलीग के कोरोना मरीज जो अब अपनी बीमारी से उबर गए हैं, कोरोना के खिलाफ जंग में नए हथियार साबित हो रहे हैं. इसलिए सभी कोरोना मरीजों के प्रति सहानुभूति व प्यार का रिश्ता रखना चाहिए. लेकिन संघ-भाजपा गिरोह ने इस दौर में भी जहर घोलने का ही काम किया. कर्नाटक जहां भाजपा की सरकार है, वहां बिहारी मजदूरों को क्यों टारगेट किया जा रहा है! ठसका जबाव सुशील मोदी और नीतीश कुमार बिहार की जनता को दें. मजदूर जिन गंदी स्थितियों में रहते हैं, उसमें कोरोना संक्रमण होना स्वभाविक है. लेकिन इस नाम पर नफरत फैलाने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जा सकती. भाजपा और नीतीश कुमार का बिहार व मजदूर विरोधी चेहरा हर कोई देख रहा है. प्रवासी मजदूरों के लिए भाजपा की कर्नाटक सरकार ने अच्छी व्यवस्था क्यों नहीं की! और नीतीश कुमार अब तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे! इसका जबाव बिहार की जनता चाहती है. इस मामले को लेकर भाकपा-माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने बिहार के सीएम को पत्र लिखा है.

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