साहित्य : गांधी जी को पसंद थी डबल रोटी - Live Aaryaavart

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सोमवार, 13 अप्रैल 2020

साहित्य : गांधी जी को पसंद थी डबल रोटी

आभासी दुनिया लेखक और साहित्यप्रेमी कर रहे हैं साहित्य और इतिहास की बातें
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कोविड-19 बीमारी ने जहाँ हमें एक-दूसरे से मिलने को तरसा दिया है, वहीं आभासी दुनिया पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधने का काम कर रही है। फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, ई-बुक, किताबों पर चर्चाएं लोगों को आपस में जोड़ रहे हैं। घर बैठे यह दुनिया छोटी-छोटी खुशियां लेकर आ रही है। “किताबें करती हैं बातें / बीते जमानों की / दुनिया की, इंसानों की / आज की कल की/ एक-एक पल की...“ दिग्गज कलाकार सफ़दर हाशमी की यह पंक्ति सरल शब्दों में बताती है कि किताबें हमारी सच्ची साथी हैं। इस अंधेरे, मुश्किल दौर में किताबें रौशनी की बात करती हैं। आज सफ़दर हाशमी की जन्मतिथि है। आभासी दुनिया के मंच पर लोगों ने उनकी कविताएं पढ़ उन्हें ख़ूब याद किया।

‘का हो पुराने, का हो सयाने’                                                        

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घर पर रहते हुए बाहर के मौसम का तो पता नहीं चलता लेकिन, घर पर फोन या लैपटॉप के जरिए देश-दुनिया के माहौल का पता चल जाता है। फ़ेसबुक पर #StayAtHomeWithRajkamal में आज मौसम था स्मृतियों के चलचित्र की तरफ़ लौटने का। अभिनेता सुरेंद्र राजन के साथ रविवार की शाम बातें हुईं गुज़रे ज़माने की। उन्होंने नेहरू, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, वी.वी.गिरी, बेग़म अख्तर, अज्ञेय, फ़ैज अहमद फ़ैज, कुँवर नारायण, राजेन्द्र यादव, जयकिशन अग्रवाल से जुड़े अपने जीवन छोटे-बड़े किस्सों को लोगों से साझा किया। उन्होंने काशीनाथ सिंह के साथ जुड़ा किस्सा सुनाते हुए कहा कि काशीनाथ सिंह उन्हें – ‘का हो पुराने’ कहकर संबोधित करते थे, इसका जवाब वो ‘का हो सयाने’ कहकर दिया करते। सुरेन्द्र राजन ने कहा कि, “चित्र बनाते-बनाते और फोटो खींचते-खींचते मुझे पता चला कि मैं अभिनेता बन गया हूँ।“ दोपहर का समय था फ़िल्मकार प्रेम मोदी के साथ साहित्य और फ़िल्म के जरिए फणीश्वरनाथ रेणु का रचना-संसार पर बात करने का। यह साल शब्द शिल्पी रेणु के जन्मशतीं का साल है। इस मौके पर अपनी बात कहते हुए प्रेम मोदी ने कहा. “फ़ेसबुक लाइव का यह प्रयोग नए पाठकों को गढ़ने का भी काम कर रहा है। जो लोग अब तक किताबों से दूर थे वो भी इन लाइव कार्यक्रमों के साथ जुड़कर किताब, सिनेमा, कला की बातों में शामिल हो रहे हैं। संकट के दौर में यह कोमल अनुभव है, उम्मीद को बचाए रखने की।” लेखक एवं मनोचिकित्सक विनय कुमार ने इस समय के लिए जरूरी मानसिक स्वास्थ पर जोर दिया। फ़ेसबुक पर लाइव बातचीत में उन्होंने कहा, “देश-विदेश से कोरोना को लेकर आने वाली ख़बरें परेशान कर रही हैं, ऐसे में एक हम सभी के लिए मन को शांत रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने बहुत सरलता से मन के विभिन्नों भावों पर विस्तार से चर्चा की। मनोचिकित्सक विनय कुमार ने दिमाग और मन के अंतर और सम्बंधों के बारे में बताते हुए लेखकों और रचनात्मक प्रतिभा वाले लोगों के मन की बनावट के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि क्रिएटिव आदमी में उदासीनता और उत्साह दोनों अपने चरम पर होती है। जब वह उदासीन होगा तो बहुत होगा। जब उत्साहित होगा तो बहुत होगा। उन्होंने स्वदेश दीपक की रचनाओं के हवाले से उनके मन की कई गुत्थियों को लाइव में संक्षेप में बताया। 

महात्मा गांधी को पसंद थी डबल रोटी
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‘स्वाद सुख’ कार्यक्रम में पुष्पेश पंत के साथ सिर्फ़ स्वाद की बातें नहीं होती, बल्कि यहाँ खाने के साथ इतिहास की झलक भी मिलती है। रोज सुबह ग्यारह बजे ‘स्वाद-सुख’ कार्यक्रम लेकर लाइव आने वाले पुष्पेश पंत ने आज डबल रोटी पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जब महात्मा गांधी पहली बार इंग्लैंड जा रहे थे तब जहाज पर रोटी परोसने वाले के गंदे हाथ देखकर उनका मन खराब हो गया और उन्होंने रोटी की जगह डबल रोटी खाना पसंद किया। फिर तो डबल रोटी का चस्का उनकी ज़ुबान पर चढ़ गया। पुष्पेश पंत ने लाइव के दौरान बात करते हुए कहा, “महादेव देसाई की डायरी से पता चलता है कि बापू जब जेल में थे, तो वहाँ का जेलर उनसे प्रभावित था और उसने उन्हें अपने बंगले के अवन में डबल रोटी बनाने की इजाज़त दे दी थी। बापू ने सरोजनी नायडू को जेल से लिखी एक चिट्ठी में अपनी तारीफ़ करते हुए लिखा था कि जितनी अच्छी डबल रोटी मैं बनाता हूँ शायद ही की कोई बनाता होगा।“ डबल रोटी की अजीबोग़रीब दुनिया है, जहाँ इसे पाव-रोटी, टोस्ट, ब्रेड-पुडिंग, शाही टुकड़ा, पाव भाजी या ब्रेड पकौड़ा तो न जाने और कितने रूप में पकाया और खाया जाता है। ‘स्वाद-सुख’ का यह संसार रोज़ अपने नए अंदाज़ में खाने वालों और बनाने वालों को अचंभित कर रहा है। पुष्पेश अब तक 17 लाइव कर चुके हैं जहाँ वो घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली सामग्री के विभिन्न चमत्कारिक रूपों एवं विधियों पर बात करते हैं। उनका कार्यक्रम ऐसे लोगों को भी खाना बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है जिन्हें रसोई में जाने से भी डर लगता है।

किताबें कुछ तो कहना चाहती हैं
राजकमल प्रकाशन के फ़ेसबुक लाइव पर 22 दिन से चल रहे लंबे साहित्यिक आयोजन में अबतक 66 लेखक एवं साहित्यप्रेमी लाइव आ चुके हैं। लेखकों के साथ-साथ फिल्म, कला, गायन, एवं मिडिया के क्षेत्र से जुड़े लोग #StayAtHomeWithRajkamal हैशटैग के अंतर्गत चल रहे लाइव कार्यक्रम में शामिल होकर लॉकडाउन के अपने अनुभव साझा कर रहे हैं तथा अपनी कला का लाइव प्रदर्शन कर रहे हैं।  राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा कि, “ लेखक का काम सिर्फ़ लिखना और प्रकाशक का काम सिर्फ़ छापना नहीं है। इस मुश्किल समय में हम सभी की जिम्मेदारियां दोहरी-तिहरी हो जाती हैं। घर पर रहना हमारी प्राथमिकता है।  अपने साथ-साथ समाज को भी शारिरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ रखना हमारी जिम्मेदारी है। हम फ़ेसबुक लाइव के जरिए लेखकों और साहित्य प्रेमियों को लगातार जोड़े रखने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी कोशिश है की इस मुश्किल समय में भी हमारा घर किताबों और बातों से हरा-भरा हो। हम अपने ब्लॉग, वेबसाईट, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे सभी स्थानों पर ई-बुक और ऑनलाइन रीडिंग मटेरियल उपलब्ध करा रहा रहे हैं। किताबों का यह ख़ुबसूरत संसार हमारे अंदर उम्मीद और यकीन की रौशनी जलाए रखेगा। जीत मानवता की ही होगी।“ राजकमल प्रकाशन समूह के फ़ेसबुक लाइव कार्यक्रम में अब तक शामिल हुए लेखक हैं - विनोद कुमार शुक्ल, मंगलेश डबराल, हृषीकेश सुलभ, शिवमूर्ति, गीतांजलि श्री वंदना राग, सविता सिंह, ममता कालिया, मृदुला गर्ग, मृदुला गर्ग, मृणाल पाण्डे, ज्ञान चतुर्वेदी, मैत्रेयी पुष्पा, उषा उथुप, ज़ावेद अख्तर, अनामिका, अश्विनी कुमार पंकज, अशोक कुमार पांडेय, पुष्पेश पंत, प्रभात रंजन, राकेश तिवारी, कृष्ण कल्पित, सुजाता, प्रियदर्शन, यतीन्द्र मिश्र, अल्पना मिश्र, गिरीन्द्रनाथ झा, विनीत कुमार, हिमांशु बाजपेयी, अनुराधा बेनीवाल, सुधांशु फिरदौस, व्योमेश शुक्ल, अरूण देव, प्रत्यक्षा, त्रिलोकनाथ पांडेय, आकांक्षा पारे, आलोक श्रीवास्तव, विनय कुमार, दिलीप पांडे, अदनान कफ़ील दरवेश, गौरव सोलंकी, कैलाश वानखेड़े, अनघ शर्मा, नवीन चौधरी, सोपान जोशी, अभिषेक शुक्ला, रामकुमार सिंह, अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी, तरूण भटनागर, उमेश पंत, निशान्त जैन, स्वानंद किरकिरे, सौरभ शुक्ला, पुष्पेश पंत

राजकमल फेसबुक पेज से लाइव हुए कुछ ख़ास हिंदी साहित्य-प्रेमी : चिन्मयी त्रिपाठी (गायक), हरप्रीत सिंह (गायक), राजेंद्र धोड़पकर (कार्टूनिस्ट एवं पत्रकार), राजेश जोशी (पत्रकार), दारैन शाहिदी (दास्तानगो), अविनाश दास (फ़िल्म निर्देशक), रविकांत (इतिहासकार, सीएसडीएस), हिमांशु पंड्या (आलोचक/क्रिटिक), आनन्द प्रधान (मीडिया विशेषज्ञ), शिराज़ हुसैन (चित्रकार, पोस्टर आर्टिस्ट), हैदर रिज़वी, अंकिता आनंद, प्रेम मोदी, सुरेंद्र राजन

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