वारिसलीगंज दलित हत्याकांडदके विरुद्ध विद्यानन्द विकल जी की पहल - Live Aaryaavart

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रविवार, 19 अप्रैल 2020

वारिसलीगंज दलित हत्याकांडदके विरुद्ध विद्यानन्द विकल जी की पहल

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नवादा,18 अप्रैल। बिहार के नवादा स्थित वारिसलीगंज से एक हत्या की घटना सामने आई है। यहाँ वारिसलीगंज के मुड़चालक में दो पक्षों के बीच मारपीट और गोलीबारी हुई। इस घटना में मुख्य आरोपित मोहम्मद इरफान ने 55 वर्षीय रविदास की गोली मार कर हत्या कर दी। एक महिला सहित 6 अन्य लोग घायल हैं। पुलिस ने 8 आरोपितों को हिरासत में लिया है लेकिन इरफान अभी भी फरार बताया जा रहा है। गाँव में पिछले 20 दिनों से दोनों पक्षों के बीच तनातनी चल रही थी, जिसके बाद शुक्रवार (अप्रैल 18, 2020) को इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। बिहार राज्य खाद्य आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री विद्यानन्द विकल जी जो राज्य अनुसूचित जाति आयोग ,बिहार के पूर्व अध्यक्ष भी हैं  कल दिनांक 17.04.2020 की  वारिसलीगंज थाना के बगल में  वार्ड नम्बर 5 ग्राम-मुदलाचक में क्रिकेट खेल में बच्चों के बीच उत्पन्न विवाद में हुई गोलीबारी और 7 दलितों की जख्मी होने तथा मदन रविदास का इलाज के क्रम में हुई मृत्यु की सूचना मिलते है सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया । श्री विकल ने सबसे पहले एसपी नवादा से बात कर सक्रिय किया तथा विकास रजन ,ग्रामीण सीताराम दास, सुबोध पासवान,एव संजय पासवान से बात कर घटना की जानकारी ली । उन्होंने पुलिस महानिदेशक, बिहार श्री गुप्तेश्वर पांडेय को वाट्सएएफ पर मैसेज देकर त्वरित कार्रवाई करने की वकालत की तथा माननीय मुख्यमंत्री जी को उनके ओएसडी के माध्यम से अवगत कराया । उक्त घटना की एसपी नवादा के वाट्सएएफ और डीएसपी नवादा, पकड़ी बरांव को दी । घसिलों को बेहतर इलाज कराने और गांव में पुलिस गश्त तेज करने का वकालत किया । अध्यक्ष महोदय श्री विद्यानन्द विकल के सक्रिय पहल का परिणाम यह रहा कि रात 12 बजे तक नवादा डीएम और एसपी वारिसलीगंज में कैम्प कर  स्थिति को नियंत्रित किया तथा अभियुक्तों की गिरफ्तारी  हुई । मृतक के परिजन को आज अनुमंडल पदाधिकारी व अन्य उच्चाधिकारियों द्वारा मुआवजा का 4 लाख 12,500 रु0 का चेक के साथ 20000 परिवारिक लाभ एवं कबीर अंत्येष्टि का लाभ मिल गया । घायलों का इलाज  सदर अस्पताल नवादा में चल रहा है । इस घटना से सम्बंधित वारिसलीगंज थाना कांड संख्या 97/2020 में  नामजद अभियुक्त में 15 की गिरफ्तार कर ली गयी है । । दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि उस क्षेत्र में दलित सुरक्षा पर प्रोजेक्ट चलाने वाले कई संस्थाएं सक्रिय है ।वैसे लोग क्षेत्र में रहने के बाबजूद इस घटना की जानकारी किसी को नही दी । जब हमने सम्पर्क किया और गांव के पीड़ितों का नम्बर मांगा तो वे स्विच ऑफ कर लिया । जातीय राजनीति करने वाले अधिकारियों के ग्रुप हो या राजनितिक दलों खासकर जदयू के दलित महादलित प्रकोष्ठ के नेता भी इस घटना पर किसी तरह का प्रतिक्रिया नही लिखी । ऐसे लोगो से जनता क्या उम्मीद कर सकती है जो दुःख के संकट में दबी साध लेते हों । संपूर्ण बातों की जानकारी प्रदीप कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता ,खाद्य सुरक्षा ने दी है।

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