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रविवार, 12 अप्रैल 2020

बिहार से बाहर रहने वाले बिहारियों के लिए अभिशाप बना ये लॉक डाउन

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अरुण कुमार (बेगूसराय) लॉकडाउन में बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले 28 मजदूर मुंबई में फँसे हुए थे,इनके पास खाने का भी कोई पैसा नहीं बचा।ये लोग 06 दिनों तक सभी बिस्किट और पानी के सहारे किसी तरह जीवन जिये रहे और समय बिताते रहे इस आशा पर की यहाँ की सरकार,सामाजिक कार्यकर्ता आदि कुछ न कुछ अवश्य ही करेंगे।मगर किसी न कुछ नहीं किया तो अंत में परेशान होकर सभी मुंबई से सभी अपने घर की ओर रवाना हो लिए।काफी  दूर निकलने पर भी उन्हें रासए में भी कहीं भरपेट भोजन नसीब नहीं हुआ।अन्त में लगभग 1000 कि०मि० की दूरी तय करने के बाद उनको भरपेट खाने के लिए भोजन नसीब हुआ।

मुम्बई से सीतामढी सभी मैजिक से आ रहे थे।
सभी मजदूर उलासनगर में किसी तरह से एक मैजिक से चले।वे जैसे ही यूपी के ललितपुर करीब एक हजार कि०मी० दूरी तय किए तो उन सबों को को रोक लिया गया और सभी मजदूरों की जांच की गई।इसी दौरान सभी मजदूरों को खाना खिलाया गया।जब अधिकारियों ने इन लोगों से पूछताछ की तो इनलोगों से पूछने पर आँखों से आँसू आ गए और बताया सभी 06 दिनों से सिर्फ बिस्किट और पानी पर जिन्दा हैं।यहाँ पर भरपेट भोजन हमलोगों को मिला तब जाकर हमें ऐसा लगता है कि जान में जान आई है कुछ।अब यहाँ ललितपुर में सभी मजदूरों को शेल्टर होम में रखा गया है।कुछ को जा जाँच के लिए भेजा गया है।

मुम्बई उल्ल्हास नगर में भोजन देने में भी हुआ भेदभाव
इन मजदूरों ने आरोप लगाया है कि इस संकट की घड़ी में मुंबई में उनलोगों के पास कई संस्थाएं पहुँची,लेकिन वे संस्थायें हमसभी का नाम और पता लिखकर ले जाती थी,और खाद्यान के नाम पर कभी कुछ दिया ही नहीं।यहाँ भोजन देने में भी भेदभाव किया जाता था।सिर्फ महाराष्ट्र के रहने वाले लोगों को ही संस्थाए भोजन देती थी हम बाहरी को सिर्फ पूछकर ही चली जाती थी।

ये सभी मजदूर सीतामढ़ी के रहने वाले हैं
सभी मजदूर सीतामढ़ी के सुंदरनगर के रहने वाले हैं।सभी मुंबई में डी मार्ट कंपनी में काम करते थे।लेकिन कम्पनी ने भी इस संकट के क्षणों में साथ नहीं दिया।ललतीपुर से सीतामढ़ी की दूरी भी करीब एक हजार कि०मि०और भी है जो इन्हें तय करना है।लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए फिलहाल ललितपुर में अधिकारियों ने शेल्टर होम में रखा है।जाँच के लिए सैंपल भेजा गया है।आगे बता दूँ कि लॉकडाउन के कारण बिहार के कई जिलों के मजदूर देश के कई शहरों में फँसे हुए हैं।करीब डेढ़ लाख लॉकडाउन के दौरान बिहार आ भी चुके हैं।

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