बिहार : सरकार की घोषणाओं का लाभ समय से लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

बिहार : सरकार की घोषणाओं का लाभ समय से लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है

नागर समाज का आरोप है कि एक अधिकारी आदेश देते हैं तो दूसरे अधिकारी पाबंदी लगा देते हैं। ऐसे लोगों का कोपभाजन बनने से बचने के लिए नागर समाज सुबह 5 बजे से पहले ही राहत संबंधित कार्य कर लेते हैं। सरकार को चाहिए नागर समाज का सहयोग लेकर नावेल कोरोना की चुनौती से जंग लड़े। 
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पटना,16 अप्रैल। भोजन का अधिकार अभियान,बिहार के द्वारा  कोरोना महामारी की रोकथाम के उद्ेश्य से किए गए लाॅकडाउन के बाद भूख के साथ जीवन गुजारने को मजबूर लोगों के लिए गर्म पका खाना और चावल, तेल, मसाला,दूध पाउडर आदि राशन के रूप में खाघ सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान द्वारा प्रवासी श्रमिकों, शहर में रहने वाले किराएदारों,सड़क के किनारे रहने वाले बेघरों व घुमंतू लोगों को भी लगातार मदद दी जा रही है। सरकार की घोषणाओं का लाभ समय से लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।  व्यक्ति,संगठन एवं संस्थाओं के साझा पहल से 2500 लोगों को प्रतिदिन गर्म पका खाना दिया जा रहा है। इसमें भोजन का अधिकार अभियान के तहत‘ कोशिश‘, ‘सबकी रसोई‘ अभियान, स्विग्गी, जोमैटो आदि की सहायता से रही है। यारपुर मुसहरी में लोगों ने दो दिनों से खाना नहीं खाया था,खाना देखकर उनके चेहरे पर खुशी आयी। अब भी स्लमों के दिव्यांगों, कूड़ा चुनने,किन्नर,रिक्शा-ठेला चलाने वालों , मजदूरी करने वालों, फूटपाथ पर समान बेचने वालों लोगों की स्थिति बहुत दयनीय है। 50 परिवारों को राशन की सहायता देने से शुरू किया और अब तक लगभग 1300 परिवारों को 15 से 30 दिनों का राशन उपलब्ध कराया जा चुका है। अभियान द्वारा इसके लिए एक अपील की गई थी जिसके आधार पर बहुत सारे लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर सहायता की है। साथ ही कोशिश, एक्शन एड, सेव द चिल्ड्र्,हेल्प एज इंडिया,रिलायंस फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने सहायता की है। अभियान का एक प्रमुख उद्ेश्य यह भी है कि हमारे प्रयासों से लोगों को सहयोग की प्रेरणा बनी रहे और लाॅकडाउन से उत्पन्न समस्याओं पर सरकार का ध्यान भी लगातार आकृष्ट की जा सके। इसके अलावा इस संकट के समय में सहायता देने वालों के प्रति हमारी जवाबदेही भी बनती है।  हमारे प्रयासों को देखकर कुछ लोग और संस्थाएं आगे आए भी हैं। लोग व्यक्तिगत स्तर पर सामान,राशि और श्रम के रूप में सहयाोग कर रहे हैं। इन्हीं के बल पर लगातार रिलिफ का काम जारी है। सभी के सहयोग से खाना, सैनिटेशन सामग्री,अनाज,बच्चों के लिए दूध आदि लोगों तक लगातार पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। लोगों की सभी जरूरतों को हम पूरा नहीं कर सकते। हम एक सकारात्मक सीमित कोशिश कर रहे हैं। यह काम बहुत लोग कर रहे हैं। नागर समाज सरकार की स्वीकृति के बिना भूखे और गरीब लोगों की सहायता कर रहा है। लोग हमेशाा सहायता करते रहे हैं।  सरकार और सरकार के समर्थक, नागर समाज की इस मानवीय पहल को रोकने के लिए कई बाधाएं उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार में समन्वय का कमी है, इसलिए सरकार की ही एक अधिकारी द्वारा नागर समाज को सहायता के लिए आमंत्रित किया जाता है , तो दूसरा उसे खारिज करता है। नीति आयोग, विभिन्न विभाग,माननीय न्यायालय के दिशानिर्देश के बावजूद ऐसा है। हम सभी का मानना है कि इसे सरकार पूरा कर सकती है और यह सरकार की संवैधानिक जिम्मेवारी भी है।  रूपेश,कोशिश चैरिटेबल ट्र्स्ट,पटना, अरशद अजमल,लोक परिषद, विनोद कुमार, सौरभ कुमार,एक्शन एड असोसिएशन, पंकज श्वेताभ, इमरान माजिद, सेव द चिल्ड्र्न, राफेव एजाज हुसैन,सेव द चिल्ड्र्ेन, विजय कान्त सिन्हा, असंगठित क्षेत्र कामगार संगठन, फादर जोस, दलित विकास समिति, सिस्टर लीमा, बिहार महिला कामगार यूनियन, कपिलेश्वर राम, दलित अधिकार मंच,बिहार, तनवीर अख्तर, सुभान्शु शेखर, शहरी गरीब विकास संगठन, त्रृत्विज कुमार, भोजन का अधिकार अभियान, अफजल हुसैन,बिहार रबीता कमिटी, प्रभाकर कुमार, राणा रंजीत, सुभांशु शेखर, राजीव कुमार, जेबा वसी, स्वजल कुमार और आजमी। 

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