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रविवार, 10 मई 2020

जमशेदपुर : कोरोना ने ऑटो पर भी लगा रखी है ब्रेक, चालकों की रोजी-रोटी पर है आफत

लॉकडाउन के कारण सरायकेला-खरसावां जिला में ऑटो चालकों को अब आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. सरायकेला जिले में लॉकडाउन में प्रभावित ज्यादातर ऑटो चालकों को किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है, वे परेशान हैं. उनका कहना है कि अब खाना-पीने की भी दिक्कतें आ रही हैं.
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सरायकेला (आर्यावर्त संवाददाता)  कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर पूरे देश भर में लॉकडाउन है. इस लॉकडाउन में हर एक आम और खास सभी काफी प्रभावित हो रहे हैं. लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रभावित रोज कमाकर घर चलाने वाले लोग हुए हैं. ऐसे में सड़कों पर दिनभर ऑटो चलाकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले ऑटो चालक भी इस लॉकडाउन में बड़ी मुसीबत में पड़े हुए हैं. सरकार के पब्लिक ट्रांसपोर्ट समेत ऑटो के परिचालन को लॉकडाउन में पूरी तरह बंद रखा गया है. ऐसे में ऑटो चालक अब सरकार के तरफ मदद की गुहार के साथ टकटकी लगाए बैठे हैं. चेहरे पर दिख रही चिंतालॉकडाउन के कारण सरायकेला-खरसावां जिला में ऑटो चालकों को अब आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. इन ऑटो चालकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं. लंबे इंतजार के बाद लॉकडाउन 3.0 में भी सरकार ने सड़कों पर ऑटो चलने की छूट नहीं दी है. ऐसे में ऑटो चालक इस आस में दिन काट रहे हैं कि कब लॉकडाउन खत्म हो और यह कमाने खाने सड़कों पर अपने ऑटो लेकर उतरे.

डेढ़ हजार ऑटो चालक लॉकडाउन में हैं प्रभावित
सरायकेला जिले में लॉकडाउन में प्रभावित ज्यादातर ऑटो चालकों को किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं मिल रही है. वहीं जनधन खाता, राशन कार्ड नहीं होने के कारण भी ऑटो चालकों को घर चलाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं. आंकड़ों के मुताबिक जिले में सवारी ऑटो चालकों की संख्या तकरीबन डेढ़ हजार है, जो जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रोजाना पैसेंजर को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने का काम करते हैं. इस बीच लॉकडाउन में ऑटो के पहिए पूरी तरह थम गए हैं और आमदनी भी शून्य है.

मुसीबत में 500 स्कूली वाहनों के संचालक भी 
सवारी गाड़ी को छोड़ अगर बात करें स्कूली वाहनों की तो जिले में तकरीबन 500 से भी अधिक स्कूली वाहन चलते हैं, जिनमें ऑटो के अलावा स्कूली वैन भी शामिल हैं. लॉकडाउन में 17 मार्च से पूर्व ही जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूल बंद हैं. नतीजतन स्कूली ऑटो और वाहन चालकों को भी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने वेतन नहीं दिया है. ऐसे में इन स्कूली वाहन चालकों के समक्ष भी खाने और कमाने की बड़ी समस्या है. स्कूली वाहन चालक बताते हैं कि लॉकडाउन में कंपनियां भी प्रभावित हैं, ऐसे में बच्चों के अभिभावकों के पास भी पैसों की किल्लत है. मार्च महीने का बकाया भुगतान भी स्कूली बच्चों के अभिभावक नहीं कर पा रहे हैं.

कई ऑटो चालकों ने बदला व्यवसाय
लगातार जारी लॉकडॉन के कारण कई ऑटो चालकों ने हाल के दिनों में अपना व्यवसाय बदल दिया है. इनमें से कुछ बाजारों में सब्जी बेच रहे हैं या फिर कुछ और काम कर लॉकडाउन में किसी तरह पेट पालने की जुगत लगा रहे हैं.

घर की रसोई भी पड़ी सुनी
ऑटो चालकों को अपना और अपने परिवार के पेट पालने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ऑटो चालकों की कमाई बंद होने से उनके घरों की रसोई भी अब सुनी पड़ गई हैं. घर की महिलाएं बताती हैं कि कहीं सामाजिक संगठन तो कहीं स्वयंसेवी संस्थाओं से जो राशन मिल रहा है उसी से किसी तरह गुजारा हो रहा है. आटो चालक कर रहे सरकारी राहत राशि की मांग सरायकेला जिले के ऑटो चालकों ने अब झारखंड सरकार से राहत पैकेज घोषणा की मांग की है. दिल्ली सरकार के तर्ज पर ऑटो चालकों ने झारखंड सरकार से भी सभी ऑटो चालकों को राहत के पैकेज के तौर पर 10-10 हजार रुपए उपलब्ध कराए जाने की मांग की है. कई ऑटो चालकों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के समक्ष भी इससे पूर्व गुहार लगाई थी. 

झारखंड वाहन संघ निबंधित ऑटो चालकों को पैकेज दिलवाने की कवायद में जुटा
लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे आटो चालकों और स्कूली वाहन चालकों को झारखंड वाहन संघ सरकार से आर्थिक सहायता दिए जाने की कवायद शुरू की गई है. संघ के अध्यक्ष संतोष मंडल ने सूबे के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन से मुलाकात कर सभी ऑटो और स्कूली वाहन चालकों के खाते में 10-10 हजार रुपए उपलब्ध कराए जाने की मांग की है. इस बीच संघ की ओर से ऑटो और स्कूली वाहन चालकों का निबंधन भी जोरों से किया जा रहा है.

झारखंड वाहन संघ निबंधित ऑटो चालकों को पैकेज दिलवाने की कवायद में जुटा
लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे आटो चालकों और स्कूली वाहन चालकों को झारखंड वाहन संघ सरकार से आर्थिक सहायता दिए जाने की कवायद शुरू की गई है. संघ के अध्यक्ष संतोष मंडल ने सूबे के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन से मुलाकात कर सभी ऑटो और स्कूली वाहन चालकों के खाते में 10-10 रुपए उपलब्ध कराए जाने की मांग की है. इस बीच संघ की ओर से ऑटो और स्कूली वाहन चालकों का निबंधन भी जोरों से किया जा रहा है.

सरकार से मदद की आस
ऑटो चालक कहते हैं चक्का चलेगा तो हमारा घर चलेगा और चक्का रुका तो हमारा जीवन ही रुका, ऐसे में सरकार से मदद की आस लिए बैठे हैं. इन ऑटो चालकों पर सरकार की क्या मेहरबानियां होती हैं, यह देखने वाली बात है.

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