बिहार : एक नजर इधर भी,कृपया कर ध्यान दें और अमली जामा पहनायें इसे - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 8 मई 2020

बिहार : एक नजर इधर भी,कृपया कर ध्यान दें और अमली जामा पहनायें इसे

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अरुण शाण्डिल्य (बेगूसराय) सरकार एक निश्चित समय तक ही रख सकती है लॉक डाउन।धीरे धीरे ये लॉक डाउन खत्म हो जाएगी।सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी क्योंकि सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में तकरीबन सारी स्थितियों से अवगत करा चुकी है जैसे सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सारी बातें समझा दिया है। बीमार होने के बाद की स्थिति से भी आप लोग अवगत ही हैं और देश में क्या हो रहा है देख-सुन ही रहे हैं ।  अब जो समझदार है वह आगे लम्बे समय तक अपनी दिनचर्या,काम करने का तरीका भी समझ लें। सरकार 24 घंटे  365 दिन आपकी चौकीदारी नहीं कर सकती है और न ही कर सकेगी।आपकी अपनी सुरक्षा आपने हाथ ही रखना होगा।इतना ही नहीं अब आपको अपने खुद की बीमारियों के इलाज का भी खर्च को खुद ही से करना होगा।निजी चिकित्सक आपका इलाज करेंगे अथवा आप से डरेंगे यह भी आपको ही सोचना और समझना होगा।सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसकी दवा नही है।आपके एवं आपके परिजनों का भविष्य भी अब आपके ही हाथ में है।लाॅकडाउन खुलने के बाद सोच समझ कर ही घर से निकलें एवं काम पर जायें व नियत नियमानुसार ही अपना कार्य करें।अब आपको क्या लगता है 17 मई के बाद एकदम अचानक से कोरोना चला जायेगा,हमसब पहले की तरह जीवन जीने लगेंगे ? नहीं,कदापि नहीं।ये वायरस अब हमारे देश में जड़ें जमा चुकी है,हमें इसके साथ रहने की आदत डालनी होगी। सरकार कब तक लॉकडाउन रखेगी,कब तक बाहर निकलने में पाबंदी रह सकती है,अगर ऐसा ही रहा तो आदमी घर की घुटन से घर में ही दम तोड़ता नजर आएगा।अब हमें स्वयं इस वायरस से लड़ना पड़ेगा, अपनी जीवन शैली में बदलाव करके,अपनी रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ाने होगा,और इसके लिए हमें सैकड़ों साल पुरानी जीवन शैली अपनानी होगी। शुद्ध आहार लेना होगा,शुद्ध मसाले बिना बनावट के और शुद्ध आवोहवा में रहते हुए शुद्ध आहार लेना होगा।आंवला,एलोवेरा,गिलोय,काली मिर्च,लौंग,हींग,आजवाइन आदि पर निर्भर होना पड़ेगा।अब इस कोरोना को बजी अन्य बीमारियों की तरह समझते हुए सनातन,संस्कृति और सांस्कर को अपनाते हुए जीवन जीना होगा। एन्टी बाइटिक्स के चंगुल से खुद को आज़ाद करना होगा।अपने भोजन में पौष्टिक आहार की मात्रा बढ़ानी होगी,फ़ास्ट फ़ूड,पिज़्ज़ा,बर्गर,कोल्ड्रिंक को भूलना होंगा सात्विक जीवन शैली अपनाना होगा।अपने बर्तनों को बदलना होगा,अल्युमिनियम,स्टील आदि का परित्याग कर हमें भारी बर्तन जैसे पीतल,कांसा,तांबा को अपनाना होगा जो प्राकर्तिक रूप से वायरस को भी खत्म करने की क्षमताओं को अपने में समाहित किए हुए रहता है।

अपने आहार में दूध,दही,घी की मात्रा भी बढ़ानी होगी।
जिह्वा के स्वाद की भी भूलना और बलिदान करना होगा। तला-भुना मसालेदार,जायकेदार व्यंजनों अथवा होटल वाला कचरा भोज्य पदार्थो से भी खुद को वंचित करना होगा।कम से कम अगले कुछ सालों नहीं तो कम से कम कुछ महीनों तक तो ये करना ही पड़ेगा।तभी हम अपनी जिन्दगी सही मायने में जी सकेंगे और अल्पायु में ही मृत्यु के सरवाइव कर पाएंगे,और जो नहीं बदलेंगे वो मुश्किल मे पड़ जाएंगे।इस बात को मान कर इन पर अमल करना शुरू कर दें ।जिंदगी आपकी फैसला आपका।

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