मानव कल्याण आधारित वैश्वीकरण को बढ़ाने की जरूरत: मोदी - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 5 मई 2020

मानव कल्याण आधारित वैश्वीकरण को बढ़ाने की जरूरत: मोदी

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नयी दिल्ली 04 मई, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुटनिरपेक्ष देशों का आह्वान किया कि कोविड 19 के पश्चात मानव कल्याण पर आधारित वैश्वीकरण के लिए आगे आयें। श्री मोदी ने यहां गुटनिरपेक्ष आंदोलन के देशों के संपर्क समूह के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में यह आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोविड 19 से वर्तमान अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की सीमाओं को उजागर कर दिया है। कोविड 19 के खात्मे के बाद विश्व का वैश्वीकरण का नया रूप चाहिए जो निष्पक्षता, समानता एवं मानवीयता पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे अंतरराष्ट्रीय संस्थान चाहिए जो आज के विश्व का अधिकतम प्रतिनिधित्व करते हों। हमें मानव कल्याण को बढ़ावा देने की जरूरत है केवल आर्थिक प्रगति को नहीं। भारत इन पहल में अग्रणी रहा है। योग दिवस, अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोड़ और आपदा रोधी ढांचे के लिए गठजोड़ ऐसी ही पहलें हैं। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी से हम सब उबर जाएंगे बशर्ते हम एकजुटता से प्रयास करें। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि विकासशील देशों को मिलकर एक अपने अनुभवों, आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल, अनुसंधान एवं संसाधन साझा करने के लिए एक मंच विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुटनिरपेक्ष देशों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय एवं डब्ल्यूएचओ का आह्वान करना चाहिए कि वे विकासशील देशों में स्वास्थ्य क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दें। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हमें समान, सस्ती और समय पर स्वास्थ्य उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी सबके लिए उपलब्ध हो। श्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कोविड-19 के कारण विश्वभर में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि आज मानवता कई दशकों बाद सर्वाधिक गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे समय गुटनिरपेक्ष आंदोलन वैश्विक एकजुटता को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है। यह मंच विश्व की नैतिक आवाज़ है और इस भूमिका को बरकरार रखने के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन को समावेशी बनाये रखना होगा। प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति के वसुधैव कुटुम्बकम् के मंत्र को उद्धृत करते हुए कहा कि इस संकट काल में विश्व की फॉर्मेसी कहे जाने वाले भारत ने अपनी जरूरत के साथ ही विश्व के 123 देशों को सस्ती दवायें, चिकित्सा उपकरण एवं डॉक्टरों की रैपिड रिस्पांस टीमें मुहैया करायीं हैं जिनमें गुटनिरपेक्ष आंदोलन के 59 देश शामिल हैं। भारत वनस्पतियों पर आधारित विश्व की सबसे प्राचीन औषधि प्रणाली आयुर्वेद के आधार पर मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोविड 19 के टीके एवं दवा के अविष्कार के प्रयासों में मदद कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ऐसे समय जब विश्व कोविड19 से लड़ रहा है कुछ देश आतंकवाद के वायरस को बढ़ाने में लगे हैं। 

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