बिहार : पीएम मोदी को मजदूरों व गरीबों की परवाह नहीं : माले - Live Aaryaavart

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शनिवार, 9 मई 2020

बिहार : पीएम मोदी को मजदूरों व गरीबों की परवाह नहीं : माले

  • मजदूरों को मरने-खपने के लिए छोड़ दिया गया, उनके अधिकारों पर भी हो रहा हमला.
  • मारे गए लोगों के प्रति पूरे बिहार ने जताया शोक, मोदी-नीतीश सरकार को धिक्कार.
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पटना 9 मई, लाॅकडाउन में मजदूरों-गरीबों के हो रहे जनसंहार के खिलाफ आज भाकपा-माले, खेग्रामस व ऐक्टू के संयुक्त आह्वान पर देशव्यापी शोक व धिक्कार दिवस कार्यक्रम में बिहार की जनता ने अपनी बड़ी भागदारी दिखलाकर अपने गुस्से का इजहार किया है. माले राज्य सचिव कुणाल, खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा, ऐक्टू के बिहार महासचिव आर एन ठाकुर व राज्य सचिव रणविजय कुमार ने इस लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया. माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि हम लंबे समय से प्रवासी मजदूरों को ट्रेन से घर पहुंचाने की मांग करते आए हैं, लेकिन मोदी सरकार इसे अनसुनी ही करते आई. जिसका नतीजा हुआ मजदूर पैदल ही चल पड़े औश्र अब तक सैंकड़ों मजदूरों की मौत हो चुकी है. महाराष्ट्र की घटना तो पराकाष्ठा है, जहां 157 किलोमीटर की दूरी तय करने के उपरांत थककर ट्रैक पर निढाल पड़े 16 मजदूरों को एक ट्रेन ने रौंद दिया. विशाखापट्नम में भी तय मानकों का उल्लंघन होते रहा, जिसका नतीजा सामने है. मजदूरों को दी जा रही यातनायें न केवल सरकारी की लापरवाही बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था के सडांध को उजागर कर रही हैं.  ऐक्टू नेता ने कहा कि मोदी सरकार जिस तरह से पूंजीपतियों के हित में और मजदूरों के विरोध में काम कर ही है, उससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सरकार के तहत मजदूरों की हालत और भी खराब होने वाली है. श्रम कानूनों में संशोधन करके 44 कानून के बाद 4 कोड कर दिए गए और अब मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की सरकारों ने उसे भी कोरोना के नाम पर सस्पेंड कर दिया है. ये सारे संशोधन व बदलाव काॅरपोरेटों व पूंजीपतियों के हित में किए जा रहे हैं. मजदूरों की महात्रासदी और मेडिकल व्यवस्था की कमजोरी ने साबित कर दिया है कि उदारीकरण, प्राइवेटाइजेशन, भूमंडलीकरण की नीतियां मजदूर व आम जनता के खिलाफ है, लेकिन मोदी सरकार सबक लेने की बजाए काॅरपोरटों को ही बढ़ावा देने में लगी है. खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा ने कहा कि हम एक बार फिर केंद्र व बिहार की सरकार को आगाह करते हैं कि बिना किसी ना-नुकर के सभी प्रवासी मजदूरों की तत्काल घर वापसी की गारंटी करे. उनके लिए राशन व रोजगार उपलब्ध करवाए. सरकार की लापरवाही मजदूरों के आक्रोश को बढ़ाने का ही काम कर ही है. 

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