जमशेदपुर: ईमानदारी की मिसाल, किराना दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने नोटों के बंडल को किया वापस - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 28 मई 2020

जमशेदपुर: ईमानदारी की मिसाल, किराना दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने नोटों के बंडल को किया वापस

जमशेदपुर में एक दुकान में काम कर रहे कर्मचारी ने मिसाल पेश की है. कर्मचारी दिनेश ने दुकान के पास से 20 हजार रुपए पाए. जिसके बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई. जिसे पुलिस ने सुपरवाइजर अवधेश को वापस कर दिए.
poor-employee-return-money
जमशेदपूर (आर्यावर्त संवाददाता)  बागबेड़ा थाना क्षेत्र में किराना की दुकान में काम करने वाले एक कर्मचारी ने पाए हुए बड़ी रकम को सकुशल लौटाकर ईमानदारी की मिसाल पेश की है. बागबेड़ा थाना प्रभारी ने बताया कि दिनेश यादव नामक शख्स को 5सौ का बंडल गिरा हुआ मिला. जिसे उसने अपने मालिक को दी. दुकान मालिक ने पैसे को पुलिस के हवाले कर दिया. जमशेदपुर के बागबेड़ा थाना क्षेत्र के गुदड़ी मार्केट स्थित एक किराना की दुकान में काम करने वाले कर्मचारी दिनेश यादव को दुकान के सामने 5 सौ के नोट का बंडल गिरा हुआ मिला. दिनेश ने पैसे को उठाकर अपने दुकान के मालिक को इसकी जानकारी दी. पांच सौ के नोट के बंडल में कुल 20 हजार रूपये थे जिसकी सूचना बागबेड़ा थाना को दी गई. अपनी जेब से बीस हजार गंवाने वाले सुपरवाइजर अवधेश को घर पहुंचने के बाद पता चला कि उसके पैसे गिर गये हैं, वो तुरंत सड़क पर अपने गिरे हुए पैसे को खोजता हुआ किराना दुकान के पास पहुंचा. जहां दुकानदार पूछताछ कर उसे लेकर थाने पहुंचा. वहीं, बागबेड़ा थाने में पुलिस की मौजूदगी में कर्मचारी दिनेश यादव ने सुपरवाइजर अवधेश को उसके बीस हजार रुपये सौंप दिए. वहीं, मामले में बागबेड़ा थाना प्रभारी राजेश सिंह ने बताया है कि दिनेश यादव को दुकान के सामने बीस हजार गिरा हुआ मिला. दिनेश ने ईमानदारी पूर्वक इसकी जानकारी पुलिस को दी और पैसे खोने वाले सुपरवाइजर को उसके पैसे को लौटाया गया. दिनेश यादव गरीब है लेकिन उसने ईमानदारी की मिसाल पेश की है. इधर, कर्मचारी दिनेश यादव ने कहा है कि लॉकडाउन में सबको पैसे की जरूरत है. इन पैसों पर उनका अधिकार नहीं था, वो मेहनत कर जो कमाते हैं उससे संतुष्ट रहते हैं.

कोई टिप्पणी नहीं: