बिहार : सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी का बयान भ्रामक और अस्पस्ट - माले - Live Aaryaavart

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रविवार, 21 जून 2020

बिहार : सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी का बयान भ्रामक और अस्पस्ट - माले

22 जून को शहीद जवानों के सम्मान में शोक-श्रद्धांजलि दिवस
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पटना 21 जून, भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि पार्टी की केंद्रीय कमिटी ने गलवान घाटी में शहीद हुए बीस जवानों के सम्मान में आगामी 22 जून को देशव्यापी शोक-श्रद्धांजलि दिवस आयोजित करने का आह्वान किया है. इस आह्वान के तहत पूरे राज्य में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. इस बीच, भाकपा-माले ने विगत 19 जून को सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गलवान घाटी व एलएसी संकट पर दिए गए बयान को पूरी तरह भ्रामक व अस्पष्ट बताया है. कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के बयान ने वास्तव में कई और दूसरे सवालों को खड़ा कर दिया है. उन्होंने केवल उन्हीं तथ्यों को स्वीकार किया है जो कहीं से भी अब विवादित नहीं रह गए हैं - कि चीनी सैनिकों के साथ झड़प में एक कर्नल के साथ बीस भारतीय सैनिक मार दिए गए गए हैं. इसके बाद चीन द्वारा चार अधिकारियों सहित दस सैनिकों को रिहा किया गया, हालांकि मोदी सरकार ने कभी स्वीकार नहीं किया कि कोई भी भारतीय सैनिक गायब अथवा चीनी पक्ष के कब्जे में था. प्रधानमंत्री ने प्रभावी रूप से पूर्व में दिए गए विदेश मंत्रालय द्वारा भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के बयान का खंडन कर दिया. विदेश मंत्रालय ने एलएसी पर चीनी घुसपैठ को स्वीकार किया था, जबकि प्रधानमंत्री ने कहा कि न तो हमारी सीमा में कोई घुसा और न ही हमारा कोई पोस्ट किसी के कब्जे में है. यहां तक कि चाइना द्वारा गलवान घाटी पर अपना दावा किया जा रहा है, जो लंबे समय से भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी गलवान घाटी में किसी भी प्रकार के घुसैपठ से इंकार कर रहे हैं. इसका क्या यह मतलब निकाला जाए कि प्रधानमंत्री मोदी चीन के दावे को सही मान रहे हैं? यदि एलएसी पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं हुआ तो फिर हमारे जवान क्यांे और कहां मारे गए?
भाकपा-माले देश की जनता से अपील करती है कि वह एलएसी मामले और चीन पर भारतीय नीति, जो पूरे देश को परेशान कर रहा है, की सच्चाई जानने के लिए सरकार से प्रश्न पूछे. हम एक बार फिर केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह इस मसले पर देश की जनता को अंधकार में न रखे. सरकार ने हमेशा सीमा पर सैनिकों की बात करके भारत के अंदर के संघर्षों को दबाने की कोशिश की है, उसे यह बताना चाहिए कि भारतीय सैनिकों को निहत्थे लड़ाई में क्यों भेजा गया, जिसके कारण कई लोगों की जानें चली गईं.

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