बिहार : अनलॉक-1 लागू होने के बाद ही क्वारंटाइन केंद्र से विक्टर जीचो बाहर आ सके - Live Aaryaavart

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बुधवार, 3 जून 2020

बिहार : अनलॉक-1 लागू होने के बाद ही क्वारंटाइन केंद्र से विक्टर जीचो बाहर आ सके

सदर अस्पताल, छपरा के 6 बेड वाले वार्ड में फिलहाल अकेले रह रहे विक्टर का लैपटॉप, मोबाइल, पासपोर्ट, नकद राशि, कपड़े अप्रैल महीने में चोरी हो गए थे, जिसके बाद छपरा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनका सामान बरामद कर लिया, लेकिन पासपोर्ट सुरक्षित नहीं बरामद कर सकी..
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छपरा,02 जून। और विक्टर जीको 64 दिनों के बाद बिहार में अनलॉक-1 लागू होने पर क्वारंटाइन केंद्र से निकलने में सफल हो गये। वह पूर्वी यूरोपीय देश हंगरी के निवासी हैं। विक्टर जीचो धार्मिक पर्यटक हैं। वह 8 फरवरी को भारत आए थे। उन्होंने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार की यात्रा अपनी हाईटेक साइकिल से की। विक्टर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पास किसी जगह अपना खाना बना रहा था तो स्थानीय लोगों ने मुझे घेर लिया।स्थानीय लोगों की नजर विदेशी नागरिक पर पड़ी थी। वे लोग जो बोल रहे थे, वो मुझे समझ नहीं आ रहा था, लेकिन वे लोग मेरा वीडियो बना रहे थे। मैंने मना किया, लेकिन वे लोग नहीं माने। लॉकडाउन के पहले हफ्ते तक मैं साइकिल से बिना किसी खास परेशानी के उत्तर प्रदेश में चलता रहा, लेकिन 29 मार्च को छपरा प्रशासन ने आगे जाने नहीं दिया। यहां पर मेरी कोरोना की जांच भी की गई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। 14 दिनों के क्वारंटाइन की सीमा तय कर लिये थे। फिर रोक रखा गया। लॉकडाउन की वजह से छपरा में 64 दिन से हंगरी के विक्टर जीको फंसे हुए हैं। उन्हें छपरा सदर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। अब वह जाने देने की गुहार लगा रहे हैं। घर जाने के लिए लीगल तरीका नहीं मिल पाने पर 24 मई को विक्टर ने भागने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। दरभंगा के सिमरी थाने के पास पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। स्थानीय लोगों की नजर विदेशी नागरिक पर पड़ी थी। गांव के लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और छपरा पुलिस को सौंप दिया।

विक्टर के बारे में जानने के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने मढ़ौरा के राजद विधायक जितेन्द्र राय को फोन पर उससे मिलने की बात कही। उसके बाद विधायक के मोबाइल से तेजस्वी ने विक्टर से बात की। विधायक ने बताया कि विक्टर दार्जिलिंग तक जाने के लिए छपरा आया था। लॉकडाउन लगने पर उसे छपरा में क्वारैंटाइन कर दिया गया। पिछले 64 दिनों से उसके साथ एक कैदी जैसा बर्ताव किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने शीघ्र ही उसके घर जाने का प्रबंध कराने का आश्वासन दिया है।छपरा के सदर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रह रहे विक्टर। सदर अस्पताल, छपरा के 6 बेड वाले वार्ड में फिलहाल अकेले रह रहे विक्टर का लैपटॉप, मोबाइल, पासपोर्ट, नकद रुपए और कपड़े अप्रैल में चोरी हो गए थे। छपरा पुलिस ने उनका सामान बरामद कर लिया, लेकिन पासपोर्ट नहीं मिला। हंगरी का नागरिक विक्टर जीको पिछले 64 दिनों से बिहार के छपरा सदर अस्पताल में है।अब विक्टर का सब्र जवाब देने लगा है।अब वह लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि लॉकडाउन (Lockdown) में पर्यटन की मनाही है, इस कारण उसे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सारण के पुलिस अधीक्षक हरिकिशोर राय ने बताया कि, 29 मार्च को विक्टर इस जिले में एक अत्याधुनिक साइकिल से आया था, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी।इसके बाद विक्टर को सदर अस्पताल में रखा गया है. राय कहते हैं कि उसे सिलीगुड़ी जाना है, लेकिन लॉकडाउन के कारण अनुमति नहीं दी जा सकती है। इधर, विक्टर अब जाने के लिए बेचैन हैं। हंगरी के निवासी विक्टर जीको धार्मिक पर्यटक हैं।वे 8 फरवरी को भारत आए थे, जिसके बाद उन्होंने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश की यात्रा अपनी हाईटेक साइकिल से की. छपरा में उनकी कोरोना की जांच की गई जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। सदर अस्पताल, छपरा के 6 बेड वाले वार्ड में फिलहाल अकेले रह रहे विक्टर का लैपटॉप, मोबाइल, पासपोर्ट, नकद राशि, कपड़े अप्रैल महीने में चोरी हो गए थे, जिसके बाद छपरा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनका सामान बरामद कर लिया, लेकिन पासपोर्ट सुरक्षित नहीं बरामद कर सकी। पुलिस अधीक्षक राय कहते हैं कि, आरोपी ने इसके पासपोर्ट को जला दिया था। पुलिस अधीक्षक हालांकि बताते हैं कि, उनका डुपलिकेट पासपोर्ट मंगवा दिया गया है।राय भी स्वीकार करते हैं कि, विक्टर एक पर्यटक हैं और यहां से सिलीगुड़ी साइकिल से जाने के लिए बेचैन हैं।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में पर्यटन पर पाबंदी के कारण अनुमति नहीं दी जा रही है।उन्होंने बताया कि इसके लिए विदेश मंत्रालय से भी निर्देश मांगा गया है। तेजस्वी ने विक्टर से बात करने वाला वीडियो अपने ट्विटर पर भी शेयर किया है।इस वीडियों में विक्टर कहते हैं, 'एक स्वस्थ्य आदमी को अस्पताल में लेकर आए हैं. स्वस्थ्य हालत में इतने दिनों तक अस्पताल में रहना कैसा होता है? मुझे अब फ्री कर दीजिए।' इस वीडियो के साथ तेजस्वी ने लिखा, 'हंगरी के नागरिक विक्टर जीचो से बात की और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया. इसके अलावा जिला प्रशासन को उन्हें बेहतर खाना और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्हें रीलोकेट करने के लिए क्या बेहतर किया जा सकता है, ये जानने के लिए शीर्ष अधिकारियों से बात की. हमारे अतिथि हमारी जिम्मेदारी हैं।.' हंगरी से दार्जिलिंग तक साइकिल यात्रा पर निकले पर्वतारोही विक्टर जीचो लॉकडाउन के कारण छपरा में फंसे  हैं। यहां वह 64 दिनों से क्वारंटाइन था। फिर भी विक्टर का इरादा फौलाद की तरह है। वह दार्जिलिंग तक की यात्रा पूरी करके ही स्वदेश लौटेंगे। छपरा में इतने दिनों से रहने का उन्होंने फायदा उठाया, हिंदी सीख ली। कुछ-कुछ बोल लेते हैं। विक्टर ने गर्म चाय, चलो ठीक है, क्या हाल है, नमस्ते जैसे शब्द सीख लिए हैं। सदर अस्पताल में रहने के दौरान सामान चोरी होने के बाद नया शब्द चोर व चोरी भी सीख लिया है। विक्टर सुबह छह बजे उठकर सबसे पहले कमरे की सफाई करते हैं। चोरी की घटना के बाद अस्पताल के कमरे में किसी बाहरी को प्रवेश नहीं करने देते हैं। सफाई के बाद योगा, फिर नाश्ता व कैंपस में साइकिलिंग उनकी दिनचर्या में शामिल है। बुडापेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इकोनॉमिक्स कॉलेज के इंजीनियरिंग के छात्र विक्टर जिको को पर्वतारोहण एवं फोटोग्राफी का शौक है। इसी शौक में वह पहाड़ों को पार कर फोटोग्राफी करते हुए भारत में पाकिस्तान के रास्ते बाघा बार्डर से पहुंचे। वहां से लद्दाख व हिमाचल प्रदेश होते हुए यूपी के रास्ते बलिया होते हुए छपरा पहुंचे। छपरा आने पर लॉकडाउन में फंसकर रह गए। वह हंगरी से करीब 63 हजार किमी की दूरी साइकिल से तय कर पहुंचे हैं। 15 जुलाई 2019 को हंगरी से अपनी यात्रा शुरू की थी। वह अपना गुरु एलेक्जेंडर सोमा को मानते हैं। जिन्होंने पहली बार हंगरी से  दार्जिलिंग तक की 1842 में यात्रा की थी। दार्जिलिंग में ही उनकी बीमारी के कारण मौत हुई थी। गुरु की तरह वह भी दार्जिलिंग पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देना चाहते हैं।

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