बिहार : और वह सिस्टम की नाकामयाबी के शिकार होकर गुरूवार को दम तोड़ दिया - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

बिहार : और वह सिस्टम की नाकामयाबी के शिकार होकर गुरूवार को दम तोड़ दिया

पश्चिम चंपारण के बेतिया में गुरुवार को निजी स्कूल के शिक्षक की कोरोना से मौत हो गई। उसने बुधवार को जीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड की बदहाली का वीडियो फेसबुक पर अपलोड किया था....
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बेतिया । पश्चिम चम्पारण के जिला मुख्यालय बेतिया स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड की स्थिति पर बुधवार को एक निजी स्कूल के शिक्षक नरेंद्र नाथ वर्णवाल ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो डाला था। वीडियो में उसने लोगों से अपील की थी कि उसे वायरल कर उसकी जान को बचाएं।लाइव वीडियो को वायरल करने पर भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बजबजाती व्यवस्था ने शिक्षक को जीने नहीं दी, वह सिस्टम की नाकामयाबी के शिकार होकर गुरूवार को दम तोड़ दिया।

बेतिया नगर परिषद के वार्ड नम्बर -11 में हरनाथ स्कूल के पास है पुरानी गुदरी।यहीं पर रहते हैं नरेंद्र नाथ वर्णवाल।इनको शारीरिक कष्ट व बाहरी लक्षण दिखने पर 20  जुलाई को भर्ती किया गया।जांचोंपरांत रिजल्ट कोरोना पॉजिटिव निकला।तब उनको आइसोलेशन वार्ड में रखा गया। उन्होंने सोमवार एवं मंगलवार को आइसोलेशन वार्ड की कुव्यवस्था देखी। तब जाकर बुधवार को सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो डाल था। वीडियो में उसने लोगों से अपील की थी कि उसे वायरल कर उसकी जान को बचाएं। शिक्षक नरेंद्र नाथ वर्णवाल ने कहा  कि डाक्टर व नर्स ध्यान नहीं देते हैं।बहुत बार बुलाने पर आते हैं पर सूई नहीं देते हैं।आइसोलेशन वार्ड की कुव्यवस्था को वीडियो करके वायरल कर दिया।यहाँ पर डाक्टरों के द्वारा कोई समुचित इलाज नहीं किया जाता है और तो और अस्पताल प्रशासन के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं होने सदृश्य कई गंभीर आरोप लगाएं थे।ऐसी परिस्थिति में  नरेन्द्र नाथ वर्णवाल ने अपनी जीवन की रक्षा और समुचित इलाज कराने की मांग की थी।यह आलम अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में है।

जानकारी मिली है कि इसके पहले भी एक मरीज ने ऐसा वीडियो डाला था तब अधिकारियों ने कहा था कि मरीज ने घबरा कर वीडियो डाल दिया है। इस बार भी दुर्भाग्य से अस्पताल अधिकारियों ने पूर्व की तरह सोचकर छोड़ दिये। पूर्ववत विषय बनाकर नरेन्द्र नाथ वर्णवाल को उपेक्षित छोड़ दिया। जिसकी संभावना वर्णवाल ने व्यक्त किया था, वह हो गया। अब अधिकारियों की बात पर तथा कार्यकुशलता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मरीज को देखने के लिए 24-24 घंटे तक कोई डॉक्टर नहीं जा रहा हैं। मरीज को इंजेक्शन लगाने वाला भी कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है। साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया जा रहा है।

बता दें कि अगर कोई नागरिक इच्छा मृत्यु की मांग करता है तो लोकतंत्र के चारों स्तंभ कार्यपालिका ,न्यायपालिका, विधायिका और पत्रकारिता में हंगामा हो जाता है। शिक्षक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि ऑक्सीजन खत्म होने से उसकी मौत हुई है। शिक्षक की सात साल की बेटी किडनी की मरीज है। वहीं बेटे पांच साल का है। शिक्षक की मौत से अस्पताल में मौजूद व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अगर उसका सही तरीके से इलाज सही तरीके से किया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।आखिर उनके मौत का जिम्मेदार कौन?      

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. श्रीकान्त दूबे कहना है कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप गलत है। मरीजों को सभी तरह की चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। आइसोलेशन वार्ड में साफ-सफाई की मॉनिटरिंग चिकित्सकों की टीम अपने प्रत्येक विजिट के दौरान करती है। वहां पर साफ-सफाई के लिए कर्मी तैनात हैं। दवा व भोजन भी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आए उनके परिजनों व अन्य लोगों की जांच के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।

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