बिहार : गोपालगंज-सत्तर घाट अप्रोच पुल का ध्वस्त होना - संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार का नतीजा. - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 16 जुलाई 2020

बिहार : गोपालगंज-सत्तर घाट अप्रोच पुल का ध्वस्त होना - संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार का नतीजा.

  • सैनिटाइजर पर 18 फीसदी लगाने वाली सरकार कोरोना को बढ़ावा ही दे रही है.
  • बाढ़ का स्थायी समाधान ढूंढ पाने में अक्षम सरकार अब बाढ़ पीड़ितों को नाव तक नहीं दे रही.
  • महादलित छात्रों को अंग्रेजी सिखाने के नाम पर हुए घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराओ. 
  • पीएमसीएच में कोरोना पीड़िता से बलात्कार बेहद निंदनीय, ‘सुशासन’ हुआ तार-तार
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भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने आज प्रेस बयान जारी करके कहा कि  वित्त मंत्रालय कोरोना को मार गिराने वाले साबुन, डेटाॅल, मास्क और अन्य सैनिटाइजर सामग्रियांे पर कुतर्क करते हुए 18 फीसदी जीएसटी को जायज ठहरा रहा है. इससे कोरोना के प्रति सरकार की संवेदनहीनता व गैरजिम्मेवारी पूरी तरह बेनकाब हो जाती है. सरकार को चाहिए तो यह था कि अभी वह सभी लोगों के लिए फ्री में सैनिटाइजर की सामग्रियां उपलब्ध करवाए, लेकिन अभी भी उसे मुनाफे की ही चिंता ज्यादा सता रही है. हम मांग करते हैं कि इन सामग्रियों को गांव के गरीबों तक सरकार मुफ्त में पहुंचाने की गारंटी करे और लोगों की जिंदगी की रक्षा को प्राथमिकता दे. गोपालगंज-सत्तर घाट पहुंच पुल का पहली ही बारिश में ध्वस्त हो जाना बिहार में संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार की कलई खोलता है. विदित है कि हर साल यहां तटबंध टूटते रहते हैं और सरकार इसके लिए चूहों को दोष देते रहती है. लेकिन वह इस ओर कभी नहीं देखना चाहती है कि इंडिया करप्शन सर्वे 2019 के अनुसार बिहार देश का दूसरा सबसे बड़ा भ्रष्टाचार वाला राज है. विगत 15 वर्षों में बिहार में भ्रष्टाचार और भी ज्यादा संस्थाबद्ध हुआ है, जिसके कारण आज सड़कों व पुलों की यह दुर्दशा है. बाढ़ का स्थायी समाधान के प्रति गैरजिम्मेवार भाजपा-जदयू सरकार अब बाढ़ पीड़ित इलाकों में ग्रामीणों की आवाजाही और संकट के समय प्राण रक्षा के लिए दिए जाने वाले नावों को भी अब देने से इंकार कर दिया  अ वह बाढ़ पीड़ितों को कह रही है कि उसके पास नाव नहीं है. लोग ही अपनेे पैसों से नाव खरीदे. सरकार बाद में केवल नाविकों को मेहनताना देगी. गरीबों के पास भला इतना पैसा कहां है कि वह नाव खरीद पाए और इस समय जब बाढ़ सचमुच तबाही मचा रहा है, यह कैसे संभव है? जाहिर सी बात है कि निर्दयी व गरीब विरोधी भाजपा-जदयू सरकार ने कोरोना की तरह आम लोगों को बाढ़ के सामने भी मरने-खपने के लिए छोड़ दिया है. बिहार में भाजपा-जदयू राज में घोटाले कोई अनहोनी नहीं रह गए हैं. शिक्षा घोटाला इस सरकार का बुनियादी चरित्र है. अभी एससी-एसटी विभाग के मिलीभगत से अंग्रेजी सिखाने के नाम पर ब्रिटिश लिंगवा द्वारा किए गए घोटाले का मामला उजागर हुआ है. 14 हजार 826 छात्रों को अंग्रेजी सिखाने के नमा पर सात करोड़ से अधिक पैसे डकार लिए गए हैं. हम इस घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हैं. जिन लोगों का नाम एफआइआर में आया है, उनकी तत्काल गिरफ्तारी की जाए. भाजपा-जदयू शासन में आज पूरी तरह से बलात्कारी मानसिकता अपने चरम पर है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नाक के ठीक नीचे राज्य के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल पीएमसीएच में कोरोना पीड़िता के साथ किया गया बलात्कार ‘सुशासन‘ के दावे को तार-तार कर रहा है. फिर भी नीतीश जी को किसी प्रकार की लज्जा नहीं आती. बिहार को में अब भाजपा-जदयू की वैकल्पिक सरकार चाहिए.

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