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सोमवार, 27 जुलाई 2020

एसी में रहने वाले 'माननीय' क्षेत्र में जाकर जनता को मुंह दिखायी करने लगे हैं

election-disaster
मुजफ्फरपुर. एक समय आता है जब विधानसभा क्षेत्र के लोग अपने जन प्रतिनिधियों से विधानसभा क्षेत्र में किए गए विकास व कल्याण संबंधित कार्यों का ब्यौरा मांगने लगते हैं? बस यहीं पर रूकते नहीं वरण पांच साल में कितनी बार क्षेत्र में भ्रमण किये? बिहार में चुनाव अक्टूबर-नवम्बर में होने वाला है.एसी में रहने वाले 'माननीय' क्षेत्र में जाकर जनता को मुंह दिखायी करने लगे हैं. दीघा पटना में एक अल्पसंख्यक मोहल्ला के लोगों ने जलभराव को निकालन व जर्जर सड़क को बनाने की मांग को लेकर 'रोड नहीं तो वोट नहीं 'का बैनर लगाए थे.दीघा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक संजीव चौरसिया को जनता के खौफ के शिकार होना पड़ा. पांच साल से समस्या पड़ी हुई है.अल्पसंख्यकों पर तरस खाकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राय ने दो पंपिंग मशीन लगा दिये हैं और जर्जर मार्ग पर रोड़ा डलवा दिया है. इस बार सकरा विधानसभा के राजद विधायक लाल बाबूराम जनता की दरबार में शर्मिंदा हो गये. अपने ही विधानसभा क्षेत्र में जनता के बीच घिरे विधायक पानी-पानी हो गए. बरसात के समय में जनता की बौछार से तर ब तर हो गए. इन दिनों बिहार के कई इलाकों में बाढ़ से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं.मुजफ्फरपुर के जोगनी गांव में भी बाढ़ का पानी घुसने की आशंका जताई जा रही थी. हालांकि, ग्रामीणों ने समय रहते हालात काबू करने की कोशिश की और इसमें कामयाब भी रहे.जोगनी गांव के 'जल प्रलय' से बचने की खबर जैसे ही सुर्खियां बनीं तो इस इलाके के विधायक लाल बाबूराम तुरंत अपने विधानसभा क्षेत्र में पहुंच गए. विधायक जी अपने क्षेत्रवासियों का हाल जानने पहुंचे थे लेकिन वहां लोगों ने जिस तरह से उनका स्वागत किया गया, उसे देखकर आरजेडी विधायक की बोलती जरूर बंद हो गई.

अपने ही विधानसभा क्षेत्र में घिरे आरजेडी विधायक
जनता के सवालों से घिरे ये हैं मुजफ्फरपुर के सकरा विधानसभा सीट से आरजेडी के विधायक लाल बाबूराम.जानकारी के मुताबिक, जोगनी गांव के बाढ़ से बचने की खबर सामने आने के बाद विधायक जी यहां के लोगों का हाल जानने के लिए पहुंचे थे. हालांकि, तब उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि जनता उनसे किस कदर नाराज है.जैसे ही विधायक लाल बाबूराम गांव में पहुंचे स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया.उन्हें ऐसी खरी खोटी सुनाई कि विधायक जी के पसीने ही छूट गए.

जनता के सवालों से विधायक जी की बोलती हुई बंद
ग्रामीणों का आरोप है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में वोट लेने के बाद विधायक लाल बाबूराम पहली बार जोगनी गांव आए हैं. उनका कहना था कि विधायक जी को एक बार भी हम लोगों का हाल जानने का समय नहीं मिला. बस इसी को लेकर उन्होंने विधायक पर जमकर सवाल पूछे.एक दिन पहले ही मुजफ्फरपुर के जोगनी गांव में प्रशासन और समाज की भागीदारी की नई मिसाल देखने को मिली. हुआ ये कि जोगनी गांव के किनारे से बहती हुई कदाने नदी की तेज धार तटबंध को तोड़ जल प्रलय का संकेत दे रही थी.अगर तटबंध पर जल के बहाव को रोकने में थोड़ी भी देर होती तो लगभग 3 गांव जलमग्न होने की कगार पर पहुंच जाते.ऐसे में तुरंत कार्रवाई की गई.

ऐसे 'जल प्रलय' से बचा जोगनी गांव
जिला पार्षद सुरेश राय, पंचायत समिति के सदस्य आशुतोष ठाकुर के साथ-साथ सकरा प्रखंड के वरिष्ठ अधिकारियों ने मोर्चा संभाला. एक समय नामुमकिन सा लगने वाला लक्ष्य 4 घंटे की मेहनत के बाद हासिल हो गया.लगभग 100 मीटर की दूरी पर 3 फुट ओवरफ्लो को ठीक करना आसान काम नहीं था, लेकिन समाज के सहयोग से इस नामुमकिन काम को हासिल कर लिया गया. नदी जोगनी गांव के तीन तरफ से बहती है.

तटबंध टूटने पर ग्रामीणों और प्रशासन ने उठाए कदम
इस बार जो बाढ़ की विभीषिका यहां के लोग झेल रहे हैं वह 1987 के जल प्रलय की याद दिला दे रही है.कमजोर पड़े बांध और पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने लगभग 4 स्थानों पर बांध को क्षतिग्रस्त कर दिया.इसके साथ-साथ नदी में तेज जल प्रवाह के कारण कई जगहों पर पानी बांध के ऊपर से बहने लगा था. लगभग 24 घंटे बीत जाने के बाद भी जब इसे रोका नहीं जा सका तो प्रशासन ने मोर्चा संभाला.बांध के बहाव को रोकने के बाद आसपास के गांव के लोग राहत महसूस कर रहे हैं.

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