बिहार : एक बार नहीं दो बार अधूरा काम रह गया शिवाजी नगर में - Live Aaryaavart

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शनिवार, 25 जुलाई 2020

बिहार : एक बार नहीं दो बार अधूरा काम रह गया शिवाजी नगर में

नागरिक जिस मार्ग से आवाजाही करते थे.तबतक मार्ग अस्तित्व में था.अब तो वहां पर नाला और बरसाती पानी का कब्जा हो गया है.बहुत ही खराब स्थिति में मार्ग है. यहां के कुछ सज्जन लोग मिलकर दो बार पक्की सड़क और भूगर्भ नाला बनवाने का प्रयास किये थे.एक बार पश्चिमी दीघा ग्राम पंचायत के पूर्व पंचायत समिति अरविंद वर्मा और दूसरी बार पंचायत से पटना नगर निगम बनने के बाद वार्ड नम्बर 22 A के वार्ड पार्षद दिनेश कुमार के द्वारा प्रयास किया गया. दोनों बार काम अधूरा ही रहा.लगता है मार्ग की किस्मत में कीचड़-कांदो ही लिखा है....
shivaji-nagr-patnaपटना. राजधानी पटना से सटे दीघा है.यहां के दीघा मालदह आम प्रसिद्ध हैं.हालांकि अब बाबू लोगों का मकान बनने लगा है,जिसके कारण आम का बगीचा खत्म होने लगा है.इसी तरह से उत्पन्न हुआ है शिवाजी नगर.यहां पर आवाजाही सामने से नहीं कर पा रहे हैं लोग.दो ' यादव' की जमीन आमने-सामने है.एक ने मकान बनाकर रहने लगा है.भूखंड वाले का कहना है कि जो घर बना लिया है वह राहगीरों की जमीन पर घर बना लिया है.करीब तीन फीट हड़प लिया है.इसके कारण गाड़ा गया बिजली पोल पर तार तानने को मना कर दिया हैं. इसके कारण लोगों को बैकफुड जाकर लाइन लाने का प्रयास हो रहा है.  नागरिक जिस मार्ग से आवाजाही करते थे.तबतक मार्ग अस्तित्व में था.अब तो वहां पर नाला और बरसाती पानी का कब्जा हो गया है.बहुत ही खराब स्थिति में मार्ग है. यहां के कुछ सज्जन लोग मिलकर दो बार पक्की सड़क और भूगर्भ नाला बनवाने का प्रयास किये थे.एक बार पश्चिमी दीघा ग्राम पंचायत के पूर्व पंचायत समिति अरविंद वर्मा और दूसरी बार पंचायत से पटना नगर निगम बनने के बाद वार्ड नम्बर 22 A के वार्ड पार्षद दिनेश कुमार के द्वारा प्रयास किया गया. दोनों बार काम अधूरा ही रहा.लगता है मार्ग की किस्मत में कीचड़-कांदो ही लिखा है. जमीन पर दावेदारी करने वाले ही राह में रोड़े अटकाने का काम कर रहे हैं.दोनों सजातीय हैं. दोनों आमने-सामने वाला ही हैं. एक आमने वाला सामने वाला से कहता है कि राह में अधिक जमीन हथिया के घर बना लिये हैं.सामने वाला कहते है कि खतियानी वाजिब जमीन पर ही घर बनाये हैं.सरकारी व निजी अमीन बुलाकर खतियान दिखाकर मसला को सलटा ले.तय सीमा पर अमीन आ गये पर जमीन पर दावेदारी करने व राह में रोड़े अटकाने वाले नहीं आए.जिसके कारण कई दशक से मसला सलटा नहीं और हजारों घर परेशान हैं. अब तो मिट्टी वाली राह पर नाली और बरसाती पानी का कब्जा व जलभराव होने से एम्बुलेंस व ट्रैक्टर का प्रवेश नहीं हो पा रहा है.इसके कारण रोगी को हाथ में टांगकर संक्रीण राह से गुजरकर पार करना पड़ता है.मकान बनवाले दोगुना -तिगुना दाम देकर समान मंगवाते हैं.

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