बिहार : शांतिपूर्ण धरना को पुलिस ने हिंसात्मक बना दिया - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 6 अगस्त 2020

बिहार : शांतिपूर्ण धरना को पुलिस ने हिंसात्मक बना दिया

  • गैरबराबरी वेतन को बराबरी करने मगर उस मांग को पूरी करने के बदले पुलिस ने आंदोलनकारियों को दौरा-दौरा कर पिटती रही.पुलिस इतने रूकी नहीं पांच-छह लोगों को हिरासत में ले ली....
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पटना (आर्यावर्त संवाददाता) .बिहार में गांधी,विनोवा,जयप्रकाश के मार्ग पर अंहिसात्मक आंदोलन अखिल भारतीय फार्मासिस्ट संघ (एबीपीए) बिहार के सदस्य और बिहार राज्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़ी ए.एन.एम.29 जून,2020 से बेमियादी हड़ताल पर थे. आज 39 वें दिन आंदोलनकारी फार्मासिस्ट व  ए.एन. एम. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय के आवास के पास जाकर पहुंचे.वहां धरना शुरू हो गया.ज्ञापन देने की तैयारी होने लगी.इतने में पुलिस तनतनाकर आ गयी. शांतिपूर्ण धरना को पुलिस ने हिंसात्मक बना दी.आंदोलनकारी मंत्री जी से गुहार लगाने गए थे, गैरबराबरी वेतन को बराबरी करने मगर उस मांग को पूरी करने के बदले पुलिस ने आंदोलनकारियों को  दौरा-दौरा कर पिटती रही.पुलिस इतने रूकी नहीं पांच-छह लोगों को हिरासत में ले ली. इस बीच खबर है कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय के आवास के पास धरना देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों काे पुलिस ने लाठी के बल पर खदेड़ दिया. पुलिस ने कई  स्वास्थ्यकर्मियों को पिटायी कर दी.पांच-छह से अधिक  स्वास्थ्यकर्मियों  को हिरासत में लिया गया.  वेतनमान में विसंगति को लेकर फार्मेसिस्ट और ए.एन.एम.39 दिनों से हड़ताल पर थे.ऐसा प्रतीक हो रहा है कि कोरोना काल में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय बहुत ही व्यस्त थे.पुलिस से मार खाने वाले  स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बैठक कर आश्वासन दिये. समस्या का समाधान करने के लिए एक कमिटी बनायी जाएगी. बता दें कि ए.एन.एम.का काम 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों में विशिष्ट रोग की पहचान और उनके लिए उपचार सुनिश्चित करना है. कोरोना महामारी में इन्होंने अगली पंक्ति के कर्मियों के तरह काम किया है.कोरोना संदिग्धों के लिए डोर-टू-डोर थर्मल स्क्रीनिंग में लगे हुए हैं.इस दौरान इनकी ड्यूटी रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और क्वांरटाइन सेंटर में लगाई गई.

राज्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), 2015 के तहत, 2136 आयुष चिकित्सक, 1068 फार्मासिस्ट और 1068 ए.एन.एम.की भर्ती की गई थी. प्रतिमाह इनकी निर्धारित वेतनमान क्रमश: 20,000 रुपए, 12000 रुपए और 11,500 रुपए थी.ये परियोजना आधारित पद हैं. परियोजना की निगरानी राज्य स्वास्थ्य सोसायटी (एसएचएस) के द्वारा की जाती है. एसएचएस के द्वारा ही राज्य में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के गैर-सरकारी संगठन/ सरकारी-निजी भागीदारी (पीपीपी) घटकों का प्रबंधन किया जाता है. इसमें अनुबंधों को मूर्त रूप देना, पैसा का भुगतान करना और प्रदर्शन की निगरानी शामिल है. अखिल भारतीय फार्मासिस्ट संघ (एबीपीए), बिहार चैप्टर के राज्य सचिव राजीव सिन्हा गांव कनेक्शन से कहते हैं, "दिसंबर 2018 में, राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा भर्ती किए गए संविदा फार्मासिस्टों का वेतन 37,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया.लेकिन आरबीएसके द्वारा भर्ती किए गए एएनएम और फार्मासिस्टों को वेतन बस 27,300 रुपए किया गया." सिन्हा आगे कहते हैं, "राज्य सरकार ने हमारे साथ भर्ती आयुष डॉक्टरों का वेतन बढ़ाकर 44,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया. फिर ए.एन.एम.और फार्मासिस्टों को समान और सम्मानजनक वेतन देने में क्या समस्या है?" बिहार राज्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम सहायक नर्स प्रसाविका संघ की सचिव उषा कुमारी गांव कनेक्शन से कहती हैं, "हम यह नहीं कहते हैं कि सरकार तुरंत मांगों को पूरा ही कर दे.लेकिन कम से कम वह हमारी मांगों पर विचार करे और एक आधिकारिक आश्वासन दे.यह कठिन समय है और हम समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ योगदान देना चाहते हैं."

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