विशेष : कोविड-19 के संक्रमण और बाढ़ के विनाश लीला - Live Aaryaavart

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रविवार, 9 अगस्त 2020

विशेष : कोविड-19 के संक्रमण और बाढ़ के विनाश लीला

पूर्वी चंपारण के मेहसी प्रखंड के सामाजिक कार्यकर्ता हैं अमर। उनका कहना है कि गत दिनों आपके साथ साझा किए अपने विचार से कुछ ज्वलंत समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश किया था जैसा कि आप अवगत हैं कि बिहार इन दिनों दो बड़ी चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। पहली चुनौती वैश्विक महामारी के रूप में कोविड-19 का बढ़ता संक्रमण और दूसरा बाढ़। बाढ़ से बेहाल हो रहे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। आमदनी तबाह हो रही है और  फसलें बर्बाद हो गई है।उपरोक्त दोनों कारणों से एक बड़ी आबादी त्रस्त है। एक तरफ जहाँ बच्चों की शिक्षा दीक्षा बाधित है वही उनके पोषण के लिए संचालित आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद पड़े हैं । एक जानकारी के अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषाहार और स्कूल पूर्व शिक्षा में नाम अंकित करीब एक करोड़ बच्चों का नाम दर्ज है किंतु सरकारी आंकड़े के मुताबिक अभी तक कुल 2700000 बच्चों के या उनके अभिभावकों के खाते में पोषाहार की राशि भेजी गई है शेष बच्चों के या उनके अभिभावकों के खातों में शीघ्र अति शीघ्र राशि भेजने की व्यवस्था की जाए ताकी बच्चों का पोषण बाधित ना हो पाए। इसी प्रकार राज्य के कुछ जिलों में अभी तक स्कूलों में नाम अंकित बच्चों के बीच मिड डे मील के रूप में बच्चों या उनके अभिभावकों तक राशन की आपूर्ति हो पाई है शेष बचे स्कूलों में जहां राशन की आपूर्ति बच्चों या उनके अभिभावकों को नहीं की जा सकी है उनके बीच में आपूर्ति को सुनिश्चित किया जाए इसी प्रकार हर मांह सरकार की ओर से जन वितरण प्रणाली के दुकानों से वितरण होने वाले खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति को भी निर्बाध रूप से जारी रखा जाए। फलस्वरूप मिड डे मील और पोषण कार्यक्रम के बाधित होने से जहां बच्चों के समक्ष अनेक चुनौतियां मुंह खोले खड़ी दिख रही है वही आमदनी की सारी गतिविधियों बाधित होने के कारण लोगों के क्रय शक्ति में हराश देखा जा रहा है।  हराश के कारण अनेको तरह की कठिनाइयां उनके समक्ष सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। हम सरकार से और समाज से विनंती पूर्वक आग्रह करना चाहते हैं कि ऊपर लिखित चुनौतियों से मुकाबला के लिए त्वरित ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

1.  कोविड-19 के संक्रमण और बाढ़ के विनाश लीला के प्रभाव को कमतर करने हेतु बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन के साथ-साथ स्वच्छता कार्यक्रम राज्य से लेकर गांव तक संचालित किया जाए साथ ही अक्सर बाढ़ के समय  और  जलजमाव के कारण  प्रभावित क्षेत्रों में  डूब कर  मरने की  घटनाओं में  कमी लाने,आकाशीय बिजली  से बचाव  हेतु  सामुदायिक स्तर पर  प्रशिक्षकों का दल  एवं  तैराको एवं गोताखोरो का समूह  हर जिले में  तैयार करने  कि दिशा में  ठोस पहल करने की आवश्यकता है।जागरूकता के माध्यम से जहां लोगों को कोरोना के बढ़ते संक्रमण और बाढ़ और  जलजमाव के कारण फैलने वाली संक्रामक बीमारियों के रोकथाम हेतु जन समुदाय को  जागरूक करने में बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य स्वास्थ्य समिति, रेड क्रॉस तथा राज्य के अंदर कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं, सामाजिक संस्थाएं, ग्राम पंचायतें, नगर निकाय, आशा, आंगनवाड़ी, और स्थानीय संस्थाओं को इन कार्यों में एक साथ हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। बड़े पैमाने पर ब्लीचिंग और  चुना का सम्मिश्रण कर  छिड़काव तथा ओ आर एस के साथ-साथ बच्चों के पोषण, टीकाकरण और अन्य जरूरी उपाय करने की आवश्यकता है।

2.  बाढ़ से प्रभावित  क्षेत्रों के  सभी स्कूलों को बेहतर बनाया जाए तथा उसकी साफ सफाई मरम्मत और रखरखाव कराई जाए।  नगर निगम, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों के माध्यम से जल निकासी और जल स्रोतों की स्वच्छता के साथ-साथ उसके सफाई हेतु कदम उठाए जाएं।

3.  फिर से आवासीय परिसरों के साथ साथ सभी सरकारी भवनों को सैनिटाइज कराया जाए। उसकी मरम्मत और रखरखाव को और बेहतर बनाया जाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों, रेफरल अस्पताल और जिला अस्पतालों को और भी सुसज्जित तथा आने वाली चुनौतियों के हिसाब से उसमें आवश्यक सुधार किए जाएं।

4.  बड़े पैमाने पर नदियों पर बने सभी तटबन्ध, बांध,  नहर ,पईन इत्यादि को पुनर स्थापन और  मजबूत करना सुनिश्चित किया जाए। जल निकासी और जल ग्रहण क्षेत्र को बिना किसी हिचक के अतिक्रमण मुक्त कर उसकी गहराई,  उसकी सफाई और उसके दोनों किनारे बड़े पैमाने पर फलदार-फूलदार औषधीय तथा इमारती वृक्षों का रोपण किया जाए। गंगा की पूरक नदियों के बहाव को अविरलता प्रदान की जाए। वही गंडक,  बूढ़ी गंडक , लाल बकिया,  बागमती, कमला, कोसी , महानंदा , घाघरा,  फल्गु जैसी तमाम नदियों को विस्तार देने वाली छोटी-छोटी नदियों की साफ सफाई के  साथ साथ उनके बहाव में भी  अविरलता प्रदान करने हेतु कदम उठाए जाएं।
  
5. विकास की तमाम योजनाओं खासकर नल-जल योजना, गली नाली योजना, सड़क और पुल पुलिया योजना इत्यादि को बाढ़ के प्रभाव से मुक्त रखने की दिशा में  विचार करने की आवश्यकता है। क्योंकि हर वर्ष आने वाले बाढ़ के कारण करोड़ों- करोड़ों रुपया राज्य के खजाने से जो उपरोक्त योजनाओं पर खर्च होते हैं उस पर पानी फिर जाता है।

अतः विकास की योजनाएं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष ढंग से बनाई जाए। इतना ही नहीं इन क्षेत्रों से गुजरने वाले राज्य मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्गों, रेल मार्ग और हवाई पट्टियों को भी उपरोक्त चुनौतियों को ध्यान में रखकर योजना का रूपांकन किया जाए। इस प्रकार हम बिहार को गतिशील और विकसित बिहार, विपदाओं और आपदाओं से सुरक्षित बिहार को बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे ।  मुख्यमंत्री  जी का यह सपना हर खेत तक सिंचाई का  संसाधन पहुंचाने का इसके लिए बहुत दूर नहीं सिर्फ 40-50 वर्ष पीछे लौटने की आवश्यकता है।  जब हमारे पूर्वजों ने समाज ने  समुदाय ने और तब की सरकारों ने भी खेती के परंपरागत संसाधन के रूप में चेवर, झील, तालाब, पोखर, कुआं , आहर , पईन, और सरेही नदी नालो का निर्माण और उसके रखरखाव की जवाबदेही तब के समाज अपने ऊपर जवाबदेही लेकर उसे सुनिश्चित करता था। क्या उस दिशा में कोई पहल किया जा सकता है?अगर ऐसा हो सकता है तो इसके लिए सामुदायिक स्तर पर प्रयास करने की दिशा में पहल को आगे बढ़ाया जा सकता है। हमें फिर से समाज के अभिक्रम को जगाने की जरूरत है और सरकार- समाज के अभिक्रम को बढ़ाने में मददगार हो इस विचार के साथ अगर हम आगे बढ़ेंगे और निश्चय ही पानी में तैरने वाला हमारा समाज कभी भी डूब नहीं सकता।


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अमर
सामाजिक कार्यकर्ता
पूर्वी चंपारण के मेहसी प्रखंड के सामाजिक कार्यकर्ता हैं अमर।

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