वाराणसी : स्मृति ईरानी ने किया वर्चुअल कारपेट फेयर का उद्घाटन - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

वाराणसी : स्मृति ईरानी ने किया वर्चुअल कारपेट फेयर का उद्घाटन

  • कोरोनाकाल में हुए क्षति की भरपाई करेगा वर्चुअल फेयर  निर्यात बढ़ाने में सरकार करेगी हरसंभव मदद: स्मृति 
  • सीईपीसी के तत्वावधान में आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो का 40वां फेयर 
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वाराणसी (सुरेश गांधी)  कोरोनाकाल के इस मंदी के दौर से निर्यातकों को उबारने के लिए कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पांच दिवसीय वर्चुअल कारपेट फेयर का उद्घाटन केंद्रीय वस्त्र और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ज़ूबिन ईरानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। इस मौके पर श्रीमती ईरानी ने देशभर के कालीन निर्यातकों को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोनाकाल की मंदी में हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह एक छोटा सा प्रयास है। अगर सफलता मिली तो इसे और विस्तार दिया जायेगा। उन्होंने साफतौर पर कहा कि अगले एक साल तक कोरोना का संकट बना रहेगा। इसलिए निर्यातकों को चाहिए कि वह हाथ पर हाथ रखे बैठे रहने के बजाय कुछ ना कुछ करते रहे। इस तरह के प्रयासों के लिए सीईपीसी चेयरमैन एवं उनके सदस्य बधाई के पात्र है जिन्होंने संकट में भी अवसर खोजने का तरीका ढूढ़ निकाला है। श्रीमती स्मृति ज़ूबिन ईरानी ने कहा कि “कोशिश करने वाले की कभी हार नही होती“। उन्हें खुशी है कि कारपेट इंडस्ट्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास“ दृष्टिकोण का अनुसरण कर रहा है। अंत में उन्होंने निर्यातकों से कहा कि सरकार उद्यमियों के साथ है और निर्यात वृद्धि के लिए उनका मंत्रालय परिषद को पूर्ण समर्थन देती रहेगी।  सीईपीसी चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने कहा कि यह 40वां इंडिया कारपेट एक्सपो के प्रथम वर्चुअल संस्करण में हस्तनिर्मित कालीनों और अन्य फ्लोर-कवरिंग के लिए एक विशेष व्यापार मेले का आयोजन किया गया है। इस मौके पर विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) आईएएस शांतमनु की गरिमामयी उपस्थिति उद्योग के लिए काफी लाभकारी है। इस दौरान उमर हमीद, उमेश कुमार गुप्ता, ओंकारनाथ मिश्रा, संदीप कटारिया, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, अब्दुल रब, मो वासिफ अंसारी, हुसैन जाफर हुसैनी, फिरोज वज़िरी, संजय गुप्ता, श्रीराम मौर्य, बोधराज मल्होत्रा, सतीश वट्टल सहित प्रशासनिक समिति के सदस्यो, निर्यातको एवं अन्य गणमान्य लोग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उपस्थित थे। 


श्री सिंह ने बताया कि इंडिया कारपेट एक्सपो एशिया में सबसे बड़ी हस्तनिर्मित कालीन मेलों में से एक है, जहां खरीदारों के लिए एक ही छत के नीचे सर्वश्रेष्ठ हस्तनिर्मित कालीनों और अन्य फर्श कवरिंग उपलब्ध होती हैं। 162 प्रदर्शक अपने उत्पादों को प्रदर्शनी में प्रदर्शित कर रहे हैं और 58 देशों से 418 विदेशी खरीदार ने पहले ही पंजीकरण कराया है। उनकी भागीदारी के लिए लॉगिन-पासवर्ड भी प्रदान कर दिया गया है। यह वर्चुअल प्रदर्शनी भारतीय उत्पादों तथा आयातको के बीच की खाई को पाटने और दुनिया भर में महामारी के बाद के समय मे हस्तनिर्मित कालीनों और फर्श कवरिंग की मांग को बढ़ाने मे मददगार साबित होगा। श्री सिंह ने बताया कि 5 दिवसीय एक्सपो 25 अगस्त तक व्यापार के लिए खुला रहेगा। यह प्रदर्शनी एक वेबसाइट पर चल रही हैं और उपयोगकर्ता के अनुकूल 3 डी इमर्सिव वर्चुअल एक्सपीरियंस, एनवायरनमेंट का उपयोग करते हुए इनोवेटिव इंटरैक्टिव टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए आईओएस और एंड्रॉइड के सभी वेब ब्राउजर पर देखा जा सकता हैं। हालांकि एक्सपो प्रदर्शकों और खरीदारों के लिए 24 घंटे लाइव रहेगा, लेकिन प्रदर्शकों और विदेशी खरीदारों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग्स की सुविधा के लिए समय 12ः15 बजे दोपहर से 12ः00 मध्यरात्रि तक खुला रहेगा। श्री सिंह ने कहा कि कोविड-19 परिदृश्य में यात्रा करना हमारे निर्यातकों और विदेशी खरीदारों दोनों के लिए संभव नहीं है, इसलिए भारत कालीन एक्सपो का यह वर्चुअल संस्करण ऑनलाइन मीटिंग के जरिये दीर्घकालिक व्यापार संबंध स्थापित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कालीन खरीदारों, आर्किटेक्ट्स और भारतीय कालीन निर्माताओ ओर निर्यातको के लिए एक आदर्श मंच हैं। यह प्रदर्शनी हस्तनिर्मित कालीन के भारतीय निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। श्री सिंह ने कहा कि इसमें भाग लेने वाले निर्माताओं और निर्यातकों के लिए जबरदस्त व्यावसायिक अवसर हैं। क्योंकि दुनिया भर से हस्तनिर्मित कालीनों के विभिन्न प्रमुख खरीदार प्रदर्शनी में भाग लेंगे और निकट भविष्य में 1000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर निष्पादित होने की उम्मीद है। परिषद का प्रयास है कि कालीन आयातकों के साथ-साथ निर्माता-निर्यातकों को भी विशेष कारोबारी माहौल प्रदान किया जाए, जो अंततः इस अत्यधिक श्रम प्रधान ग्रामीण, लघु एवं कुटीर उद्योग आधारित क्षेत्र में कार्यरत 20 लाख से अधिक बुनकर और कारीगर लाभान्वित होंगे। सीईपीसी के अधिशासी निदेशक संजय कुमार ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका अंतिम लाभ बुनकरों और उनके परिवारों को मिलेगा। हम इस आयोजन की भव्य सफलता की आशा करते हैं। हम पहले ही योजना बना चुके हैं और इस तरह के अन्य आयोजनों की भी मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है। 

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