बिहार : लालू राज में बिहार की हालत अफ्रीकी देशों से भी खराब : सुशील मोदी - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

मंगलवार, 22 सितंबर 2020

बिहार : लालू राज में बिहार की हालत अफ्रीकी देशों से भी खराब : सुशील मोदी

लोग बिहारी कहलाने में शर्म महसूस करते थे 
bihar-worst-in-lalu-raj-sushil-modi
पटना : बिहार सरकार के सात विभागों की अनेक योजनाओं के उद्घाटन,शिलान्यास के लिए आयोजित वचुअल समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2005 के पहले बिहार की हालत अफ्रीकी देशों से भी ज्यादा खराब थी। लोग बिहारी कहलाने में शर्म महसूस करते थे और अपनी पहचान छुपाते थे। बड़ी मुश्किल से उस अंधेरी सुरंग से आज बिहार को निकाल कर यहां तक लाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह से बिहार की मदद कर रहे हैं, वैसे में अब बिहार का विकास कभी रूकेगा नहीं। आज कोरोना, चमकी बुखार से लेकर सड़क, बिजली, पानी के साथ ही बाहर से आए मजदूर और बाढ़ को भी विपक्ष मुद्दा नहीं बना पा रहा है। 



सुशील मोदी ने कहा कि शुरुआत में विपक्ष ने कोरोना को मुद्दा बनाने का प्रयास किया,मगर आज प्रतिदिन डेढ़ लाख से ज्यादा जांच हो रही है, एम्स सहित अन्य अस्पतालों में बेड खाली पड़े हैं। सरकार की सजगता की वजह से ही इस साल चमकी बुखार से बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकी है। 15 लाख से ज्यादा मजदूरों को ट्रेन से उनके घरों तक पहुंचाया गया,उन्हें 8 महीने का मु्फ्त अनाज दिया जा रहा है। 20 लाख बाढ़ पीड़ितों को उनके खाते में 6-6 हजार रुपये भेजे गए हैं। इको टूरिज्म के नए स्थल के तौर पर जिस बेहतर ढंग से करकटगढ़, तुतला भवानी और वाल्मीकिनगर आदि का विकास किया गया है, वह कल्पना से परे हैं। मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि अगर आगे मौका मिलता है तो वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में मंत्रिपरिषद की पहली बैठक जरूर आयोजित की जाए ताकि पूरे देश का ध्यान आकृष्ट हो। पटना में जिस राष्ट्रीय डाल्फिन शोध संस्थान का शिलान्यास किया जा रहा है वह भारत का ही नहीं बल्कि एशिया का पहला संस्थान होगा।

कोई टिप्पणी नहीं: