शालीनता और सारगर्भिता से अपनी बात रखते हैं हरिवंश : मोदी - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 15 सितंबर 2020

शालीनता और सारगर्भिता से अपनी बात रखते हैं हरिवंश : मोदी

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नयी दिल्ली 14 सितंबर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता दल यूनाइटेड के श्री हरिवंश को दोबारा राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई देते हुये आज कहा कि वे शालीनता और सारगर्भिता से अपनी बात रखते हैं तथा पिछले कार्यकाल में सदन में उनकी भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष रही। श्री सिंह के आज उच्च सदन का उपसभापति निर्वाचित होने पर श्री मोदी ने कहा कि उपसभापति को लेकर जिस तरह का सम्मान उनके मन में हैं उसी तरह का भाव सदन में सभी सदस्यों का भी है। उन्होंने पूरे सदन और देश की जनता की ओर से श्री हरिवंश को बधाई देते हुये कहा कि हमेशा उनके मन में उप सभापति के लिए बहुत सम्मान रहा है। ये भाव उनकी अपनी कमाई हुयी पूंजी है। उनकी कार्यशैली और सदन को चलाने को लेकर सबका जो भरोसा था उसे श्री हरिवंश ने पूरा किया है। इसको लेकर पहले कुछ लोगों में आशंका थी लेकिन जिस तरह से श्री हरिवंश ने अपने पिछले कार्यकाल में सदन का संचालन किया उससे लोगों की सभी आशंकायें दूर हो गयी और सदन में उनकी भूमिका निष्पक्ष रही है। उन्होंने कहा कि श्री हरिवंश के सांसद बनने के बावजूद भी उनमें पत्रकार जीवित हैं।



श्री मोदी ने कोेरोना के मद्देनजर नयी व्यवस्था में सदन के संचालन को लेकर कहा “ उनको विश्वास है कि हमसभी सतर्कता बरते हुये सभी दिशा निर्देशों का पालन करते हुये अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि जब पहली बार श्री हरिवंश निर्वाचित हुये तब उनको बधाई देते हुये उन्होंने जो बात कही थी उसे फिर दोहरा रहे हैं कि खिलाड़ियों से ज्यादा अम्पायर परेशान रहते हैं। पिछले वर्ष सदन ने 10 वर्षाें में सबसे ज्यादा कामकाज का रिकार्ड बनाया है। उत्पादकता के साथ ही सकारात्मकता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि श्री हरिवंश उस बिहार से हैं जो जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह की धरती है। उप सभापति का गांव जयप्रकाश नारायण जी का गांव है जो आरा बलिया और छपरा जिले में गंगा का दियारा है। जहां आना जाना आसान नहीं था। उन्होंने श्री हरिवंश के पुस्तकों के प्रति लगाव का उल्लेख करते हुये कहा कि जब उन्हें पहली बार छात्रवृत्ति मिली थी तो उनके परिवार को यह उम्मीद थी कि वे पूरा पैसा लेकर घर आयेंगे लेकिन श्री हरिवंश उस पैसे से पुस्तकें खरीद कर ले गये।

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