आलेख : आधुनिक भारत के भाग्यविधाता : नरेन्द्र मोदी - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 17 सितंबर 2020

आलेख : आधुनिक भारत के भाग्यविधाता : नरेन्द्र मोदी

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नरेन्द्र दामोदरदास मोदी, एक ऐसा व्यक्तित्व, एक ऐसा नाम, जिसने सम्पूर्ण विश्व मे भारत की शान को स्थापित किया है। दिनांक 17 सितम्बर 1950 के दिन वडनगर जिला मेहसाना (बम्बई), जो अब गुजरात मे है, के निवासी पिता दामोदर दास मूलचन्द मोदी और मां श्रीमती हीराबेन को इस महान व्यक्तित्व और अभूतपूर्व प्रतिभा का धनी भारत के लाड़ले सपूत नरेन्द्र भाई मोदी का जन्म हुआ था। उस समय किसी ने स्वप्न मे भी यह कल्पना नही की होगी कि एक अति-पिछड़े परिवार का रेल्वे स्टेशन पर ’’चाय-गर्म’’ की आवाज लगाकर चाय बेचने वाले बच्चे के भाग्य मे भारत का प्रधानमन्त्री होना लिखा था। मोदी जी की जीवन-यात्रा और कार्यशैली मे ’भाग्य-भरोसा’ नाम का कोई शब्द नही है और वह सच्चे अर्थाें मे श्रीमद्भगवतगीता मे भगवान श्रीकृष्ण के सन्देशानुसार कर्म योगी हैं। वह अपने कर्म पर विश्वास करते हैं और इस युग के महान कर्मवीर ’’सेल्फ मेड पर्सन’’ के नाम से हमेशा विख्यात रहेंगे। मोदी जी का बचपन अत्यन्त आर्थिक तंगी मे व्यतीत हुआ, उनकी मां गरीबी के कारण अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिये दूसरे के घरों मे बर्तन साफ करना और घर की साफ-सफाई का काम करती थीं। उससे जो आय होती थी, तो परिवार का खर्च चलता था। मोदी जी 8 वर्ष की आयु मे राष्ट्रीय-स्वयंसेवक-संघ के सम्पर्क मे आ गए थे और संघ की शाखा मे जाने लगे थे। वहां पर लक्ष्मण राव इनामदार, जिन्हे वकील साहब के नाम से जाना जाता था, उन्होने मोदी को संघ मे बाल-स्वयंसेवक के रूप मे शामिल किया था। 



अपनी युवावस्था मे वह अध्यात्मिक चिन्तन के साथ भारत भ्रमण पर घर से बाहर निकल गए थे। उन्होने उत्तर एवं उत्तर-पूर्वी भारत का 2 वर्षों तक भ्रमण किया, कोलकता मे स्वामी विवेकानन्द द्वारा स्थापित बेलूर मठ, अलमोड़ा स्थित अद्वैत आश्रम व राजकोट स्थित रामकृष्ण मिशन मे उन्होने अध्यात्म साधना की थी और सिलीगुड़ी, गौहाटी मे भ्रमण करते रहे। तत्समय मोदी जी के मन मे ऐसी कल्पना भी नही थी कि राजनीति मे जाना है। अहमदाबाद मे मोदी की मुलाकात संघ कार्यालय मे पुनः इनामदार जी से हुई। इसी बीच सन् 1971 मे भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ और तभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्ण-कालिक प्रचारक हो गए। दिनांक 26 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अपनी सत्ता की सुरक्षार्थ भारत मे आपतकाल लगा दिया था, क्यों कि समाजवादी नेता स्व. श्री राजनारायण के द्वारा दायर चुनाव याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर करते हुये इन्दिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित कर दिया था, उसके परिणामस्वरूप इन्दिरा गांधी को अपना पद छोड़ना चाहिये था और उसी से बचने के लिए उन्होने देश पर एमर्जेन्सी थोप दी थी। आपत्काल के उस दौर मे संघ पर प्रतिवंध लगा दिया गया था और उससे नरेन्द्र मोदी भी अछूते नही रहे, वह भूमिगत हो गए थे। उस समय मोदी जी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कार्य देख रहे थे। वर्ष 1978 मे वह विभाग प्रचारक होते हुए और उन्होने विद्या अध्ययन भी जारी रक्खा था तथा डिस्टेन्स कोर्स के माध्यम से राजीनीति-शास्त्र मे दिल्ली यूनीवर्सिटी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी, उसके बाद गुजरात यूनीवर्सिटी से स्नाकोत्तर की डिग्री हांसिल की।  वर्ष 1985 मे नरेन्द्र भाई मोदी राष्ट्रीय-स्वयंसेवक-संघ से भारतीय जनता पार्टी मे शामिल हुए और 1988 मे भाजपा गुजरात राज्य के संगठन मन्त्री नियुक्त हो गए थे। माह नवम्बर 1995 मे मोदी जी भाजपा के राष्ट्रीय मन्त्री नियुक्त हुए, तब वह गुजरात से दिल्ली आ गए थे। उन्हे हरियाणां और हिमाचल प्रदेश का प्रभार दिया गया था। वर्ष 1998 मे उन्हे भाजपा के राष्ट्रीय महामन्त्री नियुक्त किया गया। वर्ष 2001 मे जब गुजरात मे श्री केशुभाई पटेल का स्वास्थ्य खराब होने लगा था और उप-चुनावों मे भाजपा को पराजय मिली थी, तभी दिनांक 7 अक्टूबर 2001 को नरेन्द्र मोदी ने प्रथम बार गुजरात के मुख्यमन्त्री पद की शपथ ली थी और दिनांक 24 फरवरी 2002 को राजकोट से प्रथम बार विधायक निर्वाचित हुए थे। 
माननीय नरेन्द्र मोदी का जीवन-काल प्रारंभ से ही चुनौतीपूर्ण रहा है, और प्रत्येक चुनौती को उन्होने एक अवसर माना, उसे स्वीकार किया और उस पर विजय भी प्राप्त की। दिनांक 27 फरबरी 2002 को जब सैकड़ो हिन्दू तीर्थ-यात्री अयोध्या से दर्शन करके ट्रेन से वापिस हो रहे थे, तो गोधरा रेल्वे स्टेशन पर कुछ राष्ट्रद्रोहियों एवं हिन्दूबिरोधियों द्वारा इस ट्रेन मे आग लगा दी गई थी, जिसमे 60 तीर्थ-यात्री जल कर मर गए थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि गोधरा काण्ड की प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप गुजरात मे दंगे हुए थेे। मुख्यमन्त्री के रूप मे नरेन्द्र मोदी ने इन दंगो को रोकने के लिये कड़े निर्देश जारी किए थे। यह समय-काल मोदी के लिये अत्यन्त संघर्ष व संकटमय था। एक ओर तो बामपन्थी, कांग्रेस तथा अन्य राजनीतिक दल मोदी पर राजनीतिक हमला कर रहे थे और दूसरी ओर गुजरात के दंगो को शांत कराने की चुनौती भी उनके सामने थी। गुजरात दंगो के कारणों पर विभिन्न प्रकार की जांचे हुई, मानव अधिकार आयोग व मीडिया जगत ने भी मोदी पर हमला करने मे कोई कसर नही छोड़ी थी। अन्ततः यह पाया गया कि नरेन्द्र मोदी के बिरूद्ध गुजरात दंगो के संदर्भ मे लगाए गए समस्त आरोप गलत व झंूठ हैं और उनके बिरूद्ध कोई साक्ष्य उपलब्ध नही हुई है। एस.आई.टी. की जांच रिपोर्ट, उसकी क्लोजर रिपोर्ट, मजिस्ट्रेट न्यायालय का आंकलन और भारत की सर्वोच्च न्यायालय से प्रधानमन्त्री मोदी को निर्दोष और पाक-साफ माना गया। नरेन्द्र भाई मोदी ने वर्ष 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमन्त्री रहै और उनके द्वारा गुजरात की जनता को स्वच्छ, पारदर्शी व निर्भीक प्रशासन दिया गया। विश्व मे गुजरात माॅडल विख्यात हुआ।  
प्रधानमन्त्री पद पर आसीन होने के पश्चात ही मोदी जी ने अपने कार्यों के कारण जितनी उपलब्धियां अर्जित की हंै, उससे भारत को विकास की नई दिशा मिली है। मोदी जी स्वभावतः समाज के उत्थान और सुधारवादी विचारक हैं और इसी कारण उन्होने देश की आम-जनता की जीवनशैली मे जागृति उत्पन्न करने का प्रयास किया है। स्वच्छ भारत अभियान, घरों व विद्यालयों मे, सार्वजनिक स्थलों पर शौचालय निर्माण का अभियान के वह प्रेरक हैं। जन-धन योजना के तहत जीरों बैलेन्स पर बैंकों मे खाते खोले गए। ध्यान करना होगा कि इसके पहले बैंकों मे गरीबों के खाते ही नही खोले जाते थे। इसके पीछे का उद्देश्य यही है कि शासन से मिलने वाली सहायता राशियों का भुगतान सीधे बैंक मे जमा हो। न्यूनतम एक मुश्त संाकेतिक राशि बैंक मे जमा करने पर बीमा योजना, प्रधानमन्त्री उज्वला योजना, मुद्रा बैंक के माध्यम से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग व अल्पसंख्यकों को सहायता, प्रधानमन्त्री कृषि सिंचाई योजना, आयुष्मान भारत योजना देश की जनता को उपलब्ध कराई है। मोदी जी का यह संकल्प है कि वर्ष 2022 तक भारत मे ऐसा कोई परिवार नही होगा, जिसके पास उसका अपना घर न हो। मोदी जी के कार्यकाल मे पहली बार स्किल डिव्लपमेन्ट मन्त्रालय बना जिसके द्वारा देश के युवाओं मे रोजगार की संभावनाये निर्मित करना और ‘‘मेक इन इण्डिया’’ की भावना जागृत करना है।

जब से नरेन्द्र भाई मोदी भारत के प्रधानमंत्री हुए तभी से भारत की आम जनता यह अनुभव कर रही है कि विपक्षी राजनीतिक दल और मुख्यतः बामपंथी व कांग्रेस के नेताओं ने नरेन्द्र मोदी पर अपशब्द व गालियां देने का काम किया है। विपक्षियों द्वारा कटाक्ष और वाक-हमला करते हुये एक मात्र नरेन्द्र मोदी को टारगेट बनाकर अपमानजनक टिप्पणियां अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम की हैं। उन्हे यह दिख रहा है कि मोदी जी भारत के सर्वाधिक सशक्त, लोकप्रिय और विकास की राह के एक मात्र केन्द्र-बिन्दु हैं। राहुल गान्धी व सोनिया गांन्धी किसी भी स्थिति मे मोदी जी को सहन नही हो पा रहे हैं व उन्होने गाली-गलौच के स्तर पर अपनी अपमानजनक भाषा-शैली से ऐसा प्रदर्शित किया है कि जैसे उनकी कोई निजी वैमनस्यता मोदी जी से हो। यही तो फासिस्टवादी सोच है जो इटली से निकलकर भारत मे प्रकट हो रहा है। दिन-प्रतिदिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों की सफलता और उनकी कर्मशीलता के प्रति लगातार कांग्रेस मे असहिष्णुंता देखी जा रही है। भारत मे कट्टवादी मुस्लिम व गैर-भाजपाई नेता मोदी के बिरूद्ध कितना भी विष-वमन करलें, लेकिन वे यह भी ध्यान करैं कि साऊदी अरबिया मे दिनांक 3 अप्रेल 2016 को नरेन्द्र मोदी जी को वहां के सर्वोच्च सम्मान ’सिविलियन आॅनर’ से सम्मानित किया गया था और तत्समय वहां की मुस्लिम महिलाओं ने सार्वजनिक व सामूहिक रूप मे ’भारत माता की जय’ के नारे लगाये थे। प्रधानमन्त्री के रूप मे मोदी जी के दूसरे कार्यकाल की महात्वपूर्ण उपलब्धियां तीन तलाक, संविधान के अनुच्छेद 370 व 35-ए की समाप्ति, कश्मीर समस्या का स्थाई निदान, एन.आर.सी. कानून को भारत के इतिहास मे से कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। आज चीन की हालत सांप-छछूंदर जैसी हो गई है जो भारत की शक्ति से भयभीत है और वह अच्छी तरह यह समझ गया है कि अब भारत 1962 वाला नहीं है, यह प्रधानमन्त्री मोदी के कार्यकाल का 2020 का भारत है। प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का आज जन्म-दिवस पर उनका शत-शत बार अभिनन्दन है और ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमेशा स्वस्थ रहैं व दीर्घायु हों।




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--राजेन्द्र तिवारी--
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